Chhattisgarh election 2018: Will Raman Singh get fourth tenure as a CM know about his profile - छत्तीसगढ़ चुनाव 2018: क्या रमन सिंह लगा पाएंगे जीत का चौका? DA Image
19 नबम्बर, 2019|12:50|IST

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छत्तीसगढ़ चुनाव 2018: क्या रमन सिंह लगा पाएंगे जीत का चौका?

Raman Singh

पिछले 15 साल से छत्तीसगढ़ की कमान संभाल रहे डॉक्टर रमन सिंह चौथी बार प्रदेश में भाजपा सरकार बनाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। वर्ष 2000 में राज्य के वजूद में आने के बाद रमन सिंह 7 दिसंबर 2003 को छत्तीसगढ़ के दूसरे मुख्यमंत्री बने थे। रमन के नेतृत्व में भाजपा दो बार 2008 और 2013 का विधानसभा चुनाव जीत चुकी है। वहीं विपक्षी पार्टियां उन्हें घेरने में पूरी ताकत लगा रही हैं। इसके साथ ही रमन को इस बार सत्ता विरोधी लहर का भी सामना करना पड़ सकता है। 

तीसरी बार चुनाव मैदान में
रमन सिंह राजनांदगांव से तीसरी बार विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुई पूर्व प्रधानमंत्री की भतीजी करुणा शुक्ला से चुनौती मिल रही है। रमन के पास 6 करोड़ 41 लाख रुपये की अचल और 4 करोड़ 31 लाख 35 हजार रुपये की चल संपत्ति है।

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ताकत
चावल वाले बाबा : डेढ़ दशक के कामकाज में गरीबों और आदिवासियों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं। नाममात्र के मूल्य पर चावल उपलब्ध कराने की योजना के कारण राज्य की आदिवासी जनता के बीच चावल वाले बाबा के तौर पर मशहूर हैं।

लोकसुराज अभियान : गांव गांव जाकर लोगों की समस्या सुनकर उसका मौके पर निदान करने के लिए लोकसुराज अभियान शुरू किया है।

शिक्षा-स्वास्थ्य : राज्य में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की। नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष योजनाएं शुरू कीं।

कमजोरी
नक्सल समस्या बरकरार : 15 साल के शासन में राज्य में नक्सलवाद पर लगाम नहीं लगाया जा सका। कई बड़े नक्सली हमलों में लोगों और सुरक्षा बलों की जान गई है।
 
विकास कार्य न होने पर असंतोष : कई इलाकों में अब तक विकास कार्य नहीं होने को लेकर भाजपा नेताओं को जनता के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है।
 
सत्ता विरोधी लहर : राज्य में लगातार 15 साल से भाजपा शासन के बाद रमन सरकार को इस बार सत्ता विरोधी लहर का भी सामना करना पड़ रहा है।


जनसंघ से राजनीतिक पारी
साल 1976 में भारतीय जनसंघ के साथ एक युवा नेता के तौर पर राजनीतिक पारी शुरू की। 1983 में कवर्धा (कबीरधाम) नगरपालिका में पार्षद बने। साल 1990 और 1993 में मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। 1999 में राजनांदगांव से लोकसभा का चुनाव जीता। 1999 से 2003 तक केंद्र की अटलबिहारी वाजपेयी सरकार में वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री का पद संभाला। 2003 में छत्तीसगढ़ में भाजपा की जीत के बाद उन्हें राज्य की कमान सौंपी गई। रमन के बेटे अभिषेर्क सिंह राजनांदगांव से सांसद हैं।

गरीबों के डॉक्टर
15 अक्तूबर, 1952 को कवर्धा में जन्मे रमन की पढ़ाई कवर्धा, राजनांदगांव में हुई। पिता वकील थे। रमन ने 1975 में आयुर्वेदिक मेडिसिन में बीएएमएस की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद अपने कस्बे में आयुर्वेदिक चिकित्सक के तौर पर कैरियर शुरू किया। बहुत कम फीस लेने के कारण वे गरीबों के डॉक्टर के तौर पर लोकप्रिय हुए।

यहां बेहतर काम : 
- 2005-06 के मुकाबले 2017-18 में कुपोषण का स्तर 52% से घटकर 37% पर आया। 
- 95% घरों तक बिजली कनेक्शन पहुंच चुके हंै, 2011 में 75% था यह आंकड़ा 

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यहां मेहनत की जरूरत
- देश के कुल श्रमबल में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी 2.5% है, जबकि फैक्टरी कार्य 1.2% ही उपलब्ध 
- कई जिले नक्सली हिंसा प्रभावित हैं, 2005 से अब तक 3000 लोग नक्सर्ली हिंसा में जान गंवा चुके हैं  

रेडियो पर गोठ
मासिक रेडियो वार्ता गोठ के जरिये मुख्यमंत्री रमन सिंह प्रदेश की जनता से रूबरू होकर देश-प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों, सामयिक घटनाओं और अपने विचार साझा करते हैं।

सोशल मीडिया पर सक्रिय
सोशल मीडिया पर सक्रिय रमन फेसबुक प्रश्नोत्तरी के जरिये भी लोगों के सवालों का जवाब देते हैं। ट्विटर पर भी सक्रिय हैं। 

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