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Hindi News चुनाव लोकसभा चुनाव 2024देवराहा बाबा से खाई लात, अंबाजी के दर्शन को गईं गुजरात; फिर रामलला से दूर क्यों सोनिया गांधी

देवराहा बाबा से खाई लात, अंबाजी के दर्शन को गईं गुजरात; फिर रामलला से दूर क्यों सोनिया गांधी

Lok Sabha Election and Hindutva Politics: रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में सोनिया शामिल नहीं होंगी।हालांकि वह राजस्थान के पुष्कर स्थित ब्रह्मा मंदिर में भी 1991, 1998 और 2003 में पूजा कर चुकी हैं।

देवराहा बाबा से खाई लात, अंबाजी के दर्शन को गईं गुजरात; फिर रामलला से दूर क्यों सोनिया गांधी
Pramod Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 11 Jan 2024 10:58 AM
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कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि मौजूदा अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता विपक्ष अधीर रंजन चौधरी 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल नहीं होंगे। इसके बाद सबसे ज्यादा आलोचनाएं सोनिया गांधी को झेलनी पड़ रही हैं। उन्हें सनातन विरोधी करार दिया जा रहा है और सोशल मीडिया पर तमाम तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। कई लोग उन्हें हिन्दू विरोधी और हिन्दू देवी-देवताओं का भी विरोधी करार दे रहे हैं।

हालांकि, ऐसा नहीं है क्योंकि 1968 में राजीव गांधी से शादी करने के बाद जब वह भारत में रहने लगीं तो उनकी सास इंदिरा गांधी उन्हें 1979 में गुजरात के प्रसिद्ध अंबाजी मंदिर ले गई थीं। उस वक्त इंदिरा सबसे खराब राजनीतिक हालात से गुजर रही थीं। 1980 के लोकसभा चुनावों से ऐन पहले इंदिरा का अपनी बहू के साथ उस मंदिर में जाना और पूजा करना फलदायी साबित हुआ था। इंदिरा गांधी तब 531 में से 353 सीटों पर प्रचंड जीत के साथ सत्ता में लौटकर आई थीं। उस वक्त मोरारजी देसाई की सरकार थी।

दूसरी बार पहुंची थीं अंबा जी मंदिर
शादी के बाद से ही अपने सिर पर साड़ी का पल्लू रखने वालीं सोनिया 1989 में अपने प्रधानमंत्री पति राजीव गांधी के साथ दोबारा इस मंदिर में गई थीं। हालांकि, तब के चुनावों में कांग्रेस की हार हुई थी और राजीव गांधी की सरकार चली गई थी। 1989 के चुनावों के बाद देश में दूसरी बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी। वीपी सिंह तब प्रधानमंत्री बने थे, जिन्हें बीजेपी भी समर्थन दे रही थी। 

देवराहा बाबा से भी ले चुकी हैं आशीर्वाद
1989 के चुनावों के समय ही सोनिया गांधी अपने पति राजीव के साथ उत्तर प्रदेश के वृंदावन के पास बने आश्रम में देवराहा बाबा से भी आशीर्वाद लेने गई थीं। देवराहा बाबा जमीन से छह फीट की ऊंचाई पर बने लकड़ी के एक मचान पर बैठा करते थे और श्रद्धालुओं को अनोखे अंदाज में लात मारकर आशीर्वाद देते थे। राजीव और सोनिया ने तब उनका आशीर्वाद पाया था।

बालाजी तिरुपति मंदिर पहुंची थीं सोनिया
1998 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी सोनिया गांधी आंध्र प्रदेश के तिरुपति स्थिति बालाजी के मंदिर में दर्शन करने पहुंची थीं। तब वह कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष थीं। उनकी तिरूपति यात्रा के तुरंत बाद, कांग्रेस कार्य समिति ने एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें कहा गया था कि हिंदू धर्म भारत में धर्मनिरपेक्षता की सबसे बड़ी गारंटी है।

वरिष्ठ पत्रकार राशिद किदवई ने इंडिया टुडे में लिखे एक आलेख में इसका जिक्र करते हुए लिखा है कि तब तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के अध्यक्ष सुब्बिरमी रेड्डी ने सोनिया गांधी को तिरुपति मंदिर का दर्शन कराया था, जिसका काफी विरोध हुआ था। किदवई के मुताबिक, तब सोनिया गांधी ने मंदिर की डायरी में लिखा था कि वो अपने पति और अपनी सास के धर्म का पालन करती हैं।

ईसाई धर्म का पालन नहीं करतीं सोनिया
1999 में जब 13 महीने बाद ही फिर से लोकसभा चुनाव होने लगे तब बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सोनिया गांधी के धर्म का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। संघ परिवार ने तब 'राम राज्य' बनाम 'रोम राज्य' का मुद्दा छेड़ा था। तब भारत में रोमन कैथोलिक एसोसिएशन ने अभूतपूर्व घटनाक्रम में इस पर  बयान जारी कर इस बात को खारिज किया था कि सोनिया गांधी ईसाई कैथोलिक धर्म का पालन करती हैं। उन चुनावों में बीजेपी की जीत हुई थी और तीसरी बार अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी थी जो पहली बार पांच साल चली थी।

अयोध्या से किनारा क्यों?
कांग्रेस पार्टी का मानना है कि अयोध्या में 22 जनवरी का कार्यक्रम बीजेपी और संघ परिवार का राजनीतिक कार्यक्रम है, जिसका मकसद लोकसभा चुनावों में हिन्दू मतदाताओं का ध्रुवीकरण करना है। इसलिए पार्टी ने उस आयोजन से खुद को किनारा कर लिया है। दरअसल, पार्टी सॉफ्ट हिन्दुत्व के लाइन पर चलती रही है और इसके पीछे अल्पसंख्यक वोट एक बड़ा कारण रहा है, जबकि बीजेपी हार्ड  हिन्दुत्व के एजेंडे पर चलकर बहुसंख्यक हिन्दू वोटरों को लुभाने की कोशिश जारी रखे हुए है।

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