इंग्लैंड से सेमीफाइनल से पहले भारत के गेंदबाजी कोच मोर्नी मोर्कल वानखेड़े में किस चीज से चिंतित?
भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच मोर्नी मोर्केल ने वानखेड़े की पिच को लेकर अपना आंकलन बताया है। उन्होंने कहा कि पिच पर अतिरिक्त उछाल हो सकती है। इसके साथ ही मोर्कल ने ओस को एक बड़ी चिंता करार दिया। ऐसे में टॉस की भूमिका काफी अहम हो सकती है।

मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 विश्व कप सेमीफाइनल के लिए तैयार है। भारत को घरेलू परिस्थितियों का लाभ मिलने की संभावना है। इस बीच भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच मोर्नी मोर्केल ने वानखेड़े की पिच को लेकर अपना आंकलन बताया है। उन्होंने कहा कि पिच पर अतिरिक्त उछाल हो सकती है। इसके साथ ही मोर्कल ने ओस को एक बड़ी चिंता करार दिया। ऐसे में टॉस की भूमिका काफी अहम हो सकती है।
वानखेड़े में अक्सर बल्लेबाजों के बड़े-बड़े शॉट देखने को मिलते हैं और इसे बल्लेबाजी के लिए अनुकूल माना जाता है। पिच और ड्यू फैक्टर को लेकर मोर्कल ने कहा, ‘मुझे लगता है कि ओस हमेशा से एक बड़ी चिंता रही है। लेकिन ये एक ऐसी चीज है जिसे आप नियंत्रित नहीं कर सकते- टॉस को आप कंट्रोल नहीं कर सकते। मैं समझता हूं कि वानखेड़े में हमशा से थोड़ी अतिरिक्त उछाल होती है।’
भारत के गेंदबाजी कोच ने कहा, 'हमारे गेंदबाज बाउंस पर भरोसा कर सकते हैं और सही लाइन से इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। मुझे लगता है कि यहां मार्जिन बहुत कम होगा। ये ग्राउंड छोटा है।'
मोर्कल ने कहा कि बल्लेबाजों के लिए मदद का मतलब ये नहीं कि गेंदबाजों के लिए कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हर गेंद पर प्रतिस्पर्धा करनी होगी। इस पिच पर बल्लेबाजी की ताकत ही उसकी कमजोरी भी हो सकती है। इसलिए बहुत ज्यादा रक्षात्मक होने की जरूरत नहीं है। आक्रामक गेंदबाजी करते रहिए क्योंकि मौके आ सकते हैं।’
सेमीफाइनल में भारत उम्मीद करेगी कि इंग्लैंड के खिलाफ उसे लक्ष्य का पीछा करने को मिले। इसकी वजह ये है कि इंग्लैंड ने मुश्किल लक्ष्यों का भी सफलता से पीछा करने की काबिलियत रखती है। उसने पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के खिलाफ लगातार इस तरह का प्रदर्शन किया।
टी20 विश्व कप के इतिहास में भारत और इंग्लैंड की टीमें तीसरी बार सेमीफाइनल में भिड़ने जा रही हैं। इससे पहले 2022 और 2024 में भी दोनों टीमें सेमीफाइनल में आपस में भिड़ चुकी हैं। संयोग से दोनों टीमों के बीच इससे पहले हुए दोनों सेमीफाइनल में जिस भी टीम ने जीत हासिल की, उसने फाइनल भी फतह किया। 2022 में इंग्लैंड ने भारत को सेमीफाइनल में हराया था और बाद में पाकिस्तान को फाइनल में हराकर विश्व कप पर कब्जा किया था। उसके अगले ही विश्व कप में भारत और इंग्लैंड एक बार फिर सेमीफाइनल में आमने-सामने थे। तब भारत ने इंग्लैंड को हराया और फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को शिकस्त देकर विश्व कप अपने नाम किया था। इस बार ये देखना भी दिलचस्प रहेगा कि भारत बनाम इंग्लैंड के सेमीफाइनल की विजेता टीम के विश्व कप जीतने का ट्रेंड बरकरार रहता है या नहीं।
लेखक के बारे में
Chandra Prakash Pandeyचन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।
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