
असरानी कैसे बने अंग्रेजों के जमाने के जेलर, शोले फिल्म के लिए क्रूर तानाशाह को किया कॉपी
दिग्गज फिल्म अभिनेता असरानी का 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। असरानी ने 350 से ज्यादा हिंदी फिल्मों में काम किया। लेकिन सबसे ज्यादा मशहूरी उन्हें मिली फिल्म शोले से। इस फिल्म में ‘अंग्रेजों के जमाने के जेलर’ का उनका किरदार काफी ज्यादा पॉपुलर है।
दिग्गज फिल्म अभिनेता असरानी का 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। असरानी ने 350 से ज्यादा हिंदी फिल्मों में काम किया। लेकिन सबसे ज्यादा मशहूरी उन्हें मिली फिल्म शोले से। इस फिल्म में ‘अंग्रेजों के जमाने के जेलर’ का उनका किरदार काफी ज्यादा पॉपुलर है। मरते दम तक वह अपने इस रोल के लिए जाने और पहचाने जाते रहे। शोले फिल्म में इस भूमिका के लिए उनके चयन की कहानी भी दिलचस्प है। साथ ही यह बात और भी दिलचस्प है कि उन्होंने इस भूमिका के लिए तैयारी किस तरह से की थी।
हिटलर जैसी मूंछें
यह बात तब की है जब शोले फिल्म के लिए अभिनेताओं का चुनाव हो रहा था। असरानी को इस फिल्म में जेलर के रोल के चुना गया था। शोले का स्क्रीन प्ले लिखने वाले सलीम और जावेद ने असरानी को इस रोल की जानकारी देने के लिए बुलाया। इस भूमिका की तैयारी करने के लिए दोनों असरानी को ‘वर्ल्ड वॉर सेकेंड’ नाम की एक किताब दी। किताब के कवर जर्मन तानाशाह हिटलर की फोटो बनी थी। यहीं से असरानी को अपने रोल की प्रेरणा मिली। अगर आप शोले फिल्म देखेंगे तो पाएंगे कि असरानी की मूंछें और ओवरऑल लुक हिटलर से ही प्रेरित है।
डायलॉग की तैयारी ऐसे
अपने इस रोल की तैयारी के लिए असरानी फिल्म इंस्टीट्यूट पुणे भी गए। वहां पर हिटलर की आवाज की रिकॉर्डिंग रखी हुई थी। असरानी ने हिटलर के अंदाज को कॉपी करना शुरू कर दिया। बाद में, ‘हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं’ डायलॉग बोलते हुए उन्होंने हिटलर के ही अंदाज को कॉपी किया था। आज भी दर्शकों के जेहन में उनका यह डायलॉग छाया हुआ है।

फिल्म में असरानी का रोल बहुत बड़ा तो नहीं था। लेकिन उन्होंने इस अंदाज में यह रोल निभाया कि यह उनकी पहचान का एक हिस्सा बन गया। आज भी असरानी के चाहने वाले उन्हें इस रोल के लिए खूब याद करते हैं।

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