खय्याम कैसे बन गए थे शर्माजी, मुस्लिम म्यूजिक डायरेक्टर ने बेटे का नाम रखा प्रदीप; जानें रोचक कहानी

Kajal Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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कभी-कभी मेरे दिल में और दिल चीज क्या है आप मेरी जैसे गानों को दिल छूने वाला म्यूजिक देने वाले खय्याम कभी शर्माजी के नाम से जाने जाते थे। इतना ही नहीं उनके बेटे का नाम भी खय्याम प्रदीप था, जानें दिलचस्प कहानी।

खय्याम कैसे बन गए थे शर्माजी, मुस्लिम म्यूजिक डायरेक्टर ने बेटे का नाम रखा प्रदीप; जानें रोचक कहानी

मोहम्मद जहूर खय्याम हाशमी को संगीत प्रेमी खय्याम के नाम से जानते हैं। वह ऐसे संगीतकार थे जिसने कम फिल्में कीं लेकिन जो किया वो अमर हो गया। शोर-शराबे के बीच उन्होंने उमराव जान के म्यूजिक में एक ठहराव दिया जो दिल को छूने वाला था। 1981 में आई यह फिल्म खय्याम के करियर का माइलस्टोन मानी जाती है। जब बॉलीवुड में डिस्को का दौर शुरू हो चुका था तब खय्याम ने दिल चीज क्या है और इन आंखों की मस्ती जैसे गानों को रूहानी धुन दी। खय्याम ने अपने करियर की शुरुआत शर्माजी के नाम से की थी। फिर उनका नाम प्रेम कुमार भी पड़ा। यहां जानते हैं इसके पीछे की इंट्रेस्टिंग कहानी।

फिल्मों में जाने के लिए घर से भागे

खय्याम 1927 में पंजाब में पैदा हुए थे। बचपन से ही उनका फिल्मों की तरफ था। वह हीरो बनना चाहते थे। यही ख्वाहिश लिए वह बिना मां-बाप को बताए अपने चाचा के पास दिल्ली आ गए। पहले तो उनकी डांट पड़ी। खय्याम की नानी भी वहां थीं। उन्होंने मामला सुलझाया। खय्याम यहां पढ़ने लगे लेकिन एक्टर बनने की इच्छा दिल के किसी कोने में सांस लेती रही। उनके चाचा को यह इच्छा पता थी। चाचा जाने-माने संगीतकार पंडित अमरनाथ को जानते थे। उन्होंने बताया कि भतीजा एक्टिंग करना चाहता है। अमरनाथ ने कहा कि फिल्मों में जाने के लिए संगीत आना चाहिए। फिर क्या था, खय्याम ने अमरनाथ से जुड़कर संगीत सीखना शुरू कर दिया। हुस्नलाल-भगतराम अमरनाथ के छोटे भाई थे। तीनों फिल्मों में संगीत देते थे। खय्याम वहीं से संगीत सीखा।

खय्याम

जी ए चिश्ती के साथ किया काम

अमरनाथ ने खय्याम से काम खोजने को कहा। उनकी मुलाकात लाहौर के फेमस म्यूजिक डायरेक्टर जी ए चिश्ती से हुई। खय्याम उनके साथ ही काम करने लगे। चिश्ती लाहौर चले गए फिर खय्याम मुंबई में ही रह गए। यहां फिर वह हुस्नलाल-भगतराम के पास पहुंचे और कई फिल्मों में उनके साथ काम किया।

ऐसे बनी जोड़ी

खय्याम के साथ अब्दुल रहमान भी जी ए चिश्ती के शिष्य थे। उस वक्त जोड़ियों का दौर था और लोग नाम बदलकर काम करते थे। खय्याम और रहमान साथ काम कर रहे थे तो उनके गुरु अमरनाथ ने खय्याम का नाम बदलकर शर्माजी कर दिया और रहमान वर्माजी हो गए।

रहमान से बिछड़कर फिर बने खय्याम

1947 में देश के बटवारे के बाद रहमान वर्मा पाकिस्तान चले गए। इसके बाद खय्याम अकेले हो गए। हीर रांझा जैसी फिल्मों के लिए उन्होंने शर्माजी नाम से अकेले काम भी किया लेकिन बाद में वह अपने असली नाम खय्याम से काम करने लगे। 1953 में आई फिल्म 1953 ने उन्हें खय्याम के रूप में पहचान दी। 1981 में आई उमराव जान के लिए खय्याम को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का अवॉर्ड मिला था।

बेटे का नाम प्रदीप

खय्याम सभी धर्मों को मानने वाले थे। उनकी वाइफ जगजीत कौर सिंगर थीं। खय्याम और जगजीत ने अपने बेटे का नाम प्रदीप रखा था। कुछ रिपोर्ट्स यह भी दावा करती हैं कि ऐ मेरे वतन के लोगों लिखने वाले गीतकार कवि प्रदीप से खय्याम बहुत प्रभावित थे। उन्हें के नाम पर उन्होंने अपने बेटे का नाम प्रदीप रखा था।

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लेखक के बारे में

Kajal Sharma

शॉर्ट बायो : काजल शर्मा पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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काजल शर्मा भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल टीम की लीड हैं। 2020 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने डिजिटल कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।


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काजल ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे प्रमुख अखबारों से की, जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2014 में अमर उजाला डिजिटल के साथ उन्होंने न्यू मीडिया की दुनिया में कदम रखा। 2017 से 2020 तक नवभारत टाइम्स (NBT) में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल कवरेज के बाद वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ से जुड़ीं और वर्तमान में इन दोनों सेक्शंस की टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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