मोहम्मद रफी की जिंदगी का वो आखिरी दिन, सुबह की भजन की रिहर्सल, रात में दुनिया को कह दिया अलविदा
मोहम्मद रफी का वो आखिरी दिन सुबह की भजन की रिहर्सल, शाम हॉस्पिटल में बिताई और रात को दुनिया को अलविदा कह दिया। रफी साहब के निधन के बाद उनके घर में नहीं बजे उनके गाए गाने। पत्नी के साथ हुई थी आखिरी बातचीत।

हिंदी फिल्मों में कई यादगार गीत गाने वाले मोहम्मद रफी देशभर में खूब पसंद किया जाता था। उन्होंने 1950 के दशक से लेकर 1980 तक मोहम्मद रफी हिंदी फिल्मों में छाए रहे। वो उस समय के हर दौर के हीरो की आवाज बने। लेकिन सिर्फ 55 साल की उम्र में दुनिया छोड़ गए। उनके अंतिम दिन का हाल बेटे शाहिद रफी ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था। मोहम्मद रफी ने हॉस्पिटल के बिस्तर पर पत्नी बिलकिस से आखिरी बातचीत की थी। उसके बाद वो ऐसी नींद में सोए कि फिर कभी नहीं उठे। मोहम्मद रफी का दुनिया से जाना दुखद था। लेकिन उनके परिवार के लिए सदमा बना गया।
रफी साहब की जिंदगी का वो आखिरी दिन
बात 31 जुलाई की सुबह की है। उस दिन मोहम्मद रफी अपने बंगले पर एक बंगाली भजन की रिहर्सल कर रहे थे। म्यूजिक डायरेक्टर आए हुए थे। गाने की फाइनल रिहर्सल हुई और डायरेक्टर्स खुश होकर घर से चले गए। लेकिन इसी रिहर्सल के दौरान रफी साहब को सीने में दर्द महसूस हुआ। परिवार के सामने अपना दर्द छुपाकर वो कमरे में गए और सोडा मिंट की दवाई निकाल कर खा ली। पत्नी बिलकिस ने जब पूछा तो बोले एसिडिटी महसूस हो रही है। लेकिन उनकी पत्नी बिलकिस को शक हुआ और वो रफी साहब के पीछे नीचे तक आई। पत्नी ने घर आए अपने भाई जहीर से कहा कि रफी साहब की तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही। जब जहीर ने सिंगर का चेहरा देखा तो कान की तरफ से पसीना आ रहा था। कुछ ठीक नहीं लगा तो जहीर ने तुरंत फैमिली डॉक्टर चंद्रमणि को बुलाया।
रफी साहब को आया था हार्ट अटैक
डॉक्टर चंद्रमणि ने चेकअप किया और कहा कि मामला दिल का हो सकता है। हार्ट स्पेशलिस्ट को बुलाना पड़ेगा। तब तक रफी साहब के नाखून नीले पड़ गए थे। हार्ट स्पेशलिस्ट घर आए, ऑक्सीजन का सिलेंडर भी साथ लाए। डॉक्टर समझ गए कि मोहम्मद रफी को हार्ट अटैक आया है। ये बात उनकी पत्नी को आराम से समझाई गई। तुरंत हॉस्पिटल ले जाने की तैयारी शुरू हुई। एंबुलेंस बुलाए जाने की बात हुई। लेकिन रफी साहब बोले कि वो अपनी गाड़ी में ही हॉस्पिटल जाएंगे। उन्हें नेशनल हॉस्पिटल ले जाया गया लेकिन अफसोस वहां पेसमेकर नहीं था।
एंबुलेंस में फिर आया हार्ट अटैक
मामला बिगड़ता देख बॉम्बे हॉस्पिटल के हार्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर मोदी को फ़ोन किया गया। डॉक्टर मोदी ने मामले की गंभीरता समझते हुए अपनी एक टीम एंबुलेंस के साथ भेजी। मोहम्मद रफी को उस एंबुलेंस में बॉम्बे हॉस्पिटल के लिए रवाना किया गया। इसी दौरान एंबुलेंस में रफी साहब को तीन बार हार्ट अटैक आया। हॉस्पिटल पहुंचते ही ऑपरेशन किया गया। पेसमेकर लगाया गया। लेकिन डॉक्टर्स ने कह दिया था कि रफी साहब को हॉस्पिटल लाने में देरी हो गई है।
डॉक्टर ने कहा अब नहीं रहे रफी साहब
रफी साहब के आखिरी पलों में उनकी पत्नी उनके साथ थी। वो ICU में थे। उन्हें चारों तरफ बॉडी से चिपके ट्यूब, तार पसंद नहीं आ रहे थे। तब उनकी पत्नी ने प्यार से समझाया कि अप बच्चों की तरह जिद्द मत करो और आराम करो। पत्नी की बात सुनकर रफी साहब आराम करने के लिए लेट गए। लेकिन फिर कुछ ही देर में डॉक्टर्स आए और उन्होंने रफी साहब को मृत घोषित कर दिया। समय था 31 जुलाई 1980 रात के 10.25।
पैरों में गिरकर रोए किशोर कुमार
मोहम्मद रफी के जनाजे में उस समय 10 हजार से ज्यादा लोग एकजुट हुए थे। सिंगर के घर पर सेलेब्रिटी का हुजूम था। किशोर कुमार तो रफी के पैरों में रोए। बड़े एक्टर्स अपने इस सिंगर को आखिरी विदाई देने पहुंचे। सिंगर के निधन के बाद उनके घर का माहौल बदल गया। सालों तक बच्चों ने पिता के गाने नहीं सुने। घर में रफी के गाने बजना बंद हो गए। क्योंकि उनकी पत्नी जैसे ही रफी के गाने सुनती वो गहरे सदमे में चली जाती थीं।
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