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chhatissgarh election 2018: पहले फेज की वोटिंग में दांव पर कांग्रेस की साख, जानिए क्या हैं मुद्दे

Chhatissgarh Election 2018: छत्तीसगढ़ में दो चरणों में चुनाव होने हैं। पहले चरण में जिन सीटों के लिए मतदान होगा, उनमें से दो तिहाई सीटें फिलहाल कांग्रेस के पास हैं।

छत्तीसगढ़ चुनाव 2018: पहले फेज की वोटिंग में दांव पर कांग्रेस की साख

chhatissgarh election 2018: छत्तीसगढ़ में दो चरणों में चुनाव होने हैं। पहले चरण में जिन सीटों के लिए मतदान होगा, उनमें से दो तिहाई सीटें फिलहाल कांग्रेस के पास हैं। वह तीन बार से मुख्यमंत्री पद पर काबिज रमन सिंह को सत्ता से बेदखल करने के इरादे से पूरा जोर लगा रही है, पर जीत उसके लिए आसान नहीं होगी। ये सीटें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हैं, जहां सुरक्षा बड़ा मसला है। अजीत जोगी के मैदान में आने से लड़ाई त्रिकोणीय हो गई है।

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मुद्दे जो जनता का रुख तय करेंगे

नक्सल समस्या

पहले चरण की अधिकतर सीटें नक्सल प्रभावित हैं। ऐसे में इस समस्या से निपटने को लेकर सियासी पार्टियों की रणनीति निश्चय ही वोटरों का मिजाज तय करेगी।

कृषि 

विपक्षी दलों के लिए कृषि बड़ा मुद्दा है। उनका आरोप है कि सरकार ने कृषि की उपेक्षा की, पर सरकार का दावा है कि उसके कार्यकाल में कई सुधार हुए हैं।

बेरोजगारी

यह बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है। नक्सल प्रभावित इलाका होने के कारण यहां अपेक्षाकृत कम विकास हुआ है। इसलिए युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की कमी है।

विकास

यह चुनाव में बड़ा मुद्दा है। भाजपा का दावा है कि सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य में उसने उल्लेखनीय काम किए हैं। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि इन क्षेत्रों की अनदेखी की गई है।

ताकत

- 15 वर्ष से राज्य में भाजपा सरकार होने के कारण सत्ताविरोधी रुख का लाभ मिलेगा।
- पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी संकल्प यात्रा से प्रचार को दे रहे धार।

कमजोरी

-पार्टी में गुटबाजी बड़ी समस्या
-अजीत जोगी के अलग होने के बाद पार्टी के पास राज्य में कोई करिश्माई चेहरा नहीं।

भाजपा 

ताकत

- मुख्यमंत्री रमन सिंह द्वारा 15 साल में किए काम और केंद्र की योजनाओं पर भरोसा।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रचार में शामिल होने से लाभ की उम्मीद।

कमजोरी 

- टिकट से वंचित कई नेता नाराज
- 15 साल से लगातार सत्ता में रहने की वजह से सत्ता विरोधी मतों का ध्रुवीकरण। 

बड़ा मुकाबला

राजनांदगांव

मुख्यमंत्री रमन सिंह चौथी बार पद पर बने रहने के लिए यहां से मैदान में हैं। वह बतौर भाजपा प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। उनके खिलाफ कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला को अपना प्रत्याशी बनाया है। 

दंतेवाड़ा

यहां कांग्रेस ने अपने आदिवासी नेता महेंद्र कर्मा की पत्नी देवती कर्मा को प्रत्याशी बनाया है। उनके खिलाफ पुत्र छविंद्र कर्मा ही मैदान में आ गए थे। हालांकि उन्होंने नाम वापस ले लिया। भाजपा ने भीमा मंडावी को उतारा है, जो कांग्रेस अध्यक्ष पर टिप्पणी कर विवादों में आए थे।

जोगी से जटिल हुई चुनावी गणित

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बसपा और भाकपा के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरने से दोनों दलों की बढ़ी मुश्किल। 

- 4.27%मत मिले थे बसपा को पिछले चुनाव में, जोगी आदिवासी बहुल क्षेत्रों में खासे प्रभावी रहे थे।
- 2013 के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस में मतों का अंतर मात्र एक फीसदी था।

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