‘पानी की बोतलों के बजट में एक शॉर्ट फिल्म बन जाए’, ऑनटोराज कल्चर पर क्या बोला 73 साल का ये एक्टर?
बॉलीवुड में स्टार्स के ऑनटोराज को लेकर एक्टर सुधीर पांडे ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वो जो पूरा काफिला चलता है, बहुत बनावटी सा खेल लगता है। वो लगता है कि ये पैसों की बर्बादी है।

बॉलीवुड में पिछले कुछ वक्त से स्टार्स के ऑनटोराज को लेकर बेहस छिड़ी हुई है। अब इस बारे में तीस मार खां एक्टर सुधीर पांडे ने बात की। उन्होंने इसे पैसे की बर्बादी बताई। सुधीर पांडे ने कहा कि जितना पानी की बोतलों पर खर्च होता है, उससे एक छोटे बजट की फिल्म बन सकती है। इस बातचीत के दौरान उन्होंने ये भी बताया कि क्या वो भी अपने साथ अपनी टीम लेकर शूट्स पर जाते हैं?
ऑनटोराज पर क्या बोले सुधीर पांडे
सिद्धार्थ कनन के साथ खास बातचीत में सुधीर पांडे ने ऑनटोराज को लेकर बात की। उनसे पूछा गया कि बड़े-बड़े स्टार्स को आठ-आठ वैनिटी वैन्स मिलती हैं, क्या कैरेक्टर आर्टिस्ट्स को भी बड़ी वैनिटी वैन्स मिलती हैं? इसपर सुधीर ने कहा कि कभी-कभी होता है कि बड़ी वैन मिल जाए। ज्यादातर नॉर्मल वैनिटी वैन ही मिलती हैं।
ऑनटोराज के खर्चे को बताया पैसे की बर्बादी
इसके बाद सुधीर पांडे ने ऑनटोराज पर खर्चे को लेकर बात की। उन्होंने कहा, “अब वो जो पूरा काफिला चलता है, वो सारा बनावटी सा लगता है सारा खेल। ऐसा लगता है कि वो पैसे की बर्बादी है। मतलब अगर स्टार्स अपने पास से पैसे दे रहे हैं तो ठीक है, लेकिन अगर प्रोड्यूसर्स के पास से जा रहा है तो वो बर्बादी है। मतलब एक छोटी फिल्म बन जाए…बिसलेरी की पानी की बोतलों (उनपर होने वाला खर्चा) से एक छोटी फिल्म बन जाए कोई भी।”
क्या सेट पर टीम के साथ जाते हैं सुधीर पांडे?
इसके बाद सुधीर पांडे से सवाल हुआ कि वो कितने लोगों को लेकर जाते हैं सेट पर? उन्होंने कहा- मैं तो किसी को नहीं लेकर जाता। मैं अकेला ही जाता हूं। कभी बहुत हुआ तो…बीच में मुझे जरूरत थी कि मेरे खाने-वाने का काफी गड़बड़ हो रहा था तो एक बॉय रख लिया था।
सुधीर ने बताया कि ज्यादातर होता है कि वो खुद ही उस बॉय के पैसे देते हैं। एक दो बार हुआ कि प्रोड्यूसर्स ने दिए होंगे। उनसे जब पूछा गया कि क्या उन्हें बुरा लगता है कि स्टार्स के ऑनटोराज पर इतना खर्च होता है और उन्हें अपने बॉय का पैसा खुद देना पड़ता है। इसपर उन्होंने कहा कि ये कल्चर का पार्ट है। वो इसे ठकुराई वाला कल्चर कहते हैं।
सुधीर पांडे ने कहा, “ये सिर्फ इंडस्ट्री में ही नहीं है, पूरे समाज में ही ऐसा होता है। हम जिस समाज को लोकतंत्र कहते हैं….कहां का लोकतंत्र…कहने में बड़ा अच्छा लगता है, लेकिन जिसको भी शक्ति मिलती है, वो ठाकुर बन जाता है। उसको आप चुनौति नहीं कर सकते हैं। उसकी ठकुराई चलती है।”


