1983 के वर्ल्ड कप स्टार को किस बात से विराट कोहली पर आई दया? रविंद्र जडेजा पर हुए लाल
भारत को पहली बार वर्ल्ड कप जिताने वाली टीम के अहम सदस्य, पूर्व कप्तान और पूर्व मुख्य राष्ट्रीय चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत भारतीय टीम के प्रदर्शन से बहुत नाखुश हैं। उन्हें तो अब विराट कोहली पर दया आ रही है। इसके साथ ही उन्होंने रविंद्र जडेजा को वनडे टीम में रखे जाने पर सवाल उठाया है।

भारत को पहली बार वर्ल्ड कप जिताने वाली टीम के अहम सदस्य, पूर्व कप्तान और पूर्व मुख्य राष्ट्रीय चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत भारतीय टीम के प्रदर्शन से बहुत नाखुश हैं। न्यूजीलैंड की एक कम अनुभवी टीम, जिसके ज्यादातर सदस्यों के पास भारत दौरे का कोई पूर्व अनुभव नहीं था, ने भारत को उसी के घर में वनडे सीरीज में 2-1 से हरा दिया। पहली बार न्यूजीलैंड ने भारत में कोई वनडे सीरीज अपने नाम की। तीसरे और निर्णायक मैच में चेज मास्टर विराट कोहली ने शानदार शतक जड़ा लेकिन वो व्यर्थ गया। श्रीकांत को तो अब विराट कोहली पर दया आ रही है। इसके साथ ही उन्होंने रविंद्र जडेजा को वनडे टीम में रखे जाने पर सवाल उठाया है। उन्होंने भारत की हार का ठीकरा जडेजा पर सिर पर फोड़ा है।
'रविंद्र जडेजा अब भी ODI क्यों खेल रहे?'
श्रीकांत ने हैरानी जताई कि रविंद्र जडेजा का भारत की ओडीआई टीम में चुना जाना क्यों जारी है। स्टार ऑलराउंडर जडेजा लंबे समय से वनडे में बहुत लचर प्रदर्शन कर रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के खिलाफ खेल गए पिछले 6 मैच में उन्होंने सिर्फ 1 विकेट हासिल किया है। बल्लेबाजी की बात करें तो इन 6 पारियों में उनके बल्ले से सिर्फ 99 रन ही निकले हैं। रविवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे और निर्णायक मैच में अगर विराट कोहली को रविंद्र जडेजा का भी अच्छा साथ मिला होता तो तस्वीर कुछ अलग हो सकती थी।
श्रीकांत ने रविंद्र जडेजा के अतीत में दिए योगदान को सराहा लेकिन लंबे समय से उनके औसत से भी नीचे प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए।
श्रीकांत ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, ‘रविंद्र जडेजा 2023 के वर्ल्ड कप में साइलेंट किलर थे। ये सच है कि उनमें अब वो वाला उत्साह नहीं दिखता जो उस टूर्नामेंट के दौरान दिखा था।’
कोहली पर दया आती है: श्रीकांत
रविंद्र जडेजा के टीम में बने रहने पर सवाल उठाते हुए श्रीकांत ने कहा कि उन्हें विराट कोहली पर दया आती है। वह आखिर कितने मैचों में स्कोर बनाते रहेंगे। पूर्व कप्तान ने कहा, 'मुझे विराट कोहली पर दया आती है। वह किने मैचों में स्कोर बनाएगा? अगर सिर्फ कोहली को ही स्कोर करना है तो इस तरह भारत कितने मैच जीत पाएगा?'
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श्रीकांत ने कहा, 'भारत मैच जीतने के लिए एक व्यक्ति पर निर्भर हो रहा है। साफ-साफ कहें तो न्यूजीलैंड की टीम में बहुत अच्छे गेंदबाज नहीं थे। लेकिन देखिए जायडेन लेनेक्स ने कैसे 10 ओवर फेंके, 42 रन देकर 2 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए। फोल्क्स महंगे रहे लेकिन विकेट लिए। काइल जेमिसन ने शुभमन गिल को आउट करने के लिए खतरनाक गेंद फेंकी। क्रिस्टियन क्लार्क ने भी अच्छी गेंदबाजी की।'
लेखक के बारे में
Chandra Prakash Pandeyचन्द्र प्रकाश पाण्डेय, असिस्टेंट एडिटर
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।
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