पाकिस्तान में पैदा हुए इस गीतकार ने लिखा था पहली भोजपुरी फिल्म के लिए गाना, मौत ने रुलाया
पाकिस्तान में पैदा हुए इस गीतकार ने लिखा था पहली भोजपुरी फिल्म के लिए गाना। राज कपूर को दिए बेस्ट गाने। लेकिन इस गीतकार की मौत ने सभी को रुला दिया। जानिए कौन था ये गीतकार-

हिंदी फिल्मों में एक गीतकार ऐसे भी हुए जिन्होंने राज कपूर को उनके करियर के सबसे हिट गाने दिए। मीना कुमारी पर फिल्माया गाना 'अजीब दास्तां हैं ये' उन्होंने ही लिखा था। इस गीतकार का नाम था शैलेंद्र जो अपनी पहली ही प्रोड्यूस की हुई फिल्म के बाद सदमे में चले गए थे। शैलेंद्र ऐसे गीतकार थे जिन्होंने भोजपुरी इंडस्ट्री की पहली फिल्म के लिए गीत लिखे। ये गाने सुपरहिट हुए। आज भी राज कपूर के इस बेस्ट गीतकार को उनके भोजपुरी गीतों के लिए भी याद किया जाता है।
पहली भोजपुरी फिल्म के लिए लिखा गाना
बात 1962 की है। उस समय कुंदन कुमार भोजपुरी में एक फिल्म बना रहे थे। उन्होंने नाजिर हुसैन की कहानी को लेकर पहली भोजपुरी फिल्म 'गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो' बनाई। इस फिल्म के गीतों को लिखने की जिम्मेदारी उस समय के मशहूर हिंदी गीतकार शैलेंद्र को दी गई। गीतकार ने पहली भोजपुरी फिल्म के लिए 'हे गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो, सइयां से कर द मिलनवा हाय राम' गाना लिखा था।
पाकिस्तान के गीतकार ने लिखा भोजपुरी गाना
अब आप हैरान होंगे कि कैसे पाकिस्तान के रावलपिंडी में पैदा हुए शैलेंद्र की भोजपुरी में इतनी अच्छी पकड़ कैसे थी? दरअसल, शैलेंद्र के दादा-परदादा बिहार के आरा के रहने वाले थे। उनके घर में भोजपुरी भाषा का चलन था जिसका असर उनपर भी दिखा। शैलेंद्र ने सिर्फ भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में ही नहीं बल्कि कई हिंदी गानों में भी अपनी भोजपुरी पकड़ की झलक दिखाई थी। वो शैलेंद्र ही थे जिन्होंने 'पान खाए सइयां हमार हो, सांवली सुरतिया आ होंठ लाल लाल', 'चलत मुसाफिर मोह लियो रे,पिंजरे वाली मुनिया', देव आनंद की फिल्म गाइड का गाना 'पिया तोसे नैना लागे रे, नैना लागे रे' जैसे गानों में भोजपुरी भाषा और टोन सुनाई देती है।
शैलेंद्र की मौत
शैलेंद्र ने हिंदी फिल्मों के लिए 'मेरा जूता है जापानी', 'अजीब दास्तां है ये', 'प्यार हुआ इकरार हुआ', 'जीना यहां मरना यहां' जैसे यादगार गाने लिखे।लेकिन उनकी मौत ने सबको रुला दिया। दरअसल, शैलेंद्र ने राज कपूर को लेकर अपने करियर की पहली फिल्म बनाई। इस फिल्म पर उन्होंने अपनी सारी जमापूंजी लगा दी। फिल्म का नाम था तीसरी कसम। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई। इस फिल्म के फ्लॉप होने के गम में शैलेंद्र शराब के नशे में डूब गए उसी साल के अंत में उनका निधन हो गया। जिस फिल्म के फ्लॉप होने पर शैलेंद्र ने इतना दुख मनाया। अगले साल इसी फिल्म ने नेशनल अवॉर्ड जीता था।


