हम यहां स्कूली बच्चों में आ गए; PSL कप्तानों की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बचकानी हरकत से बाकी कैप्टन पर भड़क गए डेविड वॉर्नर
बुधवार को पीएसएल के कप्तानों की एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। उसमें कप्तानों की बचकाना हरकतों से ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज डेविड वॉर्नर इतने खफा हुए कि कह दिया कि यहां हम स्कूली बच्चों के बीच में हैं। दरअसल जब वह प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे तब बाकी कप्तान आपस में बात कर रहे थे और हंस रहे थे।

पाकिस्तान सुपर लीग गुरुवार को शुरू होने जा रहा है। तेल संकट की वजह से स्टेडियम में एक भी दर्शक नहीं होगा। अपने चुटीले सोशल पोस्ट के लिए चर्चित आइसलैंड क्रिकेट ने इस पर मजे लेते हुए PSL को 'पेट्रोल शॉर्टेज लीग' बताया है। खैर, ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से पैदा हुआ तेल संकट का मुद्दा अलग है लेकिन पीएसएल लगातार नकारात्मक खबरों की वजह से चर्चा में है। कुछ खिलाड़ियों ने पीएसएल से करार को ठेंगा दिखाकर आईपीएल का रुख कर लिया है। इस बीच बुधवार को पीएसएल के कप्तानों की एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। उसमें कप्तानों की बचकाना हरकतों से ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज डेविड वॉर्नर इतने खफा हुए कि कह दिया कि यहां हम स्कूली बच्चों के बीच में हैं।
डेविड वॉर्नर पीएसएल की टीम कराची किंग्स के कप्तान हैं। बुधवार को प्री-टूर्नामेंट कैप्टन्स प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी गई थी। उसमें वॉर्नर के अलावा लाहौर कलंदर्स के कप्तान शाहीन शाह अफरीदी, रावलपिंडिज के कप्तान मोहम्मद रिजवान, पेशावर जल्मी के बाबर आजम, क्वेटा ग्लेडिएटर्स के सौद शकील और हैदराबाद किंग्समेन के कप्तान मार्नस लाबुसाने मौजूद थे।
जब डेविड वॉर्नर बोल रहे थे तब बाकी टीमों के कप्तान आपस में ही गपशप करते दिखे और न जाने किस बात पर हंस रहे थे।
कप्तानों का ये रवैया वॉर्नर को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा। सवाल का जवाब देते-देते वह अचानक रुक गए। कहा, ‘क्या गड़बड़ है? सॉरी जेंटलमेन, हमें यहां स्कूल बच्चे मिले हैं।’
पाकिस्तान सुपर लीग 26 मार्च से शुरू होकर 3 मई तक चलेगा। उद्घाटन मैच लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में लाहौर कलंदर्स और हैदराबाद किंग्समेन के बीच खेला जाएगा। लाहौर कलंदर्स ने पिछली बार फाइनल में क्वेटा ग्लेडिएटर्स को हराकर खिताब जीता था। ऐसे में टीम के सामने खिताब की रक्षा की चुनौती होगी।
ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से पैदा हुए तेल संकट की मार इस टूर्नामेंट पर भी पड़ा है। PSL के मैच खाली स्टेडियम में कराए जाएंगे और वेन्यू भी 6 के बजाय सिर्फ दो रखे गए हैं। सारे मैच या तो लाहौर या कराची में कराए जाएंगे।
अभूतपूर्व तेल संकट के मद्देनजर पाकिस्तान सरकार पहले ही लोगों से जितना संभव हो सके, यात्रा से बचने की अपील की है। स्कूल और संस्थान बंद हैं ताकि तेल की खपत घट सके। ईद की छुट्टियां बढ़ा दी गई थीं ताकि तेल बचे। सरकार के निर्देश के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने बिना दर्शकों के खाली स्टेडियमों में पीएसएल के मैच कराने की घोषणा की है। जो टिकट पहले ही बिक चुके थे, उसके पैसे संबंधित लोगों को लौटाए जाएंगे। उद्घाटन समारोह तक को रद्द कर दिया गया है।
लेखक के बारे में
Chandra Prakash Pandeyचन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।
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