इस गीतकार ने अपनी लिखी कविता से पंडित नेहरू को कर दिया था आहत, 2 साल की हुई जेल
हिंदी फिल्मों में एक ऐसा गीतकार हुआ जिसने अपनी लिखी कविता से उस दौर के देश में प्रधानमंत्री पंडित नेहरू समेत कई नेताओं को असहज कर दिया था। माफी नहीं मांगी और काटी सजा।

हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गीतकार-शायर हुए जिन्होंने अपने लिखे गीतों से क्रांति की शुरुआत की। कईयों की कलम से देशभक्ति, किसानों, सामाज की बुराइयों के खिलाफ गीत निकले तो कुछ ने नेताओं पर निशाना साधा था। इनमें से कुछ विवादों में छाए रहे। एक ऐसे गीतकार भी हुए जिनकी लिखी कविता ने उस दौर के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू तक को ठेस पहुंचा दी थी। जब माफी नहीं मांगी तो उन्हें जेल भेज दिया गया था। वो गीतकार, शायर थे मजरूह सुल्तानपुरी।
मजरूह सुल्तानपुरी को अपनी कविता के लिए भेज दिया गया था जेल
असरार उल हसन खान के नाम से 1919 में जन्में शायर मजरूह सुल्तानपुरी की पढ़ाई मदरसे में हुई। यहीं से उन्होंने उर्दू पर अपनी पकड़ जमाई।अरबी और फारसी भी सीखी। इसी दौरान कई मुशायरों में मजरूह सुल्तानपुरी कविता, शायरी पढ़ते और उनकी खूब तारीफ होती। ये देश की आजादी के बाद के कुछ साल थे। इसी दौरान शायर मजरूह सुल्तानपुरी, एक्टर बलराज साहनी एक मजदूर हड़ताल का हिस्सा बने और एक ऐसी कविता सुना दी जिससे उस समय के गवर्नर मोरारजी देसाई ने उन्हें जेल मुंबई की एक जेल भेज दिया।
इस किताब में है घटना का जिक्र
ऐसा कहा जाता है कि उनकी लिखी कविता ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को ठेस पहुंचा दी थी।इसका जिक्र कमलेश कपूर ने अपनी किताब पार्टिशन: द लिगेसी ऑफ एमके गांधी में किया है। अपनी किताब में उन्होंने लिखा है कि कविता सुनाने के बाद मजरूह सुल्तानपुरी को दो साल के लिए जेल भेज दिया गया था। उनसे माफी मांगने के लिए भी कहा गया था। लेकिन मजरूह सुल्तानपुरी झुके नहीं और उन्हें दो साल तक जेल में रह पड़ा था। जेल में रहने के दौरान उन्होंने कई गीत लिखे।
नेहरू की हिटलर से तुलना
जिस कविता को लेकर विवाद हुआ था, वो कविता थी -
वो कविता थी-
'मन में जहर डॉलर के बसा के,
फिरती है भारत की अहिंसा।
खादी की केंचुल को पहनकर,
ये केंचुल लहराने न पाए।
ये भी है हिटलर का चेला,
मार लो साथी जाने न पाए।
कॉमनवेल्थ का दास है नेहरू,
मार लो साथी जाने न पाए।'
मजरूह सुल्तानपुरी हिंदी फिल्मों के लिए भी कई अमर गीत लिखे। उस समय मोटी फीस लेते और अपनी शर्तों पर जीवन जीते। उन्हें 40 और 50 के दशकों से गीत लिखने वाले मजरूह सुल्तानपुरी ने अपनी आखिरी सांस तक कलम चलाई। प्रीति जिंटा की फिल्म क्या कहना के सभी गाने मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे। फिल्म दहक समेत कई फिल्मों के लिए उनकी कलम चला।
लेखक के बारे में
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