जब रोल के लिए दांव पर लगा दी जान, 9 एक्टर्स जिन्होंने मेथड एक्टिंग में भुला दी असल जिंदगी

Feb 25, 2026 05:00 pm ISTKajal Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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फिल्मों में कई एक्टर्स जब रोल प्ले करते हैं तो लगता है जैसे वे उसे जी रहे हैं। ये उनकी एक्टिंग का एक मेथड होता है। यहां जानें मेथड एक्टिंग किसे कहते हैं, इसके टाइप्स और उदाहरण।

जब रोल के लिए दांव पर लगा दी जान, 9 एक्टर्स जिन्होंने मेथड एक्टिंग में भुला दी असल जिंदगी

सिनेमा और एक्टिंग में दिलचस्पी है तो आपने मेथड एक्टिंग के बारे में जरूर सुना होगा। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कुछ एक्टर ऐसे हैं जो एक्टिंग को उस लेवल तक ले जाते हैं कि उनकी खुद की पहचान फीकी पड़ जाती है। आपने अक्सर एक्टर्स के इंटरव्यूज में इस बारे में सुना होगा। जैसे दिलीप कुमार ने जब देवदास फिल्म में काम किया तो वह हकीकत में डिप्रेस हो गए थे। उन्हें डॉक्टर्स की मदद लेनी पड़ी थी। अगर आप अपना सिनेमा का ज्ञान बढ़ाना चाहते हैं तो यहां जान सकते हैं एक्टिंग के अलग-अलग मेथड्स और किरदारों में जान डालने वाले एक्टर्स के बारे में।

मेथड एक्टिंग क्या है?

साधारण शब्दों में कहें तो जब एक एक्टर केवल किरदार की नकल नहीं करता बल्कि उस कैरेक्टर की मानसिकता और भावनाओं को सच में जीने लगता है, इसे मेथड एक्टिंग कहते हैं। इसकी शुरुआत रशियन थिएटर डायरेक्टर कोंस्टेंटिन स्टेनिस्लावस्की ने की थी, जिसे बाद में ली स्ट्रेसबर्ग ने हॉलीवुड में मशहूर किया। इसका बेसिक फॉर्म्युला है- किरदार की तरह सोचो, उसकी तरह महसूस करो ताकि परफॉर्म करते समय एक्टिंग रियल लगे। यहां रणबीर कपूर और रणवीर सिंह के उदाहरण से अलग-अलग तरह की मेथड एक्टिंग समझते हैं।

1. रणबीर कपूर (इंटरनल मेथड एक्टिंग)

रणबीर कपूर को अक्सर नैचुरल एक्टर कहा जाता है, लेकिन वह इमोशनल मेमोरी वाली मेथड एक्टिंग का इस्तेमाल करते हैं। जैसे रॉकस्टार में जनार्दन या जॉर्डन के रोल में। इस फिल्म के लिए रणबीर ने सिर्फ गिटार बजाना ही नहीं सीखा बल्कि असल में कश्मीरी परिवारों के साथ वक्त बिताया ताकि उनके दुख और अकेलेपन को समझ सकें। शूट के दौरान वह अक्सर सेट पर लोगों से कटे रहते थे ताकि जॉर्डन का 'आइसोलेशन' उनके चेहरे पर असली दिखे।

संजू में रणबीर कपूर

दूसरा उदाहरण संजू का ले सकते हैं। यहां मेथड एक्टिंग केवल लुक तक सीमित नहीं थी। रणबीर ने संजय दत्त के चलने के तरीके और उनकी आवाज की गहराई को पकड़ने के लिए महीनों तक खुद को उनके पुराने फुटेज में डुबो दिया था। वह अभिनय नहीं कर रहे थे, उन्होंने खुद को यकीन दिला दिया था कि वही संजू हैं। पर्दे पर दर्शकों को यह फील भी हुआ।

रणबीर कपूर संजू

2.रणवीर सिंह की एक्टिंग का मेथड

रणवीर सिंह की अप्रोच थोड़ी अलग और ज्यादा शारीरिक होती है। वह एक्सटर्नल और इंटेंस मेथड एक्टर हैं। वह खुद को कैरेक्टर में ढालने के लिए पूरी ताकत लगा देते हैं। जैसे पद्मावत में खिलजी का रोल। खिलजी की क्रूरता को महसूस करने के लिए रणवीर सिंह 21 दिन तक अंधेरे कमरे में खुद को कैद किए रहे। उन्होंने बाहर सबसे कटऑफ कर लिया। खुद को घंटो आईने में निहारते, डार्क म्यूजिक सुनते। ये सब उनके व्यवहार में आ गया और वह चिड़चिड़े हो गए थे। रिपोर्ट्स बताती हैं कि रणवीर सिंह को इससे बाहर आने के लिए थेरपी करवानी पड़ी थी।

रणवीर सिंह की 83

83 कपिल देव की बायोपिक थी जिसमें रणवीर ने लीड रोल किया था। वह उनके तौर-तरीके सीखने के लिए कपिल देव के घर 10 दिनों तक रहे। उनके साथ खाना खाया और उनकी हर छोटी हरकत को ऑब्जर्व किया। यह मेथड एक्टिंग का ऑब्जर्वेशन वाला तरीका है।

मेथड एक्टिंग के 3 पिलर्स

सेंस मेमोरी: किसी इमोशनल सीन को करने के लिए अपनी लाइफ का कोई दुखभरा सीन याद करना। जैसे हजार चौरासी की मां फिल्म में जया बच्चन को अपने मरे बेटे की लाश पहचाननी थी। डायरेक्टर ने उनको इस सीन को रियल बनाने के लिए बोला था कि वह सोचें कि उनका असली बेटा यानी अभिषेक मर गया है।

इमर्शन: किरदार की तरह कपड़े पहनना, वैसा ही खाना खाना और उसी माहौल में रहना।

इम्प्रोवाइजेशन: जब आप किरदार को पूरी तरह समझ लेते हैं, तो आप स्क्रिप्ट से हटकर भी वैसी ही प्रतिक्रिया देते हैं जैसी वह किरदार देता।

अगर बॉलीवुड फिल्मों की बात करें तो मेथड एक्टिंग के नाम पर कुछ फिल्में और किरदार जरूर याद किए जाते हैं। यहां कुछ एक्टर्स हैं जिन्हें बॉलीवुड का बेहतरीन एक्टर माना जाता है।

3. दिलीप कुमार

दिलीप कुमार को भारत का पहला मेथड एक्टर कहा जाता है। महान फिल्म निर्माता सत्यजीत रे ने उन्हें द अल्टीमेट मेथड एक्टर का टाइटल दिया था। फिल्म देवदास के दुख में वह इतने डूब गए थे कि असल जिंदगी में डिप्रेशन का शिकार हो गए थे। डॉक्टरों ने उन्हें सलाह दी थी कि वह इस इमोशनल ट्रामा से बाहर निकलने के लिए कॉमेडी फिल्में करना शुरू करें।

4. आमिर खान

आमिर खान मिस्टर परफेक्शनिस्ट हैं। वह किरदार को रियलिस्टिक बनाने के लिए किसी भी हद तक जाते हैं। इस वजह से वह एक समय में एक ही मूवी करते हैं ताकि कैरेक्टर्स के इमोशंस मिल ना जाएं। वह रोल के लिए काफी मेहनत करते हैं, जैसे दंगल के लिए उन्होंने पहले अपना वजन 97 किलो तक बढ़ाया और फिर कुछ ही महीनों में उसे घटाकर पहलवान जैसी बॉडी बनाई। गुलाम के उस मशहूर ट्रेन वाले सीन के लिए उन्होंने खुद अपनी जान जोखिम में डाल दी थी ताकि डर असली लगे।

5. नसीरुद्दीन शाह

नसीर ने थिएटर की स्टेनिस्लावस्की तकनीक को हिंदी सिनेमा में उतारा। नसीरुद्दीन शाह किरदार के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक बैकग्राउंड पर महीनों रिसर्च करते हैं। जैसे स्पर्श मूवी में एक अंधे इंसान का किरदार निभा रहे थे। इसके लिए वह कई हफ्ते ब्लाइंड स्कूल में रहे और अपनी आंखों की पुतलियों को स्थिर रखने का अभ्यास किया ताकि वे कैमरे पर डेड लगें।

6. इरफान खान

इरफान खान की मेथड एक्टिंग दिखावे वाली नहीं बल्कि एक्सपीरियंस वाली थी। वह कैरेक्टर की साइलंस पर काम करते थे। जैसे पान सिंह तोमर के लिए उन्होंने चंबल के बागियों के लहजे और चाल-ढाल को इतना घोंटकर पी लिया कि आप पर्दे पर इरफान को नहीं सिर्फ एक एथलीट बागी को देखते हैं।

राजकुमार राव

7. राजकुमार राव

राजकुमार राव और विकी कौशल कौशल को आज के जमाने का डेडिकेटेड मेथड एक्टर माना जाता है। राजकुमार राव ने ट्रैप्ड की शूटिंग के लिए 20 दिन सिर्फ कॉफी और गाजर पर गुजारा किया था ताकि उनका शरीर सच में कमजोर लगे और आंखों में गड्ढे दिखाई दें।

8.विकी कौशल
विक्की कौशल मसान के कैरेक्टर के लिए कई हफ्ते तक बनारस के मणिकर्णिका घाट पर रहे। उन्होंने वहां जलती लाशों के बीच बैठकर चाय पीना और डोम समुदाय की लाइफस्टाइल को समझना शुरू किया ताकि दीपक का रोल बनावटी न लगे।

9 .रणदीप हुड्डा

रणदीप का मेथड एक्सट्रीम लेवल का है। वह हॉलीवुड के क्रिश्चियन बेल की तरह अपनी बॉडी के साथ खिलवाड़ करने से नहीं डरते। सरबजीत के लिए 28 दिन में 18 किलो वजन घटाना या स्वातंत्र्य वीर सावरकर के लिए सिर्फ खजूर और दूध पर रहकर खुद को हड्डियों का ढांचा बना लिया था।

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शॉर्ट बायो : काजल शर्मा पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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काजल ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे प्रमुख अखबारों से की, जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2014 में अमर उजाला डिजिटल के साथ उन्होंने न्यू मीडिया की दुनिया में कदम रखा। 2017 से 2020 तक नवभारत टाइम्स (NBT) में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल कवरेज के बाद वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ से जुड़ीं और वर्तमान में इन दोनों सेक्शंस की टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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