
फिल्म सर्टिफिकेट में छिपी होती है कौन-कौन सी जानकारी, कितना लंबा है सेंसर बोर्ड का प्रोसेस?
Film Certification Process: जब आप फिल्म देखते हैं तो आपने ध्यान दिया होगा कि शुरुआत में एक सर्टिफिकेट आता है। इस सर्टिफिकेट का प्रोसेस कितना लंबा होता है, ये हम आपको बता रहे हैं। साथ ही, हम बता रहे हैं कि फिल्म के सर्टिफिकेट में कौन-कौन सी जानकारी छिपी होती हैं।
जब किसी फिल्म की शुरुआत होती है तो आपने देखा होगा कि एक सर्टिफिकेट बनकर आता है। ये सर्टिफिकेट फिल्म्स को सेंसर बोर्ड यानी केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा दिया जाता है। इस सर्टिफिकेट से फिल्म के बारे में कई जानकारियां पता चलती हैं। आज हम आपको बता रहे हैं इस सर्टिफिकेट में कौन-कौन सी जानकारी छिपी होती हैं। साथ ही, हम आपको बता रहे हैं फिल्म सर्टिफिकेट मिलने का प्रोसेस कितना लंबा होता है।
सेंसर बोर्ड एक वैधानिक संस्था है, जो सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है। यह बोर्ड हमारे देश की फिल्मों को उसके कंटेंट के हिसाब से सर्टिफिकेट प्रदान करती है। अगर किसी फिल्म के पास सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट नहीं है, तो वो फिल्म किसी भी पब्लिक प्लेटफॉर्म पर रिलीज नहीं की जा सकती है।
फिल्म की रिलीज के बाद मेकर्स फिल्म सर्टिफिकेशन के लिए सेंसर बोर्ड में अप्लाई करते हैं। अप्लाई करने के बाद एक प्रोसेस होता है। उस प्रोसेस के बाद सेंसर बोर्ड उस फिल्म को देखता है, उसमें बदलाव कराता है और फिर उसे दोबारा देखता है और फिर फिल्म के कंटेंट के हिसाब से एक सर्टिफिकेट जारी करता है।
कितना लंबा है फिल्म सर्टिफिकेट का प्रोसेस
सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के नियम 41 के अनुसार प्रमाणन की सर्टिफिकेट प्रोसेस के लिए निर्धारित समय सीमा करीब 48 दिन है। आइए विस्तार में जानते हैं किस प्रोसेस में लगता है कितना टाइम-
⦁ फिल्म के लिए आवेदन करने के बाद उस आवेदन की जांच होती है। इस प्रक्रिया में 7 दिन लगते हैं।
⦁ जांच समिति का गठन करने में 15 दिन लगते हैं।
⦁ जांच समिति की रिपोर्ट को चेयरमैन तक आगे करने में तीन दिन लगते हैं।
⦁ आवेदक को आदेश (फिल्म में क्या बदलाव किए जाने चाहिए, क्या हटाना चाहिए आदि) की सूचना देने में 3 दिन लगते हैं।
⦁ इन बदलावों को ध्यान में रखते हुए आवेदक फिर अपना रिप्लाई समिट करते हैं जिसके लिए 5 दिन का समय तय किया गया है।
⦁ कट्स की जांच करने के लिए करीब 15 दिन लगते हैं।
⦁ इसके बाद फिल्म सर्टिफिकेट जारी करने में 5 दिन लगते हैं। इस तरह एक फिल्म को सर्टिफिकेट मिलने में करीब 48 दिनों का समय लगता है।

फिल्म सर्टिफिकेट ये तय करता है कि वो फिल्म किस आयु वर्ग के लिए बनी है। कौन से लोग उस फिल्म को देख सकते हैं। इस ग्रेड के अलावा भी फिल्म सर्टिफिकेट पर कई और जानकारी होती हैं।
फिल्म सर्टिफिकेट पर दी होती है ये जानकारी
⦁ फिल्म सर्टिफिकेट पर लिखा होता है कि ये कौन से प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने के लिए वैध है।
⦁ फिल्म को दिए गए सर्टिफिकेट का नंबर उसपर लिखा होता है।
⦁ फिल्म सर्टिफिकेट किस दिन दिया गया है उसकी दिनांक लिखी होती है।
⦁ फिल्म को कौन सी कैटिगरी में रखा गया है, वो ग्रेड उसपर लिखा होता है।
⦁ फिल्म का नाम लिखा होता है। साथ ही लिखा होता है कि फिल्म 2डी या थ्री डी।
⦁ फिल्म की लंबाई यानी की फिल्म का रनटाइम फिल्म सर्टिफिकेट पर मौजूद होता है।
⦁ फिल्म सर्टिफिकेट पर उन बोर्ड मेंबर्स का नाम लिखा होता है जिन्होंने वो फिल्म देखी होती है और फिल्म को सर्टिफिकेट दिया होता है।
⦁ फिल्म पर फिल्म सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करने वाला का नाम लिखा होता है।
⦁ फिल्म के प्रोड्यूसर का नाम सर्टिफिकेट पर मौजूद होता है। इसके अलावा सर्टिफिकेट पर सेंसर बोर्ड के रीजनल ऑफिसर के साइन होते हैं।

कितने टाइप के होते हैं ग्रेड्स और क्या हैं इनके मायने?
⦁ अगर 'अ' (U) लिखा हुआ होता है तो इसका मतलब है कि यह फिल्म बच्चे से लेकर बड़े तक कोई भी देख सकता है। 'अ' (U)सर्टिफिकेट ज्यादातर धार्मिक और पारिवारिक फिल्मों को दिया जाता है।
⦁ अगर 'अव' (UA) लिखा हो तो इसका मतलब होता है कि 12 साल से कम उम्र के बच्चे अपने माता-पिता के साथ ही यह फिल्म देख सकते हैं।
U/A कैटगरी की तीन सब कैटगरी इंट्रोड्यूज की गई हैं
1. U/A 7+ : माता-पिता की निगरानी में 7 साल से ज्यादा उम्र के बच्चे इस फिल्म को देख सकते हैं।
2. U/A 13+ : माता-पिता की निगरानी में 13 साल से ऊपर के बच्चे फिल्म को देख सकते हैं। उससे कम उम्र के बच्चे इस फिल्म को नहीं देख सकते हैं।
3. U/A 16+ : माता-पिता की निगरानी में 16 साल से ऊपर के बच्चे फिल्म को देख सकते हैं। उससे कम उम्र के बच्चे फिल्म नहीं देख सकते हैं।
⦁ अगर 'व' (A) लिखा है तो इसका मतलब ये है कि ऐसी फिल्म सिर्फ व्यस्कों यानी 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए है और इससे कम उम्र वालों को यह फिल्म नहीं देखनी चाहिए।
बता दें, ऐसी फिल्में जो किसी खास ऑडियंस को ध्यान में रखकर बनाई गई होती हैं, उनके सर्टिफिकेट पर 'एस' लिखा होता है. अमूमन ऐसी फिल्में साइंटिस्ट या फिर डॉक्टर आदि के लिए बनीं हुई होती है। वहीं, अगर सेंसर बोर्ड के करेंट चेयरमैन की बात करें तो इस वक्त सीबीएफसी के चेयरपर्सन प्रसून जोशी हैं।

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Harshita Pandeyलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




