मीना कुमारी का वो गाना, जिसमें पिरोए 7 भाव, लता मंगेशकर ने अपनी आवाज से बना दिया अमर, सुनकर आज भी रो पड़ते हैं लोग
1963 के हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर का एक ऐसा ही गाना है, जिसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज से अमर कर दिया। इस गाने में अभिनेत्री एक तरफ कहती है कि वो अपने प्रेमी के बिना रह नहीं सकती, तो वहीं दूसरी तरफ शिकायत करती है कि वो उसे अपने प्यार के पिंजरे में कैद कर रहा है।

हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गाने बने हैं, जो इतिहास में दर्ज हो गए हैं। कई गीतकार ने अपने गाने के जरिए इमोशन तक को पूरी तरह से उडेल दिया। उनके ये गाने सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं रहा, बल्कि भावनाओं का दस्तावेज बन गए। 1963 के हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर का एक ऐसा ही गाना है, जिसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज से अमर कर दिया। इस गाने में अभिनेत्री एक तरफ कहती है कि वो अपने प्रेमी के बिना रह नहीं सकती, तो वहीं दूसरी तरफ शिकायत करती है कि वो उसे अपने प्यार के पिंजरे में कैद कर रहा है। यानी हर भाव इस गाने में नजर आ रहे हैं। आइए जानते हैं कौन सी है वो फिल्म और कौन सा है वो गाना?
हसरत जयपुरी ने लिखा वो कालजयी गीत
हम बात कर रहे हैं साल 1963 में रिलीज हुई फिल्म 'दिल एक मंदिर' के सुपरहिट गाने 'हम तेरे प्यार में सारा आलम खो बैठे' की। ये गाना हिंदी सिनेमा के कालजयी नगमों में शामिल है। इस गाने को सुनते ही ऐसा महसूस होता है मानों इसे लिखने वाले ने इसमें प्रेम के हर रंग को शब्दों और सुरों में ढाल दिया गया हो। इसे गीतकार हसरत जयपुरी ने लिखा है। उन्होंने इस गीत में सात अलग-अलग भावों से इतनी खूबसूरती से पिरोया कि यह गीत आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। वहीं, लता मंगेशकर ने इस गाने को अपनी आवाज दी थी और इसका संगीत शंकर-जयकिशन ने तैयार किया था।
पहले जान लेते हें गाने के बोल...
हम तेरे प्यार में सारा आलम
खो बैठे हैं, खो बैठे
तुम कहते हो के ऐसे प्यार के
भूल जाओ, भूल जाओ
हम तेरे प्यार में सारा आलम
खो बैठे हैं, खो बैठे
तुम कहते हो के ऐसे प्यार के
भूल जाओ, भूल जाओ
हम तेरे प्यार में सारा आलम
एक गाने में पिरोए ये 7 भाव
हसरत जयपुरी बॉलीवुड के उन चुनिंदा शायरों में से एक थे, जिनकी पंक्तियां सीधे दिल को छू जाती थीं। उनका ये गाना न सिर्फ संगीतमय है, बल्कि भावनाओं की एक पूरी दुनिया समेटे हुए है। इस गाने में जयपुरी ने शिकायत, लगाव, सदमा, अनुरोध, समर्पण, व्यथा और सच्चा प्रेम। इन सात भावों के बेहद खूबसूरती से बांधा है।
कौन-कौन से हैं वो 7 भाव?
पहला भाव: लगाव- 'हम तेरे प्यार में सारा आलम खो बैठे हैं' इसमें एक्ट्रेस अपने पति से अपने लगाव के बारे में बताती है कि कैसे वो उसके प्यार में खोकर पूरी दुनिया को भुलता बैठी है। इसके बाद उसका दूसरा भाव होता है शिकायत 'तुम कहते हो के ऐसे प्यार को भूल जाओ, भूल जाओ…'। इसमें वो अपने पति की बात पर शिकायत करती है कि वह कैसे इस गहरे प्यार को भूलने की बात कह सकते हैं। इसी तरह वो आगे इस गाने में समर्पण को लेकर बात करते हुए हुए कहीत है,'पंछी से छुड़ाकर उसका घर, तुम अपने घर पर ले आए, ये प्यार का पिंजरा मन भाया, हम जी ही जी में मुस्काए'। नायिका प्यार को पिंजरा भी मानने को तैयार है, बस वह अपने प्रेमी के साथ ही रहना चाहती है। इसके आगे वो चौथे भाव में सदमा को लेकर जिक्र करती है। 'जब प्यार हुआ इस पिंजरे से, तुम कहने लगे आजाद रहो।' गाने की ये पंक्तियां सदमे को देखती है, जिसमें पति के प्रस्ताव से मिला गहरा सदमा पूरे गाने में झलकता है। गाने का पांचवां भाव: अनुरोध है। 'हम कैसे भुलाए प्यार तेरा, तुम अपनी जुबां से ये न कहो…'। नायिका बार-बार अनुरोध करती है कि ऐसा न कहो, यह प्यार भूलने लायक नहीं है। 'अब इन चरणों में दम निकले, बस इतनी और तमन्ना है…' ये लाइनें अभिनेत्री की व्यथा को दर्शाता है। इसके बाद आखिरी और सातवां भाव सच्चे प्रेम का है। 'इस तेरे चरण की धूल से हमने, अपनी जीवन मांग भरी, जब ही तो सुहागन कहलाई, दुनिया के नजर में प्यार बनी'।
लेखक के बारे में
Priti Kushwahaप्रीति कुशवाहा को डिजिटल मीडिया में 9+ सालों का प्रोफेशनल एक्सपीरियंस है। वह फिलहाल 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के मनोरंजन सेक्शन में बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं। प्रीति को मनोरंजन जगत के हर इवेंट, मूवी रिलीज और लाइव इवेंट्स को कवर करना पसंद है।
करियर
प्रीति ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया कानपुर हिन्दुस्तान प्रिंट से की थी। इसके बाद मेरठ जनवाणी में फीचर डेस्क पर एक साल काम किया। इसके बाद दैनिक भास्कर (रोहतक) में सब-एडिटर के तौर पर एक साल में काम। साल 2019 में डिजिटल मीडिया में काम शुरू किया और राजस्थान पत्रिका (जयपुर) में डिजिटल एंटरटेनमेंट पत्रकारिता, वीडियो कंटेंट पर काम किया। गृहलक्ष्मी मैगजीन में उनके डिजिटल और मैगजीन के लिए काम किया। दैनिक जागरण डिजिटल में साढ़े तीन साल एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा रहीं।
एजुकेशन: प्रीति ने कानपुर यूनिवर्सिटी से बीकॉम की डिग्री और फिर भारतीय विद्या भवन से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। साथ ही राजश्री टंडन ओपन यूनिवर्सिटी से मास्टर्स किया।
एंटरटेनमेंट पत्रकारिता और डिजिटल विजन: प्रीति का मानना है कि एंटरटेनमेंट पत्रकारिता में खबरों को रोचक बनाने के साथ ही उसमें फैक्ट का पूरा ध्यान रखना जरूरी है। साथ ही सोशल मीडिया के ट्रेंड को फॉलो करना बेहद जरूरी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ऑडियंस बिहेवियर को समझकर वह हाई-रीच और हाई-एंगेजमेंट स्टोरीज तैयार करती हैं।
खासियत
मूवी और OTT रिव्यू
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