आमिर खान को नहीं थी रोमांटिक फिल्में देखने की इजाजत, बोले- मैं कंजर्वेटिव घर में पला-बढ़ा

Harshita Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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आमिर खान ने हाल ही में बताया कि उन्हें रोमांटिक फिल्में देखने की इजाजत नहीं थी। उन्होंने कहा कि वो आज भी ज्यादा फिल्में नहीं देखते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें बचपन से ही पढ़ने-लिखने का बहुत शौक रहा है। 

आमिर खान को नहीं थी रोमांटिक फिल्में देखने की इजाजत, बोले- मैं कंजर्वेटिव घर में पला-बढ़ा

बॉलीवुड में मिस्टर परफेक्शनिस्ट के नाम से पहचाने जाने वाले आमिर खान ने बताया कि वो बहुत कम फिल्में देखते हैं। उन्होंने कहा कि वो बचपन से ही ऐसे हैं। उन्हें पढ़ने का ज्यादा शौक है। आमिर खान ने कहा कि वो एक कंजर्वेटिव परिवार में पले-बढ़े और उनके माता-पिता फिल्में देखने को लेकर बहुत सख्त थे। आमिर खान ने बताया कि उन्हें रोमांटिक फिल्में देखने की इजाजत नहीं थी। आमिर ने कहा कि वो अब भी फिल्में नहीं देखते हैं, उन्हें नहीं पता हॉलीवुड में क्या हो रहा है। उन्होंने कहा कि वो अपनी ही दुनिया में रहते हैं।

आमिर खान ने बताया क्यों नहीं थी रोमांटिक फिल्में देखने की इजाजत?

Variety India के साथ खास बातचीत में आमिर खान ने बताया कि उनका रुझान हमेशा पढ़ने की ओर ज्यादा रहा। उन्होंने कहा, “मैं बचपन से ही ऐसा रहा। मैं हमेशा से एक रीडर रहा हूं। मैंने लगातार केवल ब्लैक एंड व्हाइट फिल्में ही देखी हैं, या फिर बहुत पुरानी फिल्में जो दूरदर्शन पर आती थीं। उन दिनों, मैं एक बहुत ही कंजर्वेटिव (रूढ़िवादी) घर में पला-बढ़ा। और मेरे पेरेंट्स फिल्में देखने को लेकर बहुत सख्त थे। हमें फिल्में देखने की इजाजत नहीं थी। तो उस वक्त, मुझे याद है, अगर मैं अपनी मां से पूछता था कि क्या मैं फिल्म देख सकता हूं, तो वो कहती थीं हां, लेकिन रोमांटिक फिल्म देखने की इजाजत नहीं थी।”

आमिर खान शनिवार और रविवार को देखते थे फिल्में

आमिर खान ने आगे बताया कि वो शनिवार और रविवार को फिल्में देखते थे, खासकर पुराने जमाने के सितारों वाली फिल्में। उन्होंने बताया कि उन्होंने ज्यादातर रीजनल सिनेमा देखा है और वो फिल्में जिसमें अशोक कुमार और दिलीप कुमार होते थे।

अब भी फिल्में नहीं देखते हैं आमिर खान

आमिर खान ने कहा कि वो अब भी कभी-कभार ही फिल्म देखते हैं। उन्होंने कहा, "मैंने 18 साल की उम्र में फिल्ममेकिंग शुरू की। मैंने असिस्टेंट के तौर पर काम शुरू किया। मैं उपदेशात्मक नहीं लगना चाहता, लेकिन मज़ाक में कहना चाहूंगा कि कुछ लोग फुटबॉल खेलते हैं और कुछ लोग फुटबॉल देखते हैं। ये कहने का एक अच्छा तरीका है। मैं फिल्म बनाता हूं, मैं कम ही फिल्म देखता हूं। तो मैं लेटेस्ट फिल्में नहीं देखता हूं। मुझे नहीं पता है कि हॉलीवुड में क्या चल रहा है। मैं अपनी ही दुनिया में रहता हूं, मैं मैं ज्यादा कुछ नहीं देखता।

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लेखक के बारे में

Harshita Pandey

हर्षिता पांडे पिछले सात साल से अधिक से डिजिटल मीडिया में काम कर रही हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम कर रही हैं।


विस्तृत बायो

मनोरंजन जगत की खबरों में दिलचस्पी रखने वाली हर्षिता पांडे को डिजिटल मीडिया में 7 साल से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में एंटरटेनमेंट सेक्शन में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर काम कर रही हैं। अप्रैल 2024 से हर्षिता पांडे लाइव हिंदुस्तान के साथ जुड़ी हैं। यहां वह सेलेब्स इंटरव्यू लेती हैं, फिल्मों, टीवी शोज और ओटीटी सीरीज पर खबरें बनाने के साथ साथ उनकी समीक्षा और बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट्स पर काम करती हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि और करियर की शुरुआत

2017 में मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में बैचलर्स की डिग्री पाने के बाद उन्होंने रेडियो एंड टीवी जर्नलिज्म में डिप्लोमा हासिल किया और फिर आजतक से अपने करियर की शुरूआत की, जहां उन्होंने 5 साल से अधिक काम किया।


एंटरटेनमेंट और विजन

फिल्म, ओटीटी और टीवी शोज में हर्षिता की अच्छी पकड़ है। उनका लक्ष्य पाठकों तक सटीक, प्रमाणिक और सशक्त जानकारी देना है।


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