मिर्जापुर मूवी के हिट होने की चार बड़ी वजहें, इन्हीं गलतियों की वजह से पिट जाते हैं सीक्वल
Mirzapur The Movie: मिर्जापुर मूवी उन्हीं कुछ वजहों से बॉक्स ऑफिस पर हिट हुई है, जिन वजहों को नजरअंदाज करके ज्यादातर फिल्मों के सीक्वल पिट जाते हैं।

फिल्म 'मिर्जापुर - द मूवी' को ऑडियंस का काफी पॉजिटिव रिएक्शन मिला है। रिलीज के बाद से लेकर अभी तक फिल्म बॉक्स ऑफिस पर 40 करोड़ रुपये से ज्यादा की ग्रॉस कमाई कर चुकी है। मिर्जापुर पहले एक वेब सीरीज थी जिसके तीनों सीजन हिट रहे थे और इसके बाद जब मेकर्स ने इसे बतौर फिल्म रिलीज किया, तो अब भी इसने कमाल कर दिया। यह कुछ ऐसा है, जो बहुत आम नहीं है। फिल्मों और सीरीज की आमतौर पर जब सीक्वल आती है तो वह हमेशा उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती। तो चलिए जानते हैं कि फिल्में ऐसी क्या गलती करती हैं, जो नहीं करके मिर्जापुर ने बॉक्स ऑफिस पर कमाल कर दिया है।
दर्शकों की पसंदीदा चीजों को बदल देना
अक्सर मेकर्स सीक्वल में कहानी को नया बनाने के चक्कर में उस X फैक्टर को ही हटा देते हैं, जिसकी वजह से पिछला पार्ट हिट हुआ था। ये वह कॉमन मिस्टेक हैं जो फिल्मों के साथ-साथ सीरीज में भी देखने को मिलती है। जब भी किसी फिल्म या सीरीज का नया पार्ट आता है, तो ऑडियंस वही फील लेने के लिए थिएटर्स या ओटीटी पर जाती है, जो उसे पिछली बार मिला था, इस बात का मिर्जापुर के मेकर्स ने खास ख्याल रखा और भौकाल का लेवल कम नहीं होने दिया। मेकर्स ने फैंस की नब्ज को पहचाना।
सीरीज के कॉन्टेंट को ही स्ट्रेच करना
आमतौर पर जब भी किसी सीरीज को फिल्म में बदलने की बात होती है तो मेकर्स पुरानी ही कहानी को आगे खींचने की कोशिश में जुट जाते हैं, जो कि गलत है। जब कोई प्रोजेक्ट सीरीज से फिल्म में आता है तो ओटीटी के साथ-साथ बहुत बड़ी ऑडियंस थिएटर्स की भी होती है। बिलकुल नई ऑडियंस जो इसे एक नई कहानी के तौर पर देख रही होती है। मिर्जापुर के मेकर्स ने इस बात का ध्यान रखा और नए किरदारों को इस तरह कहानी में जोड़ा कि पुराना वाला वाइब भी मेनटेन रहे और नई ऑडियंस को भी यह फिल्म उनकी सी लगे।
थिएटर-ओटीटी का फर्क न समझना
ओटीटी पर लोग लंबे सीन देख सकते हैं, लेकिन थिएटर्स में ऑडियंस को लार्जर दैन लाइफ सीन्स पसंद आते हैं जो उन्हें बड़े पर्दे का मजा दे सकें। मिर्जापुर ने अपनी सीरीज की कहानी को नए कलेवर में बड़े पर्दे पर परोसा जो कि ऑडियंस को पसंद आया। फिल्म में हर कुछ मिनटों में सीटीमार मोमेंट्स, धमाकेदार बैकग्राउंड स्कोर और चेज सीक्वेंस के लिए खास तौर पर डिजाइन किए गए गाने डाले गए थे।
केवल नाम बेचकर पैसे कमाने की कोशिश
सीक्वल फ्लॉप होने की सबसे बड़ी वजह यह होती है कि मेकर्स सोचते हैं कि ब्रांड नेम बड़ा है, तो कुछ भी परोसेंगे तो चल जाएगा। इससे ऑडियंस न सिर्फ निराश होती है, बल्कि उस फ्रेंचाइजी से ही कटना शुरू कर देती है। मिर्जापुर के मेकर्स जानते थे कि उनके कंधों पर कितनी बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने बड़ी समझदारी के साथ अपने नाम का इस्तेमाल करते हुए हर सीन पर मेहनत की और कहानी को हल्का नहीं पड़ने दिया।


