अंग्रेजों के खत सेंसर करता था ये हीरो, मिलते थे 165 रुपये, फिर ऐसे बना भारत का दिग्गज एक्टर
Bollywood Kissa: हिंदी सिनेमा का दिग्गज एक्टर बनने से पहले ये कलाकार 165 रुपये की नौकरी करता था। वह ब्रिटिश आर्मी में खतों को सेंसर करता था।

वहआज हम आपको हिंदी सिनेमा के उस हीरो की कहानी बताने वाले हैं जिन्होंने फिल्मों में आने से पहले अंग्रेजों के लिए काम किया था और वो भी सिर्फ 165 रुपये में। इनकी मस्तानी चाल, खुली कॉलर की कमीज और टेढ़ी टोपी ने पूरे हिंदुस्तान को अपना दीवाना बना दिया था। जी हां, हम बात कर रहे हैं देव आनंद की।
कहां मिली नौकरी?
बात उन दिनों की है जब देव आनंद हीरो नहीं बने थे। वह काम की तलाश में भटक रहे थे। प्रोडक्शन हाउस के चक्कर काट रहे थे और अपना पेट पालने के लिए छोटी-मोटी नौकरी कर रहे थे। इसी बीच उन्हें ब्रिटिश आर्मी के सेंसर ऑफिस में नौकरी मिल गई।लेकिन यहां उनका काम बड़ा अजीब था।
क्या होता था देव आनंद का काम?
उन्हें ब्रिटिश सेना के अधिकारियों और जवानों के लिखे खतों को पोस्ट होने से पहले पढ़ना होता था, ताकि कोई गोपनीय सैन्य जानकारी बाहर न चली जाए। इस काम के लिए उन्हें 165 रुपये मिलते थे।
एक खत ने बदली जिंदगी
देव आनंद की जिंदगी बड़े आराम से कट रही थी, लेकिन उनके भीतर का कलाकार उनसे रोज खुद सवाल पूछता था। वह नौकरी छोड़ना चाहते थे, पर आगे का रास्ता नहीं दिख रहा था। तभी एक दिन, उनके हाथ एक ब्रिटिश ऑफिसर का लिखा खत लगा। उस अफसर ने अपनी प्रेमिका/पत्नी के लिए लिखा था, ‘काश! मैं अभी ये नौकरी छोड़ सकता... तो सीधे तुम्हारे पास आता और तुम्हारी बाहों में होता।’
इसने दी देव आनंद को हिम्मत
इस ‘काश’ ने देव आनंद को हिम्मत दी। उन्हें अपनी जिंदगी में ये नहीं सोचना था कि ‘काश’ मैं ये नौकरी छोड़कर एक्टर बनने कोशिश करता। इसलिए उन्होंने तुरंत पेन उठाया, इस्तीफा लिखा और उस 165 रुपये की नौकरी को हमेशा के लिए लात मार दी।
ऐसे मिला रास्ता
नौकरी छोड़ने के बाद वह एक लोकल ट्रेन में सफर कर रहे थे, तभी पास बैठे एक अजनबी मुसाफिर से उनकी बात होने लगी। उस मुसाफिर ने बातों-बातों में बताया कि 'प्रभात फिल्म कंपनी' अपनी नई फिल्म के लिए एक नए और खूबसूरत लड़के की तलाश कर रही है।
मिली पहली कम्पनी
अगले ही दिन वो सीधे फिल्म कंपनी के दफ्तर जा पहुंचे। वहां उनकी मुलाकात कंपनी के मालिक बाबूराव पाई से हुई। देव आनंद की बेबाकी, उनका सलीका और उनके चेहरे का तेज देखकर बाबूराव इतने इम्प्रेस हुए कि उन्होंने तुरंत कहा, ‘कल आकर डायरेक्टर पी.एल. संतोषी से मिलो।’
पहला कॉन्ट्रैक्ट
अगले दिन जब देव साहब पी.एल. संतोषी के सामने खड़े हुए, तो संतोषी जी उनकी शानदार शख्सियत के कायल हो गए। उन्होंने बिना वक्त गंवाए देव आनंद को 3 साल के कॉन्ट्रैक्ट पर साइन कर लिया।
फिर क्या हुआ?
इसी बैनर के तले देव आनंद की पहली फिल्म ‘हम एक हैं’ बनी। ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई, लेकिन देव आनंद की किस्मत चमक गई।
लेखक के बारे में
Vartika Tolaniवर्तिका तोलानी डिजिटल मीडिया की एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें एंटरटेनमेंट और न्यूज रिपोर्टिंग में 6 साल से ज्यादा समय का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (HT Media Group) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर (Digital) के तौर पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। वर्तिका न केवल बॉलीवुड और ओटीटी की दुनिया पर पैनी नजर रखती हैं, बल्कि डेटा और रिसर्च के साथ अपनी बात कहती हैं।
करियर का सफर
वर्तिका के प्रोफेशनल सफर की शुरुआत दैनिक भास्कर (इंदौर) से हुई, जहां उन्होंने सिटी रिपोर्टर के रूप में शहर की हलचलों और सेलिब्रिटी इंटरव्यूज से अपनी पहचान बनाई । इसके बाद उन्होंने दैनिक भास्कर (भोपाल) में सब-एडिटर रहते हुए CBSE और UGC जैसी बड़ी संस्थाओं के प्रमुखों का इंटरव्यू किया ।
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पढ़ाई-लिखाई (Education)
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