
प्यास में तड़पकर गुजर गईं अरशद वारसी की मां, बोले- मैं पानी दे देता तो शायद पछताता
अरशद वारसी अपनी मां को याद करके इमोशनल हो गए। बताया कि वह पानी मांगती रहीं लेकिन उन्होंने नहीं दिया। उसी रात वह चल बसीं। अरशद आज भी सोचते हैं कि अच्छा हुआ पानी नहीं दिया वरना पूरी जिंदगी गिल्ट रहता।
अरशद वारसी जब 8 साल के थे तो बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने चले गए थे। फैमिली के साथ गुजारे वक्त की उनकी यादें काफी कम हैं। हालांकि मां के आखिरी समय का जख्म वह अभी भी अपने दिल में लेकर घूमते हैं। एक पॉडकास्ट में अरशद वारसी ने बताया कि उनकी मां को किडनी की दिक्कत थी। डॉक्टर ने पानी देने को मना किया था। वह प्यासी ही इस दुनिया से रुखसत हो गईं।

प्यासी गुजर गईं मां
अरशद वारसी राज शमानी के पॉडकास्ट पर थे। बातचीत में बचपन का टॉपिक आया तो उन्होंने बताया कि वह बोर्डिंग स्कूल में पढ़े हैं तो फैमिली से जुड़ी ज्यादा यादें नहीं हैं। मां के बारे में बोले, 'मेरी मां सिंपल हाउसवाइफ थीं। वह बहुत बढ़िया खाना पकाती थीं। उनकी किडनी फेल हो गई थी तो डायलिसिस पर थीं। डॉक्टर्स ने हमें कहा था कि उन्हें पानी नहीं देना है, वह मांगती रहीं। मैं ना कहता रहा और जिस रात वो गुजरीं तो उन्होंने मुझे बुलाया और पानी मांगा। मैंने नहीं दिया और वह उसी रात चल बसीं। इस चीज ने मेरी जान ले ली।'
पानी ना देकर पछतावा
अरशद बोलते हैं, 'मेरा एक हिस्सा मुझसे कहता रहा कि अगर मैंने उन्हें पानी दिया होता और तब वह गुजर जातीं तो मुझे लगता कि पानी दे दिया इसलिए मौत हो गई।' अरशद इस गिल्ट से तो बच गए लेकिन अब सोचते हैं कि उन्हें पानी दे देना चाहिए था। मैं बच्चा था डॉक्टर की बात मानना चाहता था। आज मैं फैसला ले सकता हूं। हम बीमार इंसान के बारे में नहीं सोचते बल्कि अपने गिल्ट के हिसाब से फैसला लेते हैं।
मां-बाप के मरने पर नहीं आया रोना
अरशद वारसी ने बताया कि जिंदगी के संघर्ष ने उन्हें उम्र से पहले बड़ा बना दिया था। उन्होंने बताया कि पिता को काफी घाटा हुआ था। उनका बड़ा सा घर था फिर वो घर छोड़ना पड़ा। धीरे-धीरे घर छोटा होता गया। मां-बाप के गुजरने के बाद वह रोए भी नहीं थे। क्योंकि मर्द बनने की कोशिश कर रहे थे। कई हफ्तों बाद जब धक्का लगा तो रोए।

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Kajal Sharmaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




