सवाल- ‘विश्व कप जिताओगे?’ जवाब- भरोसा करोगे? सूर्या और ईशान किशन की उस बातचीत के बाद जो हुआ वो इतिहास है
कप्तान सूर्यकुमार यादव ने जब भारत की टी20 विश्व कप टीम में जगह की पुष्टि करने के लिए ईशान किशन को फोन किया था तो उनके पास इस आक्रामक विकेटकीपर बल्लेबाज से पूछने के लिए बस एक ही सवाल था- क्या तुम 'विश्व कप जिताओगे?' ईशान ने इसका जवाब एक सवाल से देते हुए सूर्यकुमार को कहा था कि क्या भरोसा करोगे?

कप्तान सूर्यकुमार यादव ने जब भारत की टी20 विश्व कप टीम में जगह की पुष्टि करने के लिए ईशान किशन को फोन किया था तो उनके पास इस आक्रामक विकेटकीपर बल्लेबाज से पूछने के लिए बस एक ही सवाल था- क्या तुम 'विश्व कप जिताओगे?'
ईशान ने इसका जवाब एक सवाल से देते हुए सूर्यकुमार को कहा था, ‘भरोसा करोगे?’
यह छोटी सी बातचीत सूर्यकुमार के 'हां' में जवाब देने के साथ खत्म हुई और ईशान ने टूर्नामेंट में 241 रन बनाए जिसमें रविवार को यहां फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ शानदार अर्धशतक भी शामिल है।
रविवार रात अहमदाबाद में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर भारत की खिताबी जीत के बाद मुस्कुराते हुए ईशान ने कहा, 'सूर्या भाई ने मुझे तब फोन किया जब टीम घोषित होने वाली थी। मैंने स्क्रीनशॉट भी ले लिया क्योंकि मुझे लग रहा था कि उन्होंने विश्व कप टीम के बारे में फोन किया है। उन्होंने मेरे से सीधे पूछा, 'विश्व कप जिताएगा?'
उन्होंने कहा, 'मैंने उनसे पूछा, 'भरोसा करोगे?' उन्होंने कहा 'हां' और बस इतनी ही बात हुई।'
हालांकि फाइनल से पहले की रात झारखंड के लिए खेलने वाले बिहार के इस खिलाड़ी के लिए आसान नहीं थी। वह एक बहुत बड़ी निजी त्रासदी से जूझ रहे थे।
ईशान ने बताया कि उन्हें कुछ दिन पहले ही एक दुर्घटना में अपनी रिश्ते की बहन की मौत के बारे में पता चला था। यह एक ऐसी खबर थी जो टूर्नामेंट के सबसे बड़े मुकाबले से पहले उनके दिमाग में बार-बार आ रही थी।
भावनात्मक उथल-पुथल के बारे में बात करते हुए ईशान ने कहा कि उन्होंने अपनी उथल-पुथल भरी भावनाओं को एकाग्र बल्लेबाजी में बदलने का फैसला किया।
ईशान ने कहा, ‘सच कहूं तो मैच से पहले मैं इस संबंध में बात करने के बारे में नहीं सोच रहा था लेकिन मैं कहूंगा। मेरी रिश्ते की बहन की कार दुर्घटना में मौत हो गई और मुझे कुछ दिन पहले इसके बारे में पता चला। वह हमेशा चाहती थी कि मैं काफी रन बनाऊं।’
उन्होंने कहा, ‘कल मैं अच्छा महसूस नहीं कर रहा था लेकिन आज एक बड़ा दिन था इसलिए अपनी भावनाओं को मैच से ऊपर रखने के बजाय मैंने सोचा कि सबसे अच्छी चीज जो मैं कर सकता हूं वह उसके लिए रन बनाना है।’
ईशान ने कहा कि अर्धशतक बनाने के बाद उन्हें राहत मिली कि वह अपनी दिवंगत बहन के लिए यह कर पाए।
उन्होंने कहा, ‘जब मैंने अर्धशतक बनाने के बाद ऊपर देखा तो वह उसके लिए था। मुझे बहुत गर्व है कि हम आज जीते। मुझे उसके परिवार के लिए दुख हो रहा है लेकिन मेरे करीबी दोस्त उनका ख्याल रखने के लिए वहां हैं।’
ईशान किशन ने जोर देते हुए कहा कि भारतीय ड्रेसिंग रूम सादगी और आपसी भरोसे पर टिका हुआ है।
उन्होंने कहा, ‘विश्व कप हमेशा एक बहुत बड़ा मंच होता है और दबाव और घबराहट होती है। लेकिन यहां काम साफ है, आपको बस सही शॉट चुनने हैं और चीजों को सामान्य रखना है।’
ईशान ने कहा, ‘जब आप इसे सामान्य रखते हैं तो खिलाड़ी के लिए यह आसान हो जाता है।’
उन्होंने सोच में स्पष्टता बनाए रखने के लिए टीम के अंदर के सहयोग की प्रणाली को भी श्रेय दिया।
उन्होंने कहा, ‘कोच और कप्तान ने सभी को आजादी दी और खिलाड़ियों पर कभी शक नहीं किया। जब आपको वह समर्थन मिलता है तो आप खुद खेल बदलना चाहते हैं।’
ईशान किशन के लिए पिछले कुछ साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से जुड़े शोर और उम्मीदों से अलग होना सीखने के रहे हैं।
उस सफर के बारे में सोचते हुए ईशान ने कहा कि उन्होंने अपनी जगह या भविष्य के बारे में अधिक सोचना बंद कर दिया है।
उन्होंने कहा, ‘सच कहूं तो पिछले दो वर्षों में मैंने सोचना बंद कर दिया है। मैं यह नहीं सोचता कि मैं कहां बल्लेबाजी करूंगा या कल टीम में रहूंगा या नहीं क्योंकि यह मेरे हाथ में नहीं है।’
ईशान ने कहा, ‘सबसे बड़ी चीज जो मैंने सीखी है वह है कि बस अपना काम करते रहना, कड़ी मेहनत करते रहना और नतीजे की चिंता नहीं करना।’
विराट कोहली जैसे सीनियर खिलाड़ियों से प्रेरणा लेते हुए किशन ने कहा कि उन्होंने अपनी ऊर्जा का प्रबंधन करना सीखा है।
उन्होंने कहा, ‘मैं विराट की बहुत सराहना करता हूं क्योंकि उन्होंने इतने वर्षों तक अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल किया है। मेरे लिए यह समझना जरूरी था कि मैं अपने आप में क्या बदल सकता हूं। कौशल ज्यादा नहीं बदलता इसलिए मैं अब बस अपना काम करता रहता हूं। मैंने अधिक सोचना बंद कर दिया है।’
लेखक के बारे में
Chandra Prakash Pandeyचन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।
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