सोशल मीडिया पर छाया है हरियाणवी गाना 'बैरण', गुनगुनाने से पहले जानें इस शब्द का मतलब

Mar 24, 2026 04:47 pm ISTHarshita Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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सोशल मीडिया पर 'बैरण' गाना तेजी से वायरल हो रहा है। इस गाने को हरियाणा के सुमित और अनुज ने लिखा और गाया है। सुमित और अनुज दोनों भाई हैं। आइए जानते हैं इस वायरल गाने के टाइटल का मतलब और क्या है इसकी कहानी। 

सोशल मीडिया पर छाया है हरियाणवी गाना 'बैरण', गुनगुनाने से पहले जानें इस शब्द का मतलब

"हो, मन्ने सांभ-सांभ राखे तेरे झांझरा के जोड़े। मेरी गेल रो-रो ये भी छोरी बावले से होरे।" सोशल मीडिया पर ये गाना तो अबतक आपने भी सुन लिया होगा। इस गाने का टाइटल 'बैरण' है। इंस्टाग्राम से लेकर यूट्यूब तक ये गाना हर जगह ट्रेंड हो रहा है। लोग रील्स में, वीडियोज में ये गाना इस्तेमाल कर रहे हैं। ये गाना कम वक्त में बहुत तेजी से वायरल हुआ है। अगर आप सोच रहे हैं कि ये किसी बड़े म्यूजिक लेबल का गाना है तो आपको बता दें, ऐसा नहीं है। ये गाना हरियाणा के दो भाइयों ने लिखा है। आइए जानते हैं इस गाने को बनाने वाले सुमित और अनुज ने अपने गाने के वायरल होने पर क्या कहा और क्या है इस गाने में बैरण का मतलब और इसकी कहानी।

क्या है 'बैरण' शब्द का मतलब?

'बैरण'साल 2026 का सबसे ज्यादा ट्रेंडिंग गाना है। सुमित और अनुज से जब 'बैरण' शब्द के मायने पूछे गए तो उन्होंने कहा कि 'बैरण' को उन्होंने हिंदी शब्द बैरी(दुश्मन) से लिया है। उन्होंने कहा, हिंदी का जो शब्द बैरी है उसे हमने बैरण कर दिया। उन्होंने कहा कि इस शब्द को वो प्रेमिका के लिए इस्तेमाल करते हैं। इस शब्द को प्यार से प्रेमिका के लिए इस्तेमाल किया गया है- ओ मेरी दुश्मन।

हरियाणवी म्यूजिक में कैसे कर रहे बदलाव की शुरुआत?

इस गाने को अपने चैनल पर अपनलोड करने के साथ ही सुमित और अनुज ने कमेंट सेक्शन में कमेंट पिन किया है कि वो इस गाने से हरियाणवी म्यूजिक में बदलाव की शुरुआत कर रहे हैं। उनसे जब पूछा गया कि वो हरियाणवी म्यूजिक में किस तरह का बदलाव लाना चाहते हैं तो उन्होंने कहा, “हम उसमें म्यूजिकली बदलाव लाना चाह रहे हैं। उन्होंने बताया कि वो इलेक्ट्रॉनिक म्यूजि को फोक गीतों के साथ जोड़ कर बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहला ऐसे हरियाणवी गानों के साथ नहीं हुआ है, और अगर हुआ भी है तो उन गानों को इस तरह की पहचान नहीं मिली।” इस गाने में हरियाणी बोल के साथ रॉक बीट का इस्तेमाल किया गया है। सिमित और अनुज ऐसे ही एक्सपेरिमेंट कर नए गाने बनाना चाहते हैं।

क्यों सुमित और अनुज ने ‘बंजारे’ नाम चुना?

अनुज और सुमित ने अपने डुओ का नाम बंजारे रखा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने बंजारे नाम इसलिए चुना कि क्योंकि उनके गाने में कहानियां और उन कहानियों का सफर दिखता है। इसलिए उन्हें अपने डुओ के लिए बंजारे शब्द बिल्कुल सटीक लगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने बैरण गाया और यूट्यूब और इंस्टा पर डाल दिया। इसके बाद लोगों ने गाने को प्यार दिया और गाना वायरल हो गया।

क्या पर्सनल अनुभवों से निकला बैरण गाना?

सुमित और अनुज ने बताया कि गाना बैरण वायरल होने के बाद उन्होंने बड़े म्यूजिक लेबल्स से अप्रोच किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें हर तरफ से प्यार मिल रहा है। वहीं, सुमित और अनुज से जब पूछा गया कि क्या ये गाना उन भाइयों में से किसी एक की पर्सनल कहानी कहता है? इस पर उन दोनों ने जवाब दिया कि नहीं ऐसा नहीं है। ये गाना यूनिवर्सल फीलिंग पर है। उन्होंने जो लिखा-पढ़ा उसी से ये गाना बनाया। उनका मानना है कि ये अगर ये गाना किसी एक की पर्सनल फीलिंग पर होता तो गाना इस तरह फटता (वायरल) नहीं होता। उन्होंने कहा कि उन्होंने जुदाई पर एक गाना बनाया जो हर किसी के दिल में होता है।

हरियाणवी गाने बैरण के लिरिक्स

हो, मन्ने सांभ-सांभ राखे तेरे झांझरा के जोड़े
मेरी गेल रो-रो ये भी छोरी बावले से होरे
मन्ने आए जावे ख्याल तेरे, खाए जावे ख्याल तेरे
जीण कोन्या देती, हाय बैरी तन्हाई मन्ने

गीतां में गाई, कदे छाती के लगाई मन्ने
जित भी गया रे, तेरी याद खड़ी पाई मन्ने
सांभ-सांभ राखी बहुत, छाती के लगाई मन्ने
जित भी गया रे, तेरी याद खड़ी पाई मन्ने

हो, मार्या-मार्या फिरे, देख हाल तू बिचारे का
तेरे बिना जीणा भी के जीणा बंजारे का?
खोया रहूं याद तेरी कर के नादानियां
बटुए में रखूं तेरी सांभ के निशानियां
तेरे बिना काल होरया, ठीक कोन्या हाल मेरा
हाथ जोड़ूं राम, देदे सांसों ते रिहाई मन्ने

गीतां में गाई, कदे छाती के लगाई मन्ने
जित भी गया रे, तेरी याद खड़ी पाई मन्ने
सांभ-सांभ राखी बहुत, छाती के लगाई मन्ने
जित भी गया रे, तेरी याद खड़ी पाई मन्ने

हाँ-आँ, आँ-आँ
हाँ-आँ

जे तू थोड़ी घबराज्या, मेरी याद तन्ने आ ज्या
तू दे दिए आवाज रे, मैं आ जाऊंगा
तोड़ूं दुनिया की रीत रे, के हार रे, के जीत?
मन्ने चाहिए तेरी प्रीत, मैं निभा जाऊंगा
देख, बावला बनागी, मन्ने लिखणा सिखागी
हाय, नोच-नोच खागी तेरी बैरण जुदाई मन्ने

गीतां में गाई, कदे छाती के लगाई मन्ने
जित भी गया रे, तेरी याद खड़ी पाई मन्ने
आज तै निभाऊं जो सी कसम थी खाई मन्ने
जिंदगी सारी या मेरी तेरे लेखे लाई मन्ने

Harshita Pandey

लेखक के बारे में

Harshita Pandey

हर्षिता पांडे पिछले सात साल से अधिक से डिजिटल मीडिया में काम कर रही हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम कर रही हैं।


विस्तृत बायो

मनोरंजन जगत की खबरों में दिलचस्पी रखने वाली हर्षिता पांडे को डिजिटल मीडिया में 7 साल से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में एंटरटेनमेंट सेक्शन में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर काम कर रही हैं। अप्रैल 2024 से हर्षिता पांडे लाइव हिंदुस्तान के साथ जुड़ी हैं। यहां वह सेलेब्स इंटरव्यू लेती हैं, फिल्मों, टीवी शोज और ओटीटी सीरीज पर खबरें बनाने के साथ साथ उनकी समीक्षा और बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट्स पर काम करती हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि और करियर की शुरुआत

2017 में मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में बैचलर्स की डिग्री पाने के बाद उन्होंने रेडियो एंड टीवी जर्नलिज्म में डिप्लोमा हासिल किया और फिर आजतक से अपने करियर की शुरूआत की, जहां उन्होंने 5 साल से अधिक काम किया।


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