‘वे महेंद्र सिंह धोनी की तरह शांत रहते थे, सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में कोई खराबी नहीं’, क्यों बोले गावस्कर?
सुनील गावस्कर ने सूर्यकुमार यादव की जगह श्रेयस अय्यर को कप्तान बनाए जाने के फैसले का स्वागत किया है। हालांकि, उन्होंने सूर्यकुमार यादव की कप्तानी की जमकर तारीफ की है और उनकी तुलना महेंद्र सिंह धोनी से की है। जानिए उन्होंने इस अहम फैसले के बाद क्या-क्या कहा है।

शनिवार, 6 जून को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने बड़ा फैसला लेते हुए टी-20 सेटअप से सूर्यकुमार यादव को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। भारत को वर्ल्ड कप जिताने के बाद अब सूर्यकुमार यादव ना तो भारत की कप्तानी करेंगे और ना ही टीम का हिस्सा होंगे। आज घोषित की गई चार टीमों में से किसी में सूर्यकुमार का नाम खिलाड़ी और कप्तान किसी भी रूप में नहीं है। ऐसे में अब इस निर्णय को लेकर पूरे क्रिकेट पंडितों में चर्चाओं का दौर जारी है। इसी कड़ी में भारतीय क्रिकेट के महान खिलाड़ियों में से एक सुनील गावस्कर ने भी अपनी राय रखी है।
फैसले का किया स्वागत
सुनील गावस्कर ने सूर्यकुमार यादव की जगह श्रेयस अय्यर को कप्तान बनाए जाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा है कि यह एक शानदार बदलाव है। कुछ समय पहले श्रेयस अय्यर को बीसीसीआई के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में भी शामिल नहीं किया था और आज वे भारतीय टीम के कप्तान हैं। गावस्कर का मानना है कि चयनकर्ताओं ने सही व्यक्ति को चुना है। उन्होंने कहा " मुझे लगता है कि उन्होंने सही व्यक्ति को चुना है और इसका एक साधारण कारण है कि कप्तानी की चिंताओं से प्रभावित हुए बिना श्रेयस अय्यर लगातार अच्छा प्रदर्शन बल्ले से भी करते रहे हैं।" गावस्कर के अनुसार, अय्यर के कप्तानी के क्रेडेंशियल्स अन्य दावेदारों से काफी बेहतर हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि अय्यर ने जिन भी आईपीएल फ्रेंचाइजी का नेतृत्व किया, उन्हें जीत दिलाई या फाइनल तक पहुंचाया। उन्होंने कहा, "जहां तक उनकी कप्तानी की योग्यता का सवाल है, वे आपके द्वारा बताए गए अन्य नामों की तुलना में बहुत बेहतर हैं।"
सूर्या को हटाए जाने के बताए संभावित कारण
सूर्यकुमार यादव को कप्तानी से हटाए जाने की संभावित वजहों पर बात करते हुए सुनील गावस्कर ने कहा कि सूर्या की कप्तानी में कोई कमी नहीं थी लेकिन उनकी फॉर्म खराब रही जो उनके टीम से बाहर होने और कप्तानी जाने का बड़ा कारण है। उन्होंने कहा, "उनकी कप्तानी में कुछ भी गलत नहीं है। मुझे लगता है कि उनके व्यक्तिगत फॉर्म की वजह से उन्हें टीम में शामिल नहीं किया गया है।" गावस्कर ने बताया कि चयन समिति 2027 और 2028 (ओलंपिक) के नए साइकल की ओर देख रही है। उन्होंने कहा, "नए साइकल के लिए आप उन खिलाड़ियों को रखना चाहते हैं जो दो साल बाद उपलब्ध होंगे। सूर्य कुमार की उम्र को देखते हुए, वे युवा खिलाड़ी (अय्यर) के साथ गए।"
सूर्या की धोनी से की तुलना, कामनेस को बताया विरासत
सुनील गावस्कर ने अहम निर्णय लिए जाने के बाद इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में सूर्यकुमार यादव की कप्तानी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा सूर्या महेंद्र सिंह धोनी की तरह शांत रहते थे और मैदान पर हमेशा मुस्कुराते रहते थे। उन्होंने कहा कि अपने शांत स्वभाव को बनाए रखना ऐसी चीज है जिसे वे एक विरासत के रूप में पीछे छोड़ेंगे।
लेखक के बारे में
Vimlesh Kumar Bhurtiyaविमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार
संक्षिप्त विवरण
विमलेश कुमार भुर्तिया पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।
विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव: विमलेश कुमार भुर्तिया भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक उभरता हुआ नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वह इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया की गतिशीलता, कार्यशैली और प्रकृति को समझने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि पाठक किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की रीढ़ होता है ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रकाशन होना चाहिए। यह पत्रकारिता को जीवंत रखता है और जर्नलिज्म का मूल गुण भी यही है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
विमलेश ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण की है। वे 2021-22 बैच के भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। उन्होंने इस नामी संस्थान से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है। इसके बाद उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में ही मास्टर्स यानी (M.A) की डिग्री भी हासिल की है। इन्होंने अपना ग्रेजुएशन मध्य प्रदेश के नामचीन साइंस कॉलेजों में से एक होलकर साइंस कॉलेज से किया है। ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही विमलेश की दिलचस्पी साहित्य और पत्रकारिता की ओर जागृत होने लगी थी। यही कारण था कि ग्रेजुएशन के दिनों में ही उन्होंने दैनिक चैतन्यलोक नामक इंदौर की क्षेत्रीय पत्रिका में काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उन्होंने दैनिक भास्कर में बतौर कॉपी एडिटर ट्रेनिंग ली। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग से मास मीडिया में इंटर्नशिप की। विमलेश कुमार भुर्तिया को कंप्यूटर का भी अच्छा ज्ञान है। उन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा किया है।
खेल पत्रकारिता और पत्रकारिता का उद्देश्य
विमलेश खेल से जुड़ी तमाम तरह की स्टोरीज पाठकों तक पहुंचाते हैं, जिनमें तथ्यों की स्पष्टता होती है और सकारात्मक विश्लेषण भी शामिल होता है। ये क्रिकेट की दुनिया का अच्छा ज्ञान रखते हैं और राजनीति में गहरी दिलचस्पी है। राजनीति और क्रिकेट में घट रही घटनाओं का विश्लेषण करना उनकी तह तक जाना विमलेश को पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी तथ्यपरकता (Fact-checking) है। चाहे वह चकाचौंध से भरा क्रिकेट जगत हो या अन्य खेल और खिलाड़ियों का जीवन। बतौर खेल पत्रकार यह कसौटी हर वक्त बनी रहनी चाहिए कि लेखन हमेशा प्रमाणिक हो। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य पाठकों को न केवल सूचित करना है, बल्कि उन्हें सही और सुरक्षित जानकारी के माध्यम से सशक्त बनाना भी है। पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य सूचना, शिक्षा और मनोरंजन होता है और इन्हीं उद्देश्यों को पूरा करना एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए।



