महज 25 मिनट में इन चार शब्दों से लिखा गया बॉलीवुड का वो सुपरहिट गाना, जिसे किशोर कुमार ने आवाज से कर दिया अमर
किशोर कुमार के न जाने कितने गाने आज भी बॉलीवुड के इतिहास में अमर हैं। किशोर कुमार की आवाज जितनी चंचल और जादू भरी थी असल जिंदगी में वो भी बिल्कुल ऐसे ही थे। उनके हर गाने की पीछे कोई न कोई दिलचस्प जुड़ा है। किशोर का एक ऐसा गाना है, महज 25 मिनट में इन चार शब्दों से लिखा गया था।

बॉलीवुड के दिग्गज सिंगर और एक्टर किशोर कुमार आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। अपने करियर में किशोर कुमार ने कई शानदार फिल्में और ब्लॉकबस्टर गाने दिए हैं। उनके न जाने कितने गाने आज भी बॉलीवुड के इतिहास में अमर हैं। किशोर कुमार की आवाज जितनी चंचल और जादू भरी थी असल जिंदगी में वो भी बिल्कुल ऐसे ही थे। उनके हर गाने की पीछे कोई न कोई दिलचस्प जुड़ा है। किशोर का एक ऐसा गाना है, महज 25 मिनट में इन चार शब्दों से लिखा गया था। वो गाना आज भी सुपरहिट है। आइए जानते हैं कौन साथ है किशोर का वो अगर गीत?
आशा पारेख और राजेश खन्ना पर फिल्माया गया ये गाना
किशोर कुमार के हम जिस गाने की बात कर रहे हैं वो गाना है साल 1971 में आई फिल्म 'आन मिलो सजना' का सुपरहिट गाना 'अच्छा तो हम चलते हैं'। इस गाने को राजेश खन्ना और आशा पारेख पर फिल्माया गया था। इस गाने में एक प्रेमी का अपनी प्रेमिका से बिछड़ने के भाव को गाने में पिरोया। 'अच्छा तो हम चलते हैं' उस दौर का सुपरहिट सॉन्ग था और इसे आज भी उतना ही पसंद किया जाता है, जितना कि 1971 में किया गया था।
जब सुबह से शाम तक नहीं बनी धुन
'अच्छा तो हम चलते हैं' गाने को इसे संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने बनाया था और बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे। गाने को किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी। इस गाने के बनने के पीछे एक बेहद दिलचस्प किस्सा है। दरअसल, आनंद बक्शी और म्यूजिक डायरेक्टर्स की मशरूर जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ बैठे काफी वक्त अपने दिमाग पर जोर डाल रहे थे कि 'आन मिलो सजना' के गाने की धुन पर आखिर क्या लिखा जाए।
25 मिनट में इन चार शब्दों से लिखा गया पूरा गाना
ऐसे में सोचते हुए शाम ढलने लगी, और लक्ष्मीकांत जी ने कहा कि, "भई!, अब बहुत हुआ, अच्छा तो हम चलते हैं", सरसरी सी बात में आनंद साहब ने जवाब में पूछा, फिर कब मिलोगे, उधर से जवाब आया, जब तुम कहोगे...."। बस फिर क्या था इतने में न जाने आनंद साहब के दिमाग में क्या आया, उन्होंने लक्ष्मीकांत रोकते हुए बैठने के लिए कहा। लक्ष्मीकांत जी मना करने लगे कि, नहीं अब क्या, तो उन्होंने कहा कि, गाना तो बन गया। ये गाना महज 25 मिनट में इन चार शब्दों से पूरा लिख दिया गया।
ये है गाने के वो बोल
"अच्छा तो हम चलते हैं,
फिर कब मिलोगे,
जब तुम कहोगे,
जुम्मे रात को,
हां हां आधी रात को।"
लेखक के बारे में
Priti Kushwahaप्रीति कुशवाहा को डिजिटल मीडिया में 9+ सालों का प्रोफेशनल एक्सपीरियंस है। वह फिलहाल 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के मनोरंजन सेक्शन में बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं। प्रीति को मनोरंजन जगत के हर इवेंट, मूवी रिलीज और लाइव इवेंट्स को कवर करना पसंद है।
करियर
प्रीति ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया कानपुर हिन्दुस्तान प्रिंट से की थी। इसके बाद मेरठ जनवाणी में फीचर डेस्क पर एक साल काम किया। इसके बाद दैनिक भास्कर (रोहतक) में सब-एडिटर के तौर पर एक साल में काम। साल 2019 में डिजिटल मीडिया में काम शुरू किया और राजस्थान पत्रिका (जयपुर) में डिजिटल एंटरटेनमेंट पत्रकारिता, वीडियो कंटेंट पर काम किया। गृहलक्ष्मी मैगजीन में उनके डिजिटल और मैगजीन के लिए काम किया। दैनिक जागरण डिजिटल में साढ़े तीन साल एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा रहीं।
एजुकेशन: प्रीति ने कानपुर यूनिवर्सिटी से बीकॉम की डिग्री और फिर भारतीय विद्या भवन से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। साथ ही राजश्री टंडन ओपन यूनिवर्सिटी से मास्टर्स किया।
एंटरटेनमेंट पत्रकारिता और डिजिटल विजन: प्रीति का मानना है कि एंटरटेनमेंट पत्रकारिता में खबरों को रोचक बनाने के साथ ही उसमें फैक्ट का पूरा ध्यान रखना जरूरी है। साथ ही सोशल मीडिया के ट्रेंड को फॉलो करना बेहद जरूरी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ऑडियंस बिहेवियर को समझकर वह हाई-रीच और हाई-एंगेजमेंट स्टोरीज तैयार करती हैं।
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