1972 में हुए एक रेप केस के बाद बीआर चोपड़ा ने बनाई थी ये फिल्म, रिलीज का जमकर हुआ था विरोध

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

1980 Superhit Film: आज हम आपको साल 1980 में रिलीज हुई एक ऐसी फिल्म के बारे में बता रहे हैं जो उस वक्त के हिसाब से काफी बोल्ड फिल्मों में से एक थी। फिल्म को बीआर चोपड़ा ने डायरेक्ट किया था। इस फिल्म का आइडिया बीआर चोपड़ा को 1972 में हुए एक रेप केस और उसके बाद हुए कोर्ट ट्रायल के बाद आया था। 

1972 में हुए एक रेप केस के बाद बीआर चोपड़ा ने बनाई थी ये फिल्म, रिलीज का जमकर हुआ था विरोध

बॉलीवुड में लंबे वक्त से ऐसी फिल्में बनती आ रही हैं जिसमें रेप जैसे गंभीर मुद्दे पर बात की जाती है। फिल्म इंडस्ट्री में एक वक्त ऐसा था जब फिल्म को हिट करने के रेप के बाद हीरो को विलेन से बदला लेते दिखाया जाता था। पर बहुत ही कम ऐसी फिल्में बनी हैं जहां रेप के बाद एक महिला खुद अपने लिए आवाज उठाती है। हाल ही सालों में बनी पिंक तो आपको याद ही होगी। वो एक ऐसी फिल्म है जहां रेप जैसे मुद्दे को काफी गंभीरता से दिखाया गया। फिल्म से अमिताभ बच्चन का डायलॉग- नो मीन्स नो काफी पसंद किया गया। पर क्या आप जानते हैं पिंक से पहले साल 1980 में एक ऐसी फिल्म रिलीज हुई थी जहां एक महिला की 'न' के बारे में बात की गई थी। ये फिल्म अपने टाइम की सबसे बोल्ड फिल्मों में से एक मानी जाती है। फिल्म की रिलीज को लेकर बवाल भी मचा था और फिल्म को बैन करने की बात की जा रही थी।

क्या है फिल्म का नाम?

हम जिस फिल्म की बात कर रहे हैं, वो साल 1980 में रिलीज हुई फिल्म इंसाफ का तराजू है। फिल्म की स्टोरीलाइन रेप जैसे गंभीर मुद्दे के इर्द-गिर्द घूमती है। उस फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे कई बार रेप पीड़िता को ही सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है। कैसे रेप ट्रायल के वक्त महिलाओं को ही गलत साबित करने की कोशिश की जाती है। अगर ये फिल्म आपने नहीं देखी है तो आपको एक बार जरूर देखनी चाहिए।

इंसाफ का तराजू

बीआर चोपड़ा को कैसे आया फिल्म बनाने का आइडिया?

फिल्म को बीआर चोपड़ा ने डायरेक्ट किया था। बीआर चोपड़ा को सामाजिक मुद्दों पर फिल्म बनाने के लिए जाना जाता था। उन्होंने अपने करियर में कई ऐसी फिल्में बनाईं जिसमें सामाजिक मुद्दों को गंभीरता से दिखाया गया। इंसाफ का तराजू भी एक ऐसी ही फिल्म थी। हालांकि, फिल्म एक हॉलीवुड फिल्म का रीमेक थी, लेकिन बीआर चोपड़ा को ये रीमेक बनाने का आइडिया भारत के महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में हुए एक रेप केस और उसके बाद कोर्ट ट्रायल्स से आया था।

हिरासत में लड़की के साथ कॉन्स्टेबलों ने किया था रेप

1972 में एक रेप केस नेशनल हेडलाइन बना हुआ था। गढ़चिरौली जिले में दो पुलिस कॉन्स्टेबलों पर हिरासत में एक आदिवासी महिला का रेप करने का आरोप था। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पहले पुलिस इस मामले में केस तक दर्ज नहीं कर रही थी, लेकिन स्थानिय लोगों के विरोध के बाद केस दर्ज हुआ। जब ये मामला निचली अदालत में पहुंता तो कोर्ट ने आरोपियों को ये कहकर बरी कर दिया कि पीड़िता के शरीर पर कोई भी चोट के निशान नहीं मिले हैं। इतना ही नहीं, कोर्ट ने कहा था कि पीड़िता को 'सेक्स की आदत' थी। इसके बाद ये मामला हाई कोर्ट ले जाया गया। हाई कोर्ट में निचली अदालत के फैसले को पलट दिया गया। हाई कोर्ट के बाद ये मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट। सुप्रीम कोर्ट ने भी आरोपियों के हक में फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद देशभर में विरोध हुआ। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर आवाज उठने लगी।

क्या है इंसाफ का तराजू की स्टोरीलाइन?

इस पूरे केस के बाद ही बीआर चोपड़ा को इंसाफ का तराजू बनाने का आइडिया। फिल्म में जीनम अमान ने भारती नाम की एक महिला का रोल निभाया है। फिल्म में राज बब्बर ने रमेश आर गुप्ता नाम के बिजनेसमैन का किरदार निभाया है। रमेश आर गुप्ता की भारती पर बुरी नजर होती है। वो एक दिन भारती को अकेला पाकर उसका रेप करता है।

सिमी गरेवाल ने निभाया था पावरफुल रोल

समाज में बदनामी के डर को पीछे हटाकर भारती फैसला लेती है कि वो अपने केस को अदालत तक ले जाएगी। फिल्म में भारती की वकील का रोल सिमी गरेवाल ने निभाया है। फिल्म में एक सीन है जहां सिमी का किरदार भारती को बताता है कि रेप केस को अदालत तक ले जाने से महिलाओं की कितनी बदनामी होती है। इसी सीन में वकील भारती को ये भी समझाती हैं कि उनका ये केस अदालत तक ले जाना कितना जरूरी है। यहीं पर सिमी गरेवाल के किरदार का वो डायलॉग आता है जहां वो कहती हैं कि 'किसी न किसी दिन किसी औरत को समाज के सामने खड़े होकर ये कहना पड़ेगा कि एक औरत को न कहना का हक है। और किसी भी पुरुष को ये अधिकार नहीं है कि वो बिना औरत की मर्जी को उसे छू भी सके'।

क्या है फिल्म का क्लाइमेक्स?

फिल्म में भारती को अदालत से इंसाफ नहीं मिलता है।अदालत में भारती के चरित्र पर ही कीचड़ उछाला जाता है। इसके बाद भारती अपनी बहन (पद्मिनी कोहलापुरी) के साथ पुणे शिफ्ट हो जाती हैं। पुणे में भारती की बहन के साथ भी रमेश वही करता है जो उसने भारती के साथ किया था। भारती अब इंसाफ के लिए अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाती, बल्कि खुद रमेश का खून कर देती हैं। इसके बाद भारती पर कत्ल का मुकदमा चलता है। भारती के खिलाफ खून करने का केस ही फिल्म का क्लाइमेक्स है, जहां भारती जज के सामने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक दमदार मोनोलॉग बोलती हैं।

फिल्म को बैन करने की हो रही थी मांग

इस फिल्म को काफी बोल्ड माना गया था। फिल्म में रेप सीन्स को बहुत ज्यादा ग्राफिक डिटेल्स के साथ दिखाया गया था, जो आलोचकों को पसंद नहीं आया था। महिलाओं के हक के लिए आवाज उठाने वाले कई ग्रुप इस फिल्म को रिलीज नहीं होने देना चाहते थे। फिल्म की रिलीज पर जब बैन की बात होने लगी तो बीआर चोपड़ा ने उस वक्त की एक सम्मानित जज से मदद मांगी। बीआर चोपड़ा ने जस्टिस पीएन भागवती के लिए फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग का आयोजन किया। उस स्पेशल स्क्रीनिंग के बाद जज ने फिल्म को रेप जैसे अपराध के खिलाफ एक बोल्ड स्टेटमेंट बताया। उन्होंने फिल्म के हक में एक लेटर भी लिखा। इसके बाद फिल्म को रिलीज किया जा सका।

उस साल की बड़ी हिट साबित हुई थी फिल्म

इंसाफ का तराजू की भले ही आलोचना हुई हो, फिल्म को बैन करने की मांग उठी हो, लेकिन ये फिल्म उस साल की बड़ी हिट साबित हुई। फिल्म ने अच्छी कमाई की। इस फिल्म को लोग बड़ी संख्या में देखने पहुंचे।

राज बब्बर से नाराज थे उनके माता-पिता

फिल्म में राज बब्बर की एक्टिंग की प्रशंसा हुई, लेकिन उनके निजी जीवन पर इसका असर देखने को मिला। राज बब्बर के सीन्स इतने परेशान करने वाले थे कि एक्टर ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि कैसे फिल्म देखने के बाद उनके माता-पिता ही उनसे नाराज हो गए थे। राज बब्बर भी वो सीन्स करने में सहज नहीं थे। उन्होंने बीआर चोपड़ा से कहा था कि फिल्म में रेप सीन्स में इतनी निर्दयता से न दिखाया जाए। पर जीनत अमान ने कहा कि फिल्म में रेप सीन्स को उसी इंटेंसिटी से दिखाना चाहिए।

कहां देख सकतें हैं इंसाफ का तराजू?

अगर आप ये फिल्म देखना चाहते हैं तो इसे जियो हॉटस्टार पर देख सकते हैं। फिल्म में एक्टर धर्मेंद्र का एक कैमियो भी है। फिल्म की शुरुआत धर्मेंद्र के अदालत के कटघरे में खड़े होने से ही होती है। इस फिल्म को आपको जरूर देखना चाहिए।

Harshita Pandey

लेखक के बारे में

Harshita Pandey

हर्षिता पांडे पिछले सात साल से अधिक से डिजिटल मीडिया में काम कर रही हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम कर रही हैं।


विस्तृत बायो

मनोरंजन जगत की खबरों में दिलचस्पी रखने वाली हर्षिता पांडे को डिजिटल मीडिया में 7 साल से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में एंटरटेनमेंट सेक्शन में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर काम कर रही हैं। अप्रैल 2024 से हर्षिता पांडे लाइव हिंदुस्तान के साथ जुड़ी हैं। यहां वह सेलेब्स इंटरव्यू लेती हैं, फिल्मों, टीवी शोज और ओटीटी सीरीज पर खबरें बनाने के साथ साथ उनकी समीक्षा और बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट्स पर काम करती हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि और करियर की शुरुआत

2017 में मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में बैचलर्स की डिग्री पाने के बाद उन्होंने रेडियो एंड टीवी जर्नलिज्म में डिप्लोमा हासिल किया और फिर आजतक से अपने करियर की शुरूआत की, जहां उन्होंने 5 साल से अधिक काम किया।


एंटरटेनमेंट और विजन

फिल्म, ओटीटी और टीवी शोज में हर्षिता की अच्छी पकड़ है। उनका लक्ष्य पाठकों तक सटीक, प्रमाणिक और सशक्त जानकारी देना है।


विशेषज्ञता
बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट
ओटीटी सीरीज (बॉलीवुड और हॉलीवुड) का रिव्यू
सेलिब्रिटी एक्सक्लूसिव इंटरव्यू
बॉलीवुड फिल्मों के रिव्यूज
साउथ की फिल्में और टीवी रियलिटी शोज से जुड़े अपडेट्स
फिल्मी पर्दे पर दिखाई जा रही कहानियों के पीछे के किस्से पाठकों तक पहुंचाना

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।