कैसे शूट हुए थे 'जजंतरम ममंतरम' के ये सीन? मेकर्स के लिए यह थी सबसे बड़ी चुनौती
आज VFX की मदद से जिन सीन्स को फिल्माना मेकर्स के बाएं हाथ का खेल है, एक वक्त पर उन्हें तैयार कर पाने में लोगों को नानी याद आ जाती थी। तो फिर साल 2003 में ये सीन मेकर्स ने कैसे शूट किए थे? चलिए जानते हैं।

हम अक्सर ये बात करते हैं कि कैसे तकनीक और नई चीजें आजमाने के मामले में हमारा सिनेमा पुराने जमाने के मुकाबले काफी सुस्त हो गया है। इसका एक और उदाहरण हमें साल 2003 में आई फिल्म 'जजंतरम ममंतरम' के जरिए भी मिलता है। यह उस वक्त की फिल्म है जब भारतीय सिनेमा VFX पर पूरी तरह शिफ्ट नहीं हो सका था और धीरे-धीरे नई तरह के प्रयोग करने के लिए मेकर्स थोड़ी तकनीक और थोड़ी जुगाड़ का सहारा ले रहे थे। इस फिल्म की शूटिंग के लिए मेकर्स ने कुछ गजब के ट्रिक्स लगाए थे जिनके बारे में आज शायद सोच पाना भी मुश्किल लगेगा।
क्या थी फिल्म जजंतरम ममंतरम की कहानी?
जावेद जाफरी, गुलशन ग्रोवर और जॉय फर्नांडिस स्टारर इस फिल्म की कहानी एक ऐसे शख्स की कहानी थी जो गलती से एक अनजान द्वीप पर पहुंच गया है। यहां उसे पता चलता है कि यहां पर कई छोटे-छोटे इंसान रहते हैं जिनकी अपनी दुनिया, अपनी मुश्किलें और अपनी चुनौतियां हैं। फिल्म काफी हद तक 'गलिवर्स ट्रेवल्स' से प्रेरित थी। सौमित्रा रानाडे के निर्देशन में बनी इस फिल्म में जावेद जाफरी और रॉय को इतना बड़ा दिखाने और टापू के लोगों को इतना छोटा दिखाने के लिए मेकर्स ने गजब का दिमाग लगाया था।
फिल्ममेकर्स ने इस तरह शूट किए थे ये सीन
फिल्म में जावेद को विशालकाय दिखाने के लिए मेकर्स ने उनके वाले सीन बहुत करीब से और जरूरत के मुताबिक कभी एक्सट्रीम लोअर एंगल पर, तो कभी एक्सट्रीम टॉप एंगल से शूट किए थे। जबकि शुंडी वासियों को बहुत छोटा दिखाने के लिए उनके वाले सीन बहुत दूर से शूट किए जाते थे। अब इस फिल्म की शूटिंग में सबसे बड़ी चुनौती मेकर्स के लिए कोई तकनीक नहीं बल्कि सूरज था। सूरज? जी हां, मेकर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि जब दो अलग-अलग शॉट को उन्हें बहुत करीब और बहुत दूर से शूट करना है, तो उसके बीच में सनलाइट बदल जाती थी, यानि सूरज अपनी जगह से शिफ्ट हो जाता था।
इस तरह शूट किया गया था VFX जैसा सीन
परछाई की लंबाई बदल जाती और इसके लिए मेकर्स ने एक तरकीब लगाई। उन्होंने अपनी ग्रीन और ब्लू स्क्रीन को हर सीन के बाद सूरज के हिसाब से उतना ही शिफ्ट करना शुरू कर दिया। अब अगर हम आपको इसे उदाहरण के जरिए समझाएं तो जिस जीन में जावेद जाफरी जमीन पर पड़े हैं और मानव कौल उन्हें घड़े से पानी पिला रहे हैं, इस सीन के लिए पहले जावेद जाफरी का एक्सट्रीम क्लोजअप सीन लिया गया, और फिर मानव कौल का सीन बहुत दूर से लिया गया। बाद में इन सीन्स को क्लब किया गया। जिससे तैयार होता है यह कमाल का इल्यूजन।
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