जिम्बाब्वे की टीम अपना रही है गौतम गंभीर वाला 'प्लान', कप्तान बोले- ऐसा नहीं किया तो हम...
जिम्बाब्वे की टीम गौतम गंभीर वाला 'प्लान' अपना रही है। कप्तान सिकंदर रजा ने कहा है कि अगर हमने ऐसा नहीं किया तो हम दुनिया से पीछे रह जाएंगे। जिम्बाब्वे की टी20 टीम में अब 8 बल्लेबाजी के विकल्प हैं।

जिम्बाब्वे की टीम के कप्तान सिकंदर रजा ने भी वही रूट अपनाया है, जिस पर चलने के लिए टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर फेमस हैं। गौतम गंभीर भी ज्यादा से ज्यादा बैटिंग ऑप्शन प्लेइंग इलेवन में रखते हैं और बैटिंग में गहराई चाहते हैं। ऐसा ही जिम्बाब्वे ने बांग्लादेश के खिलाफ जारी 3 मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज के पहले मैच में किया है। खुद कप्तान सिकंदर रजा ने इस बात को स्वीकार किया है कि उन्होंने 8 बल्लेबाजों के साथ इसलिए उतरने का फैसला किया, क्योंकि वे चाहते थे कि बैटिंग यूनिट बिना किसी डर के खुद को मौका दे। उनका मानना है कि इससे हम 200 रन टी20 मैच में बना सकते हैं।
जिम्बाब्वे ने बुलावायो में बांग्लादेश को पहले टी20 मैच में 32 रनों से हराया और सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। मैच के बाद सिकंदर रजा ने कहा, "मुझे लगता है कि वर्ल्ड क्रिकेट आगे बढ़ गया है और मुझे लगता है कि जिम्बाब्वे 160-170 की बहुत अच्छी टीम रही है। अगर हम सुधार नहीं करते हैं और खुद को चैलेंज नहीं करते हैं और 200 तक पहुंचने की कोशिश करने के लिए खुद को अपस्किल नहीं करते हैं, तो मुझे लगता है कि हम बाकी दुनिया से पीछे रह जाएंगे।"
उन्होंने कहा, "इस विकेट पर 155 पार स्कोर था, लेकिन हमने 171 रन बनाए। आठ बैटर खिलाने के पीछे का कारण यह है कि एक बार जब आप सेट हो जाते हैं, तो आप किसी को निशाना बनाते हैं और ज्यादा निडर होते हैं, लेकिन साथ ही ज्यादा अकाउंटेबल भी होते हैं, लेकिन सबसे जरूरी बात, यह कॉन्फिडेंस रखें कि आप सेट हैं और आप वह बड़ा ओवर, वह 15 रन का ओवर और फिर एक और 15 रन का ओवर ले सकते हैं, ताकि आप हमेशा आगे रहें। ऐसे में आठ बल्लेबाजों को खिलाने का पूरा आइडिया यह है कि, एक, हम वर्ल्ड क्रिकेट की इंटेंसिटी से मैच करने के लिए थोड़ा और निडर क्रिकेट खेलें और यह भी कि हम ट्रेनिंग कर रहे हैं कि हमने एक बैटर के तौर खुद को अपस्किल किया है या नहीं।"
हमारे पास अच्छे ऑलराउंडर्स हैं- रजा
कप्तान रजा ने आगे कहा, "और दूसरी बात, मुझे लगता है कि हमारे पास बहुत अच्छे ऑलराउंडर हैं, लेकिन हम उन्हें उतना इस्तेमाल नहीं कर पाते, जितना मैं चाहता हूं, जैसे मिल्टन शुम्बा, जो अच्छी लेफ्ट-आर्म स्पिन बॉलिंग करते हैं। अगर वह बॉलिंग नहीं करते हैं, तो हमें कैसे पता चलेगा कि वह बढ़ रहे हैं या नहीं? रयान बर्ल, डियोन मायर्स, ब्रायन बेनेट, जिन्हें आज बॉलिंग नहीं मिली, लेकिन ये ऐसे लोग हैं जो T20 मैच में कुछ ओवर बॉलिंग कर सकते हैं। इसलिए मैं एक देश के तौर पर खुद पर काम पूरा करने का दबाव बनाना चाहता हूं, क्योंकि मुझे लगता है कि एक बार जब हम ऐसा कर लेंगे तो थोड़ी ज्यादा अकाउंटेबिलिटी होगी और हमारे काम को लेकर थोड़ा ज्यादा कॉन्फिडेंस और सेल्फ-बिलीफ होगा, चाहे वह हाथ में बैट हो या हाथ में बॉल। यही मेरी थ्योरी है।"



