देश की पहली महिला संगीत निर्देशक, जिसने 1941 में बनाई थी 'एक चतुर नार' की मूल धुन, अशोक कुमार ने गाया था वो गाना
कौन थी पहली महिला संगीत निर्देशक और 1941 में 'एक चतुर नार' गाने को पहली बार किसने गाया था।

साल 1968 में आई फिल्म 'पड़ोसन' उस दौर की हिट फिल्मों की लिस्ट में शामिल है। कॉमेडी से लेकर इस फिल्म में सुनील दत्त, सायरा बानो की एक्टिंग ने सभी का दिल जीता था। वहीं, फिल्म के गाने भी काफी पसंद किए गए, जिन्हें आज भी खूब सुने जाते हैं। इसी फिल्म का एक गाना 'एक चतुर नार' काफी फेमस हुआ था, जिसे आर डी बर्मन ने अपनी आवाज दी थी। लेकिन क्या आप जानते हैं ये इस गाने की असली धुन साल 1941 में बनी थी। इसे देश की पहली महिला संगीत निर्देशक ने बनाई थी। आइए जानते हैं कौन थी पहली महिला संगीत निर्देशक और 1941 में 'एक चतुर नार' गाने को पहली बार किसने गाया था।
कौन थीं देश की पहली महिला संगीत निर्देशक
देश की पहली महिला संगीत निर्देशक, सरस्वती देवी थीं। उनका असली नाम खुर्शीद मिनोचर-होमजी था। वो भारत की पहली प्रमुख और पेशेवर महिला संगीत निर्देशकों में से एक थीं। उन्होंने 1930 और 1940 के दशक में बॉम्बे टॉकीज के साथ काम करके हिंदी सिनेमा के शुरुआती संगीत को एक नई दिशा दी और कई यादगार गाने रचे। उनके गई गाने आज भी याद किए जाते हैं।
इस फिल्म का था वो गाना
सरस्वती देवी के यादगार गानों में साल 1941 में आई फिल्म 'झूला' का 'एक चतुर नार करके सिंगार' है। इस गाने की संगीत निर्देशक जहां सरस्वती देवी थीं। वहीं, इसके गीतकार प्रदीप थे। इसे अशोक कुमार ने गाया था। ये गाना उस दौर में बेहद अलग अंदाज में गाया गया था। 1941 में बॉम्बे टॉकीज के बैनर तले बनी क्लासिक फिल्म 'झूला' में लीला चिटनिस और अशोक कुमार ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। इस फिल्म का निर्देशन ज्ञान मुखर्जी ने किया था।
27 साल बाद आर डी बर्मन ने अपनी आवाज से किया अमर
साल 1968 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म 'पड़ोसन' में इस गाने को फिर से लिया गया। इस बार 'एक चतुर नार करके सिंगार' गाने को आर डी बर्मन नए अंदाज में पेश किया। ये गानों काफी हिट रहा। इस मूवी में सुनील दत्त, सायरा बानो, किशोर कुमार और महमूद लीड रोल में थे।
छिपानी पड़ी पहचान
बता दें कि साल 1935 में जब उन्होंने फिल्मों में संगीत देना शुरू किया, तब सम्मानित परिवारों की महिलाओं का फिल्मों में काम करना समाज को स्वीकार नहीं था। उनके समुदाय के कुछ लोगों ने इसका विरोध किया, यहां तक कि स्टूडियो के बाहर प्रदर्शन भी हुए। तब उनकी पहचान छिपाने और विवाद से बचने के लिए उनका नाम बदलकर 'सरस्वती देवी' रखा गया।


