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Hindi News चुनाव लोकसभा चुनाव 2024जानिये क्यों कहा जाता है डॉ. महेश शर्मा को नोएडा का मेट्रो मैन?

जानिये क्यों कहा जाता है डॉ. महेश शर्मा को नोएडा का मेट्रो मैन?

साल 2019 में, 5503 करोड़ रुपये की लागत से बनी नोएडा मेट्रो ने दिल्ली और नोएडा के बीच कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदल दिया। जाम के कारण लोगों का घंटों का समय बर्बाद होने से बच रहा है।

जानिये क्यों कहा जाता है डॉ. महेश शर्मा को नोएडा का मेट्रो मैन?
Himanshu Jhaलाइव हिन्दुस्तान,गौतमबुद्ध नगर।Wed, 21 Feb 2024 06:04 AM
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लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने ही वाला है। सियासी दलों के साथ-साथ राजनेता भी अपने-अपने समीकरण फिट करने की कोशिश में दिख रहे हैं। दिल्ली एनसीआर की गौतमबुद्ध नगर सीट पर भी सभी की नजरें टिकी हैं। फिलहाल यहां से डॉ. महेश शर्मा सांसद हैं। वह केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। बतौर सांसद उनके कामकाज का लेखाजोखा देखें तो उन्हीं के कार्यकाल में नोएडा को मेट्रो ट्रेन जैसी यातायात की सुविधा मिली है। नोएडा मेट्रो का विस्तार भविष्य में ग्रेटर नोएडा वेस्ट और आसपास के क्षेत्रों तक होने की संभावना है।

साल 2019 में, 5503 करोड़ रुपये की लागत से बनी नोएडा मेट्रो ने दिल्ली और नोएडा के बीच कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदल दिया। जाम के कारण लोगों का घंटों का समय बर्बाद होने से बच रहा है। आपको बता दें कि मेट्रो का निर्माण दिसंबर 2014 के अंत तक शुरू किया गया था। अगस्त 2018 में ट्रायल रन शुरू हुआ 2019 में इसका उद्घाटन हुआ। नोएडा मेट्रो को  में 12 स्टेशन बनाए गए।

नोएडा में 21 मेट्रो स्टेशन
एनएमआरसी ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच 29.707KM की लंबाई को तय करते हुए अपना कॉरिडोर खोला है। 21 स्टेशनों में से 15 नोएडा और 6 ग्रेटर नोएडा में हैं। एनएमआरसी ने IGBC ग्रीन रेटिंग सिस्टम से एनएमआरसी के सभी 21 एलिवेटेड स्टेशनों के लिए "IGBC PLATINUM" रेटिंग मिली है।

मेट्रे से समय की बचत
नोएडा मेट्रो ने दिल्ली और नोएडा के बीच यात्रा का समय काफी कम कर दिया है। पहले जहां सड़क मार्ग से यात्रा करने में घंटो का समय लगता था वहीं अब मेट्रो से यह यात्रा मिनटों में पूरी हो जाती है। नोएडा मेट्रो आधुनिक सुविधाओं से युक्त है। इसमें वातानुकूलित डिब्बे, एस्केलेटर, लिफ्ट और सीसीटीवी कैमरे जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

मेट्रो ने खोली आर्थिक विकास की राह
नोएडा मेट्रो ने नोएडा के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसने नोएडा को दिल्ली के करीब ला दिया है। यहां व्यापार और निवेश के अवसरों में वृद्धि हुई है। नोएडा मेट्रो के निर्माण में नई तकनीक का इस्तेमाल हुआ है।

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