70 के दशक की वो चाइल्ड सिंगर जिसने नाम बदलकर करिश्मा, माधुरी के करियर के लिए दिए सबसे हिट गाने, पहचानिए-
एक चाइल्ड सिंगर ऐसी भी हुई जिसने हिंदी सिनेमा के सबसे पॉपुलर गानों को अपनी आवाज दी। जब वापसी की तो नाम बदलकर करिश्मा, माधुरी दीक्षित के करियर के सबसे हिट गाने गाए। पहचानिए इस सिंगर को।

60 और 70 के दशक में जब भी बच्चों के लिए कोई गाना होता था तो लीड सिंगर ही अपनी आवाज को थोड़ा बदलकर गाना गा देते थे। लेकिन 70 के दशक के शुरुआती सालों बाद इंडस्ट्री में चाइल्ड सिंगर को भी जगह मिलने लगी। उस दौरान एक ऐसी चाइल्ड सिंगर ने कदम रखा जो बाद में जाकर करिश्मा, श्रीदेवी, माधुरी दीक्षित की आवाज बनी। हैरानी वाली बात तो ये है कि इस मशहूर सिंगर ने इंडस्ट्री में दो नामों का इस्तेमाल किया और इन दोनों नामों से मशहूर हुई। इस मशहूर सिंगर का नाम है सुषमा श्रेष्ठ जिन्हें आप पूर्णिमा के नाम से जानते होंगे।
मोहम्मद रफी के साथ गया गाना
नेपाल की रहने वाली सुषमा श्रेष्ठा के पिता के एक दोस्त हुआ करते थे जो म्यूजिक डायरेक्टर की जोड़ी शंकर-जयकिशन के असिस्टेंट हुआ करते थे। उसी दोस्त ने सुषमा के नाम का सुझाव म्यूजिक डायरेक्टर को दिया था। सुषमा की आवाज मेकर्स को पसंद आया और सिर्फ 11 साल की उम्र में उन्हें मोहम्मद रफी और सुमन कल्यानपुरी के साथ गाना गाने का मौका मिला। वो गाना था 'है न बोलो बोलो' फिल्म अंदाज के लिए। ये फिल्म 1969 में रिलीज हुई थी। इसके बाद चाइल्ड सिंगर वाले सॉन्ग जैसे 'तेरा मुझसे है पहले का नाता कोई', 'एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल', 'तेरी है जमीन तेरा आसमान', क्या हुआ तेरा वादा' जैसे यादगार गाने गाए। सुषमा नाम बदलने से पहले सिंगर ने अपना आखिरी गाना फिल्म अंकुश के लिए गाया था जो आप स्कूल की प्रार्थना है। वो है 'इतनी शक्ति हमें देना दाता'।
इसलिए बदला नाम
80 के दशक में सुषमा ने शादी कर ली और इसके बाद उनके सिंगिंग करियर में बड़ा ब्रेक आ गया। फिर सुषमा ने 90 के दशक में अपनी वापसी की। म्यूजिक कंपनी ने उन्हें नाम बदलने का सुझाव दिया। सिंगर सुषमा श्रेष्ठा अब पूर्णिमा बन गई। उन्होंने वापसी करते ही जूही चावला के लिए 'तू तू तू तू तू तारा' गाया और माधुरी दीक्षित के लिए ‘चने के खेत में’ गाया।
करिश्मा की बनीं आवाज
इसके बाद करिश्मा कपूर के करियर की सबसे हिट आवाज बनीं। उन्होंने करिश्मा के लिए 'उई अम्मा उई अम्मा क्या करता है’,'हाय हुक हाय हुक हाय हाय', 'उंची है बिल्डिंग', 'सोना कितना सोना है' 'मैं पैदल से जा रहा था', 'मैं हूं बीवी नंबर 1'। ये पूर्णिमा ही थीं जो आखिरी के 60 के दशक से 90 की कई हीरोइनों की आवाज बनीं। आज भी उनके आवाज की खनक में ये गाने सुने जाते हैं।


