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धर्मेंद्र भतीजों के नाम कर गए इतनी एकड़ जमीन, हीरो बनकर गांव पहुंचे तो रोकर मांगी थी माफी

धर्मेंद्र भतीजों के नाम कर गए इतनी एकड़ जमीन, हीरो बनकर गांव पहुंचे तो रोकर मांगी थी माफी

संक्षेप:

धर्मेंद्र जब एक्टर बनने के बाद अपने पुरखों के गांव पहुंचे तो खूब रोए और गांववालों से माफी मांगी थी। इसके बाद उन्होंने अपनी जमीन अपने चाचा के पोतों के नाम कर दी। उनके निधन की खबर पर डांगो गांव में शोक है।

Nov 27, 2025 04:42 pm ISTKajal Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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धर्मेंद्र का जन्म लुधियाना (पंजाब) के नसराली गांव में हुआ था। जन्म के बाद वह तीन साल तक अपनी मां और पिता के साथ पंजाब के डांगो गांव में रहे। धर्मेंद्र जब स्कूल जाने लायक हो गए तो उनके पिता उन्हें सोहनेवाल ले गए। उनके पिता केवल कृष्ण सिंह देओल सोहनेवाल सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूल में टीचर थे। धर्मेंद्र के पिता चाहते थे कि वह अपने पुरखों की जमीन को बचाकर रखें। वह एक्टर बन गए तो गांव नहीं जा सकते थे इसलिए उन्होंने अपने हिस्से की जमीन अपने भतीजों (चाचा के पोतों) नाम कर दी थी ताकि इसकी देख-रेख होती रहे। डांगों गांव के रहने वाले उन्हें आज भी बड़े दिलवाले शख्स के तौर पर याद करते हैं।

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माथे पर लगाई गांव की मिट्टी

धर्मेंद्र साहनेवाल में पले-बढ़े इसलिए इस गांव का नाम उनसे जुड़ गया। जबकि असल में वह डांगो के थे। धर्मेंद्र एक्टर बनने के बाद कई साल डांगो नहीं जा पाए। 2013 में जब पहली बार शूटिंग के सिलसिले में गांव पहुंचे तो फूट-फूटकर रोए थे। उस वक्त उनकी उम्र 78 साल थी। गांव जाकर वह अपने मिट्टी के घर में गए। जमीन से मिट्टी को उठाकर माथे पर लगाया और रोने लगे।

रोकर मांगी थी माफी

धर्मेंद्र ने अपने गांव के लोगों से इस बात की माफी भी मांगी थी। उन्होंने कहा था, मैं बहुत देर से आया हूं, मुझे माफ कर दो। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, धर्मेंद्र जब दूसरी बार 2015 में अपने गांव पहुंचे तो अपनी 19 कनाल 11 मरले (करीब 2.5 एकड़) की जमीन अपने भतीजों के नाम करवा दी थी। धर्मेंद्र के भतीजे बूटा सिंह लुधियाना की एक कपड़ा मिल में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि कोई किसी को आधा किला नहीं देता, धर्मेंद्र उन लोगों को अपना खून समझते थे और इतनी बड़ी जमीन दे गए।

वीडियो कॉल से लेते थे हालचाल

बूटा सिंह बताते हैं कि धर्मेंद्र बंबई में थे तो दादाजी हर महीने गांव से उनसे मिलने जाते थे। वह उनके लिए घर से खोया, बर्फी, गुड़ और साग जैसी चीजें ले जाते थे। धर्मेंद्र वीडियो कॉल से गांव का हालचाल लेते रहते थे। डांगो गांव के सरपंच हरदीप सिंह ने बताया कि धर्मेंद्र की चाची और भतीजे इस गांव में रहते हैं। उनके निधन से पूरे गांव में शोक है।

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Kajal Sharma

लेखक के बारे में

Kajal Sharma
काजल शर्मा लाइव हिन्दुस्तान वेबसाइट में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल टीम को लीड करती हैं। पत्रकारिता में 15 वर्षों का अनुभव रखने वाली काजल ने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में मजबूत पहचान बनाई है। फिल्म, टीवी, ओटीटी, फैशन और सेलिब्रिटी लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन में उनकी गहरी पकड़ है। सोशल मीडिया ट्रेंड्स और रीडर इंट्रेस्ट की उनकी समझ उन्हें लगातार ट्रेंडिंग और डिस्कवर-फ्रेंडली कंटेंट बनाने में मदद करती है। काजल साइंस ग्रेजुएट (B.Sc–Biology) और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। यही बैकग्राउंड उन्हें हेल्थ, फिटनेस, और प्रिवेंटिव केयर जैसे विषयों पर साइंस-आधारित, रिसर्च-ड्रिवेन और एक्सपर्ट-वेरिफाइड रिपोर्टिंग करने में सक्षम बनाता है। 2017 से वह बॉलीवुड-हॉलीवुड फिल्मों के साथ हेल्थ और मेडिकल एक्सप्लेनर स्टोरीज भी लिख रही हैं, जिनमें वह मेडिकल रिसर्च, डॉक्टर इनपुट और प्रमाणिक स्रोतों पर आधारित जानकारी पाठकों तक पहुंचाती हैं। और पढ़ें

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