मेरे देश के बच्चे आतंकवादी नहीं हैं, जंतर-मंतर के वीडियोज और फोटोज देख भड़के ये 12 सेलेब्स, तोड़ी चुप्पी
सेलेब्स ‘संसद चलो’ विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें देख परेशान हो गए हैं। वे अपनी चुप्पी तोड़ रहे हैं और कह रहे हैं कि हर बात का हल बातचीत से ही निकलता है इसलिए बातचीत जरूरी है।

सोमवार को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'संसद चलो' विरोध प्रदर्शन के बाद 12 कलाकारों ने छात्रों के समर्थन में अपनी आवाज उठाई है। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की तस्वीरें और वीडियोज देख सेलेब्स भड़क गए हैं। वे साफ-साफ शब्दों में बस एक ही बात कह रहे हैं, छात्रों पर लाठियां बरसाना गलत है।
1. सोनू सूद
लोगों की मदद के लिए हमेशा आगे रहने वाले अभिनेता सोनू सूद ने बहुत ही सीधे शब्दों में सरकार और प्रशासन को आईना दिखाया है। उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर लिखा, ‘हमारे छात्रों को लाठियां नहीं, गले लगाने वाले हाथ चाहिए।’
2. रोहित सराफ
रोहित सराफ ने इस घटना को दिल दहला देने वाला बताया। उन्होंने लिखा, ‘आज का दिन बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाला रहा है, लेकिन मैं एक बात जानता हूं... सिर्फ हमारा देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया हमारी आवाज सुन रही है। मैं ये विश्वास के साथ कह सकता हूं कि आज के दिन को उस हिंसा के लिए नहीं याद किया जाएगा जो घटित हुई, बल्कि उस असाधारण साहस के लिए याद किया जाएगा जो आज दिखाया गया है।’
3. सबा पटौदी
सबा पटौदी ने लिखा, ‘आने वाला कल युवाओं का है। ईश्वर करे उन्हें हमेशा सवाल पूछने की आजादी, अपनी बात रखने का साहस और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने की जगह मिलती रहे। जय हिंद।’
4. दीया मिर्जा
दीया मिर्जा ने लिखा, ‘एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की मांग करना जिस पर जनता भरोसा कर सके, कोई बगावत नहीं बल्कि एक उम्मीद है। आज जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, उन्हें देखना बेहद मुश्किल और दर्दनाक है। युवा, महिलाएं और बुजुर्ग नागरिक जो जवाबदेही मांगने के लिए इकट्ठा हुए, वे सम्मान के साथ सुने जाने के हकदार हैं। लोकतंत्र तब मजबूत नहीं होता जब विरोध को खामोश कर दिया जाता है, बल्कि तब मजबूत होता है जब उसे सुना जाता है। जिन्हें कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उन पर सार्वजनिक सुरक्षा और हर नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। ईश्वर करे हम मानवता को कभी न भूलें। न्याय, करुणा और संयम कमजोरी के लक्षण नहीं हैं; वे किसी समाज की ताकत के सच्चे पैमाने हैं।’
5. नंदिता दास
फिल्म निर्माता और अभिनेत्री नंदिता दास ने लिखा, ‘मैं उन सभी लोगों के साथ खड़ी हूं जो ये मानते हैं कि लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब लोग इकट्ठा हो सकते हैं, बोल सकते हैं, सुन सकते हैं और उनकी बात सुनी जा सकती है। रचनात्मक असहमति ही लोकतंत्र को जीवित रखती है। मैं दिल से उन सभी लोगों के साथ हूं जो उस भारत के लिए दिल्ली में शांतिपूर्वक मार्च कर रहे हैं।’
6. एल्विश यादव
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर एल्विश यादव ने लिखा, ‘मैं न तो बीजेपी का समर्थक हूं और न ही कांग्रेस का समर्थक हूं। लेकिन छात्रों के साथ जो हो रहा है वो पूरी तरह से गलत है। जो छात्र अपनी असली और जायज समस्याओं को लेकर आगे आए थे, उनके साथ हिंसा नहीं की जानी चाहिए थी। उनकी चिंताओं को सुना जाना चाहिए और उस पर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।’
7. रणवीर शौरी
अभिनेता रणवीर शौरी ने सीधे तौर पर राजनीतिक जवाबदेही पर सवाल उठाए। उनका मानना है कि शिक्षा मंत्री को बहुत पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था। ऐसा करने से सरकार अपनी जिम्मेदारी दिखा सकती थी और खुद को इस फजीहत से बचा सकती थी, लेकिन अब स्थिति और बिगड़ चुकी है।
8. भूमि पेडनेकर
अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने लिखा, ‘हिंसा कभी भी समाधान नहीं हो सकती। देश का ये कर्तव्य है कि वे अपने युवाओं के लिए ये सुनिश्चित करें कि ये आंदोलन हिंसक न हो और अपने उद्देश्य से न भटकें, क्योंकि लोकतंत्र बातचीत की बुनियाद पर बनते हैं। हालांकि, मैं विरोध प्रदर्शन में कही गई हर बात से सहमत नहीं हो सकती हूं, लेकिन मेरा विश्वास है कि बातचीत से ही सुधार की शुरुआत होती है। इस पूरे मामले का केंद्र बिंदु सिर्फ और सिर्फ हमारे छात्र ही रहने चाहिए। भले ही हाल के वर्षों में विश्वविद्यालयों और सीटों की संख्या में वृद्धि के साथ शिक्षा क्षेत्र में प्रगति हुई है, लेकिन जिन छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है, वे जवाब पाने के हकदार हैं।’
9. हुमा कुरैशी
हुमा कुरैशी ने भी दुख जताते हुए कहा, ‘प्रदर्शन की ये तस्वीरें मेरे जहन में बहुत लंबे समय तक रहेंगी। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों का सामना इस तरह के क्रूर बल प्रयोग और लाठियों से होते हुए देखना दुख है। इस स्थिति को अधिक धैर्य और बातचीत के साथ संभाला जा सकता था। जनता ने ही सरकार को चुना है और आज हम सभी को सवाल पूछने तथा जवाबदेही की उम्मीद करने की जरूरत है। भले ही नागरिक हर मुद्दे पर सहमत न हों, लेकिन बल प्रयोग करने से पहले हर नागरिक की बात सम्मान के साथ सुनी जानी चाहिए।’
10. जेनेलिया और रितेश देशमुख
जेनेलिया और रितेश ने भी इस पर कमेंट किया है। उन्होंने लिखा, ‘हम अपने देश के युवाओं के साथ एकजुटता से खड़े हैं। उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए। वे हमारे लोकतंत्र की धड़कन हैं और हमारे देश के भविष्य के सच्चे निर्माता हैं। आइए हम उनकी बात सुनें, उनका समर्थन करें और उन्हें सशक्त बनाएं। हमारे युवाओं की ऊर्जा, साहस और सपने उस भारत को आकार देंगे जिसका निर्माण करने की हम आकांक्षा रखते हैं। जय हिंद।’
11. मुनव्वर फारुकी
मुनव्वर ने वीडियो पोस्ट कर कहा, ‘भारत के कुछ बच्चों ने अपना हक मांगा। उन्होंने एग्जाम दी, वो कैंसल हो गई। उनका वक्त, उनका पैसा, उनके सपने, सबकुछ बर्बाद होने के बाद उसमें से 20 बच्चों ने अपनी जान दे दीञ ये हो रहा है, स्टूडेंट्स के साथ और इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं ले रहा। मैं तो कह रहा हूं कि मैं स्टूडेंट नहीं हूं, लेकिन मैं वो सारी चीजें देख रहा हूं, जो दिल्ली में हो रही हैं। मेरे देश के बच्चे आतंकवादी नहीं हैं। उनकाे मारने की जरूरत नहीं है,।उनको पीटने की जरूरत नहीं है। क्या है ये? और सरकार को निकालना चाहिए भाई ऐसे आदमियों को, जिसकी गलती की वजह से ऐसा हुआ है। हमारे प्रधानमंत्री जी को बोलना चाहिए, कह रहे हैं, बच्चों का नुकसान करा दिया तुमने, तू अपना काम सही से नहीं कर रहा, प्लीज हट जा भाई। ऐसे होना चाहिए ना? क्यों नहीं हो रहा है ये? बहुत गलत दिशा में जा रहे हैं भाई…सवाल करने वाली आंखें चुभ रही हैं और आवाज इनको वही पसंद आ रही हैं जो दब रही है। भाई नहीं, जितने भी लोग चुप बैठे हो ना अपने-अपने घरों में, मत करो।’
12. आयुष शर्मा
सलमान खान के जीजाजी और एक्टर आयुष शर्मा ने कहा, ‘लोकतंत्र की असली पहचान वोट नहीं, आवाज है। स्टूडेंट्स हों या देश का कोई भी नागरिक हो, जब वो अपनी आवाज उठाता है, तो उसे सुना जाना चाहिए। आज सरकार ने आखिरकार स्टूडेंट्स की आवाज सुनी। ये हर उस इंसान की जीत है जो दिन रात हिम्मत से जंतर-मंतर में खड़े हैं। पर दुख की बात ये भी है कि इन स्टूडेंट्स को आंसू गैस और लाठीचार्ज का सामना करना पड़ा। अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए उन्हें ऐसी कठिनाइयों से गुजरना पड़ा। एक लोकतंत्र की असली पहचान संवाद में है, बल में नहीं। दुआ करता हूं कि ये मूवमेंट एक नए इंडिया काे जन्म दे। एक ऐसा इंडिया को जहां पर हर एक आवाज सरकार तक पहुंच सके। जय हिंद।’


