तिलक वर्मा का टीम में क्या काम है? इतना नीचे बल्लेबाजी करने क्यों भेज रही है टीम मैनेजमेंट, सवालों के घेरे में

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इंग्लैंड और आयरलैंड सीरीज में तिलक वर्मा के बल्ले से रन नहीं निकले हैं। आयरलैंड केे खिलाफ उन्होंने एक फिफ्टी जड़ी और पूरी सीरीज में कुल 74 रन बनाए। इंग्लैंड के खिलाफ तीन पारियों में अब तक सिर्फ 48 रन ही बना पाए हैं। ऐसे में सवाल है कि टीम मैनेजमेंट उन्हें इतना नीचे बैटिंग क्यों करा रही। 

Tilak varma

भारत और आयरलैंड के बीच हुई 2 मैचों की सीरीज के बाद इंग्लैंड के खिलाफ हो रही पांच मैचों की सीरीज में भारतीय उप कप्तान तिलक वर्मा सवालों के घेरे में हैं। उनके बल्ले से या तो रन नहीं निकल रहे हैं या बहुत धीमी गति से निकल रहे हैं। इन दोनों सीरीजों में तिलक वर्मा की फॉर्म बिल्कुल नहीं रही है। तिलक वर्मा ने आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों में 74 रन बनाए। पहले मैच में उन्होंने 21 गेंदों में 19 रन बनाए, उसके बाद दूसरे मुकाबले में 46 गेंदों में 55 रनों की पारी खेली। इंग्लैंड सीरीज में उनका और बुरा हाल रहा। उन्होंने पांच मैचों की इस सीरीज में अब तक चार मुकाबले खेले हैं, जिसकी तीन पारियों में बल्लेबाजी करने का मौका मिला है। इस दौरान तिलक वर्मा ने कुल 48 रन बनाए हैं। बारिश से प्रभावित पहले मैच में उन्हें बल्लेबाजी करने का मौका नहीं मिला था। दूसरे मुकाबले में तिलक ने 13 गेंदों में 13 रन बनाए थे। तीसरे मुकाबले में उन्होंने 16 गेंदों में 24 रन बनाए थे। चौथे मुकाबले में उन्होंने 8 गेंदों में 11 रन बनाए और पवेलियन लौट गए।

लोअर ऑर्डर तिलक वर्मा को नहीं कर रहा सूट

इस सीरीज में तिलक वर्मा को फिनिशर की भूमिका दी गई है और नीचे 6 या 7 नंबर पर बल्लेबाजी करने आ रहे हैं। बल्लेबाजी क्रम कोई निश्चित नहीं है, लेकिन उन्हें पांच नंबर से नीचे ही पिछली दो सीरीजों में श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भेजा जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि उन्हें इतने नीचे क्यों बल्लेबाजी करने भेजा जा रहा है, जब वे फिनिशर के रूप में अच्छी बल्लेबाजी बहुत कोशिश करने के बाद भी नहीं कर पा रहे हैं। यह भी आंकड़ा है कि तिलक वर्मा ने अपने टी-20 अंतरराष्ट्रीय करियर में अब तक कुल 55 मैचों की 52 पारियों में बल्लेबाजी करते हुए 42 की औसत और 142.16 की स्ट्राइक रेट के साथ कुल 1514 रन बनाए हैं। इनमें से ज्यादातर रन उन्होंने नंबर तीन और नंबर चार पर बल्लेबाजी करते हुए बनाए हैं। सूर्यकुमार यादव ने तिलक वर्मा के लिए अपना तीन नंबर का स्पॉट भी दे दिया था। ऐसे में सवाल यह है कि जब टीम मैनेजमेंट तिलक वर्मा को ठीक से टॉप आर्डर में यूटिलाइज ही नहीं कर रही है तो लोअर आर्डर में अडजस्ट करने का क्या फायदा। इससे ना तो टीम को लाभ हो रहा है और खिलाड़ी की प्रतिभा पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

नंबर 3 और नंबर 4 पर हैं कमाल के आंकड़े

तिलक वर्मा ने टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बल्लेबाजी करते हुए नंबर तीन पर 20 पारियों में 46.35 की औसत और 151 की स्ट्राइक रेट के साथ कुल 649 रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने दो शतक और तीन अर्धशतक जड़े हैं। साल 2024 के आखिर में दक्षिण अफ्रीका की सरजमीं पर उन्होंने बैक टू बैक शतक जड़े थे। इस दौरान 120 उनका सर्वोच्च स्कोर है। तिलक वर्मा ने नंबर 4 पर 14 पारियों में बल्लेबाजी की है। लेफ्ट राइट कॉम्बिनेशन के कारण बहुत बार ऐसा हुआ कि अगर सलामी बल्लेबाज लेफ्टी आउट हुआ तो तिलक वर्मा नंबर तीन पर जाते थे और अगर दाएं हाथ का बल्लेबाज आउट हुआ तो सूर्यकुमार यादव नंबर तीन पर जाते थे। ऐसी दशा में तिलक वर्मा को नंबर चार पर खेलना पड़ता था। नंबर चार पर बल्लेबाजी करते हुए तिलक वर्मा ने 14 पारियों में 54.44 की औसत और 142 की स्ट्राइक रेट के साथ कुल 490 रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने 2 अर्धशतक जड़े। नंबर 5, 6 या 7 पर बल्लेबाजी करते हुए तिलक वर्मा की फॉर्म डिप हो गई। इन पोजीशन पर उन्होंने 18 पारियों में 29 की औसत और 144 की स्ट्राइक रेट के साथ कुल 376 रन बनाए हैं, जिसमें दो अर्धशतक शामिल हैं।

Vimlesh Kumar Bhurtiya

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Vimlesh Kumar Bhurtiya

विमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार

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विमलेश कुमार भुर्तिया पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

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परिचय और अनुभव: विमलेश कुमार भुर्तिया भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक उभरता हुआ नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वह इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया की गतिशीलता, कार्यशैली और प्रकृति को समझने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि पाठक किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की रीढ़ होता है ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रकाशन होना चाहिए। यह पत्रकारिता को जीवंत रखता है और जर्नलिज्म का मूल गुण भी यही है।

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