राजेश खन्ना के निधन के 14 साल बाद हाईकोर्ट ने उनके 'आशीर्वाद' को 'भूतिया' कहने पर क्यों लगाई रोक?
राजेश खन्ना का जुलाई 2012 में निधन हुआ था। उनके जाने के ठीक 14 साल बाद हाईकोर्ट ने उनके ‘आशीर्वाद’ को भूतिया कहने पर रोक लगाई है।

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज और दिवंगत सुपरस्टार राजेश खन्ना के मशहूर बंगले 'आशीर्वाद' को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इस संपत्ति को शापित, भूतिया या अशुभ बताने से रोक दिया है। कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया कि इस तरह के दावे पहली नजर में मानहानिकारक हैं और यह मकान मालिक के गरिमापूर्ण जीवन जीने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करते हैं।
किसके पास है राजेश खन्ना का 'आशीर्वाद'?
दरअसल, अब ये घर बिजनेस मैन शशि शेट्टी के पास है। राजेश खन्ना के निधन के बाद उन्होंने ने ही अक्षय कुमार से ये संपत्ति (लगभग 90 करोड़ में) खरीदी थी। फिर उन्होंने इस बंगले को गिरा दिया था और अपनी फैमिली के लिए चार मंजिला का नया घर बनवाया था। हालांकि, उन्होंने इसका नाम 'आशीर्वाद' ही रखा।
कोर्ट ने राजेश खन्ना के निधन के इतने साल बात क्यों दिया ये फैसला?
हाल ही में India.com सहित इंटरनेट और सोशल मीडिया पर कई ऐसे आर्टिकल्स और वीडियो सामने आए, जिनमें इस घर को भारत के 'सबसे भूतिया मकानों' की लिस्ट में शामिल किया गया था। अपने घर को लेकर फैलाई जा रही इन भ्रामक खबरों से परेशान होकर वर्तमान मालिक शशि शेट्टी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि शशि शेट्टी की आपत्ति बिल्कुल जायज है। केवल सनसनी फैलाने के लिए किसी के घर को बिना किसी आधार के भूतिया या शापित बताना गलत है। चूंकि आरोपी पक्ष (मीडिया प्लेटफॉर्म्स) में से कोई भी कोर्ट में अपनी बात का बचाव करने नहीं आया इसलिए कोर्ट ने 21 अगस्त 2026 को होने वाली अगली सुनवाई तक इस तरह की खबरों पर रोक लगा रही है।
'आशीर्वाद' बंगले का इतिहास
राजेंद्र कुमार से शुरुआत: 1950 के दशक में अभिनेता राजेंद्र कुमार ने इसे लगभग 65,000 रुपये में खरीदा था। इस घर में रहने के दौरान उन्होंने लगातार कई हिट फिल्में दीं और उन्हें 'जुबली कुमार' कहा जाने लगा।
राजेश खन्ना का दौर: बाद में राजेश खन्ना ने इसे 3.5 लाख में खरीद लिया। इसी बंगले में रहते हुए राजेश खन्ना हिंदी सिनेमा के पहले 'सुपरस्टार' बने और उनका दौर भारतीय सिनेमा के इतिहास का सबसे बड़ा दौर माना गया।
राजेश खन्ना की ख्वाहिश: साल 2012 में राजेश खन्ना के निधन के बाद उनके परिवार ने इसे शशि शेट्टी को बेच दिया। राजेश खन्ना की इच्छा इसे म्यूजियम बनाने की थी, लेकिन बिक्री के बाद नए मालिक ने साल 2016 में इसे तोड़कर नया घर बना लिया।


