ब्राह्मण लड़का कैसे बना इंडियन स्पाई नबी अहमद? रविंद्र कौशिक के परिवार ने बताया, वह क्यों अलग थे

Kajal Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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धुरंधर फिल्म में हमजा जैसा दिखाया गया है, असली जासूस वैसे नहीं होते, यह कहना है भारत के स्पाई ब्लैक टाइगर रविंद्र कौशिक की फैमिली का। उनकी बहन और भांजे ने बताया कि वह बाकी जासूसों से कैसे अलग थे।

ब्राह्मण लड़का कैसे बना इंडियन स्पाई नबी अहमद? रविंद्र कौशिक के परिवार ने बताया, वह क्यों अलग थे

धुरंधर 2 रिलीज के बाद रविंद्र कौशिक एक बार फिर से सुर्खियों में आए। फिल्म में रणवीर सिंह एक इंडियन एजेंट बने हैं। वह पाकिस्तान हमजा नाम से पहुंचते हैं। वहां शादी करते हैं और उनका बच्चा भी होता है। यह कहानी थोड़ी बहुत इंडिया के ब्लैक टाइगर रविंद्र कौशिक से मिलती है। हालांकि उनकी बहन का कहना है कि असल जिंदगी में जो हुआ धुरंधर में उसका कुछ भी नहीं दिखा है। एक पॉडकास्ट में रविंद्र कौशिक की बहन और उनकी जिंदगी पर 13-14 साल तक रिसर्च करने वाले उनके भांजे ने काफी कुछ बताया।

बाकी जासूसें से कैसे अलग थे रविंद्र

रविंद्र कौशिक की बहादुरी और उनके साथ हुई प्रताड़ना की कहानियों से इंटरनेट भरा पड़ा है। हालांकि काफी कुछ ऐसा बाकी है जो लोगों के सामने आना बाकी है। रविंद्र कौशिक भारत के एजेंट थे, जो ब्राह्मण परिवार से थे। उन्हें ट्रेनिंग देकर पाकिस्तान भेजा गया। वहां से उन्होंने कई बड़े मिशन पूरे किए लेकिन भेद खुल जाने पर पाकिस्तान के जेल पहुंच गए। वहां उन्हें प्रताड़ना सहनी पड़ी और दर्दनाक मौत हो गई। शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट में रविंद्र कौशिक की बहन और भांजे थे। उनसे पूछा गया कि रविंद्र कौशिक बाकी जासूसों से अलग कैसे थे। इस पर रविंद्र के भांजे ने जवाब दिया, ‘अलग इसलिए थे कि वह हिंदुस्तान के पहले रेजिडेंट एजेंट थे। यह पहला एक्सपेरिमेंट था। रेजिडेंट एजेंट मतलब डोमिसाइड होता है जो वहां जाकर रहता है। घर बसाता है। अपना एक सोशल नेटवर्क बनाता है। हिंदुस्तान ने यह पहला एक एक प्रयोग किया था उनके ऊपर।’

रविंद्र कौशिक

जासूसों जैसे नहीं, हैंडसम थे रविंद्र

कौशिक के भांजे ने आगे बताया, ‘जासूसों की जो शक्ल है आप देखेंगे तो वे बहुत मामूली शक्ल-सूरत के होते हैं। मैंने बताया जैसे भीड़ में अगर वे खो जाएं तो आप उनको ढूंढ नहीं सकते। उनके लिए आसान है काम करना। इसलिए उनको अंडर कवर कहते हैं। वे अंडर लेयर काम करते हैं। इनकी शक्ल सूरत ऐसी नहीं थी। यह दिखने में काफी हैंडसम थे। तो यह जासूसी के लिए वैसे यह फिट नहीं थे। उस वक्त तो कोई रॉ के फील्ड ऑफिसर थे गुरु बच्चन सिंह के नाम से मिलिट्री इंटेलिजेंस से आए थे रॉ में। उन्होंने सबसे पहले इनसे कॉन्टैक्ट किया था। इनके अपने शहर गंगानगर में।’

रविंद्र कौशिक

चेक करने आते थे अफसर

रविंद्र की बहन ने बताया कि उनकी मां को उन अफसर की शक्ल याद है। वह घर आते-जाते थे। मालूम नहीं था ना कि ये इतने बड़े अफसर हैं। वह अफसर अक्सर चेक करने आते थे कि रविंद्र ने कहीं परिवार को बता तो नहीं दिया कि वह जासूसी का काम कर रहे हैं। रविंद्र की ट्रेनिंग के वक्त ऐसा होता था। रविंद्र के भांजे ने बताया कि धुरंधर में जो दिखाया वो सही नहीं है। जासूस ऐसे कभी खुले आम किसी से फाइट नहीं करते हैं। जासूस कभी निगाह में नहीं आना चाहता। झगड़ा होगा तो नजर में आ जाएंगे।

नहीं की रॉ ने मदद

परिवार ने बताया कि जब उन्हें पिक किया था तो किसी को आइडिया नहीं था कि उन्हें कब जासूसी में लिया गया या ट्रेनिंग के भेजा गया। बाद में उनके लेटर्स से पता चला कि वह पाकिस्तान में फंस गए हैं। रविंद्र की बहन से पूछा गया कि क्या रॉ ने इनडायरेक्टली कभी मदद की? इस पर उन्होंने जवाब दिया, ‘ना कोई मिलने आया सांत्वना के तौर पर ना ही मदद की। शहादत का 2001 में जब पता लग गया था। सबसे पहले उनकी शहादत का समाचार पाकिस्तान ह्यूमन राइट्स में एक ब्रिगेडियर हामिद थे, उनका एक ईमेल आया था।’

रविंद्र कौशिक

पाकिस्तान से मिली थी मौत की खबर

बताया, ‘उस ईमेल में लिखा गया था कि रविंद्र कौशिक एलियास नबी अहमद शाकिर अब इस दुनिया में नहीं रहे। वो पहला खत था जिससे पता लगा परिवार को कि वह चले गए हैं। उनकी डेथ के तीन या चार दिन बाद 24 नवंबर के आसपास यह शाम को यह ईमेल आता है कि नबी अहमद शाकिर उर्फ रविंद्र कौशिक को हम लोग बचा नहीं सके। वो मामला पाकिस्तान ह्यूमन राइट्स वालों ने ले लिया था क्योंकि इस केस को लास्ट में क्योंकि उनकी हालत बहुत ज्यादा खराब थी। उनकी मेडिकल रिपोर्ट बहुत ज्यादा बहुत बुरी थी। हमने वह मेडिकल रिपोर्ट यहां पर मिनिस्ट्री में भी दी थी।’

मरते दम तक की एक्टिंग

रविंद्र के परिवार ने बताया कि उन्हें पता नहीं था कि क्या करना है। वह अच्छे एक्टर थे। नाटक करते थे, देशभक्त भी थे। इनसे कहा गया कि एक्टिंग से देश की सेवा करनी है। रविंद्र वही करते रहे। उन्होंने परिवार को कभी नहीं बताया कि क्या करते हैं। वह बस ये बताते रहे कि अच्छी नौकरी करते हैं। वह एक दूसरे एजेंट की गलती से पकड़े गए और पाकिस्तान में कैद की सजा हुई। वहां उन्हें बहुत टॉर्चर किया गया और बीमारी से मौत हो गई।

डिसक्लेमर: यह इनपुट शुभंकर मिश्रा पॉडकास्ट से लिया गया है।

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लेखक के बारे में

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शॉर्ट बायो : काजल शर्मा पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव
काजल शर्मा भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल टीम की लीड हैं। 2020 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने डिजिटल कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।


करियर का सफर (प्रिंट से डिजिटल)
काजल ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे प्रमुख अखबारों से की, जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2014 में अमर उजाला डिजिटल के साथ उन्होंने न्यू मीडिया की दुनिया में कदम रखा। 2017 से 2020 तक नवभारत टाइम्स (NBT) में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल कवरेज के बाद वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ से जुड़ीं और वर्तमान में इन दोनों सेक्शंस की टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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