Madhya Pradesh Elections 2018 biggest issue of farming and employment - मध्य प्रदेश सत्ता संग्राम: किसान और रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा DA Image
22 नवंबर, 2019|1:38|IST

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मध्य प्रदेश सत्ता संग्राम: किसान और रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा

shivraj singh chauhan

मध्यप्रदेश विधानसभा की 230 सीटों के लिए होने वाले मतदान में अब चंद दिन बचे हैं और ऐसे में दोनों ही पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पूरे राज्य में किसान और रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा है। साथ ही भ्रष्टाचार, शासन व्यवस्था का भी मुद्दा कई क्षेत्रों में अहम है। हालांकि प्रचार के दौरान पार्टियां क्षेत्र के हिसाब से मुद्दों को उठा रही है, ताकि मतदाताओं के दिलों को छू सके। इसकी बानगी कांग्रेस और भाजपा के घोषणा पत्रों में भी देखने को मिली, जहां लोगों की राय को तरजीह दी गई। 

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक कांग्रेस और भाजपा भले भोपाल की गद्दी के लिए सधी रणनीति बनाकर मैदान में हो। लेकिन उसे विशाल मध्यप्रदेश की क्षेत्रीय भिन्नताओं और आकांक्षाओं का भी अंदाजा है। यही कारण है कि जब वे इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में जाते हैं, तो कारोबारियों का मुद्दाउनकी प्राथमिकता में होता है। चाहे फिर जीएसटी का मुद्दा हो या नोटबंदी का, दोनों पार्टियां अपने-अपने तरीके से उनका नफा-नुकसान समझा रही हैं। 

इसी प्रकार ग्रामीण खासतौर पर गेंहू उत्पादक होशंगाबाद  इलाकों में किसानों का मुद्दा प्राथमिकता में है। फिर चाहे किसानों की फसल की उचित कीमत हो या कर्ज माफी। नर्मदा से लगते इलाके में अवैध खनन का मुद्दा कांग्रेस की ओर से जोर शोर से उठाया जा रहा है। वहीं आदिवासी बहुल मंडला जैसे इलाकों में वन उत्पाद और जमीन के मुद्दा केंद्र में जाता है और कांग्रेस और भाजपा के अपने-अपने दावे होते हैं। 

विंध्य और बुंदेलखंड इलाके में वैसे तो भाजपा और कांग्रेस में सीधा मुकाबला है। लेकिन मैदान में बसपा की अलग से उपस्थिति दोनों को परेशान कर रही है। कांग्रेस खासतौर पर चिंतित है क्योंकि वह जानती है कि बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में उसकी तमाम कोशिश पर बसपा का हाथी भारी पड़ सकता है। बसपा से भाजपा भी कम आशंकित नहीं है, क्योंकि अनुसूचित जाति का एक बड़ा धड़ा गत चुनावों में उसका देता रहा है। खासतौर पर ग्वालियर चंबल इलाके में जहां उसके सामने सिंधिया घराने का प्रभाव और मायावती की पैठ की दोहरी चुनौती है। इसलिए यहां पर एससी/एसटी ऐक्ट के मुद्दे की सरगरमी अधिक सुनाई दे रही है। 

चुनावी बिसात में किस क्षेत्र में कौन मारेगा बाजी!

ग्वालियर- चंबल : ज्योतिरादित्य की प्रतिष्ठा दांव पर
क्षेत्र में कांग्रेस के पास सबसे बड़े चेहरे के रूप में ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं। यहां पर ज्योतिरादित्य की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। 
- ग्वालियर राजघराने का प्रभाव है, संभावित मुख्यमंत्री प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया क्षेत्र से आते हैं
- दतिया, ग्वालियर, मुरैना और भिंड में बसपा का काफी प्रभाव देखा जा रहा है
जिले : अशोक नगर, भिंड, दतिया, गुना, ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर और शिवपुरी 
कुल सीट : 34 
2013
भाजपा : 20
कांग्रेस : 12
बसपा : 2

विंध्य : भाजपा के लिए चुनौती बने अजय सिंह 
विंध्य क्षेत्र में भाजपा के लिए नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह चुनौती के रूप में सामने हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के बेटे चुरहट से 20 साल से चुनाव जीतते आ रहे हैं। 
- उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगता विंध्य सवर्ण बाहुल क्षेत्र है
- उत्तरप्रदेश में सक्रिय बसपा और सपा की भी यहां पर पैठ है
जिले : अन्नूपुर, रीवा, सतना, शहडोल, सिधी, सिंगरौली और उमरिया 
कुल सीट : 30 
2013 
भाजपा : 16
कांग्रेस : 12
बसपा : 2

 मालवा : कैलाश विजयवर्गीय का अभेद्य किला 
यह क्षेत्र भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का अभेद्य किला रहा है। इसे भेदना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है। 
- पिछले साल किसान आंदोलन का केंद्र रहा मंदसौर भी इसी क्षेत्र में पड़ता है
 - इंदौर और उज्जैन बड़े शहरी क्षेत्र हैं। जीएसटी और नोटबंदी के मुद्दे पर भी घमासान 
जिले : अगर-मालवा, अलीराजपुर, देवास, धार, इंदौर, झाबुआ, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर और उज्जैन 
कुल सीट : 55
2013
भाजपा : 49
कांग्रेस : 5 
अन्य : 1

मध्य क्षेत्र : मुख्यमंत्री शिवराज की अग्निपरीक्षा
तेरह साल से राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे शिवराज सिंह चौहान के लिए यह अग्निपरीक्षा जैसी स्थिति है। वह बुधनी सीट से चुनाव मैदान में हैं। 
- कांग्रेस ने कुल तीन मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं, जो इसी क्षेत्र में पड़ते हैं
- भाजपा की एकमात्र मुस्लिम प्रत्याशी फातिमा रसूल सिद्दकी भोपाल उत्तर से हैं
जिले : भोपाल, दामोह, रायसेन, सागर, सिहोर, विदिशा 
कुल सीट : 32
2013
भाजपा: 25
कांग्रेस : 6
अन्य : 1
बुंदेलखंड :मंत्री भूपेंद्र के लिए चुनौती 
इस क्षेत्र में मंत्री भूपेंद्र सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। भूपेंद पर यहां भाजपा को मजबूत करने की बड़ी चुनौती है। 
 - उत्तरप्रदेश के हिस्से को मिलकार बुंदेलखंड राज्य बनाने की पुरानी मांग है
 - इस क्षेत्र में जल संकट के साथ गरीबी और बेरोजगारी भी यहां बड़ा मुद्द है
जिले : छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, निवारी
कुल सीट : 14 
2013
भाजपा : 10
कांग्रेस : 4

महाकौशल : कमलनाथ के लिए बड़ा मौका

-कमलनाथ के लिए ये चुनाव बड़ा मौका है। राज्य में पार्टी की जीत से ही छिंदवाड़ा से सांसद कमलनाथ का भाग्य तय होगा। 
- कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ का क्षेत्र है, जो 2014 में भी अपनी सीट बचाने में कामयाब हुए थे
- यह क्षेत्र गेंहू के उत्पादन में अग्रणी है, इसलिए किसानों का मुद्दा प्रमुखता से उठ रहा है
 जिले : बालाघाट, बरवानी, बेतुल, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, दिडोरी, हर्दा, होशंगाबाद, कटनी, खांडवा, खरगौन, जबलपुर, मंडला, नरसिंहपुर, सियो 
कुल सीट : 65
2013
भाजपा : 45
कांग्रेस : 19
अन्य : 1

चुनावी बिसात 
- 5. 03 करोड़ मतदाता इस बार 230 सीटों पर करेंगे फैसला 
-2,40,77,719 महिला मतदाता , 1410 तृतीय लिंग के हैं 
- 15,78,167 मतदाता पहली बार चुनावी प्रक्रिया में शामिल होंगे 
- 34 प्रत्याशी सबसे अधिक मेहगांव विधानसभा सीट पर हैं 
- 4 प्रत्याशी गुनौर विधानसभा सीट के लिए हैं, सबसे कम 
 

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