
विदर्भ ने पहली बार विजय हजारे ट्रॉफी का खिताब जीत रचा इतिहास; सौराष्ट्र को 38 रनों से हराया
विजय हजारे ट्रॉफी एलीट 2025-26 के रोमांचक फाइनल में विदर्भ ने इतिहास रचते हुए पहली बार खिताब पर कब्जा किया है। बेंगलुरु के बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ग्राउंड 1 में खेले गए इस खिताबी मुकाबले में विदर्भ ने सौराष्ट्र को 38 रनों से हराकर अपनी पहली सफेद गेंद की घरेलू ट्रॉफी जीती।
विजय हजारे ट्रॉफी एलीट 2025-26 के रोमांचक फाइनल में विदर्भ ने इतिहास रचते हुए पहली बार खिताब पर कब्जा किया है। बेंगलुरु के बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ग्राउंड 1 में खेले गए इस खिताबी मुकाबले में विदर्भ ने सौराष्ट्र को 38 रनों से हराकर अपनी पहली सफेद गेंद की घरेलू ट्रॉफी जीती। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी विदर्भ की टीम ने अथर्व तायदे के शानदार शतक और उनकी यश राठौड़ के साथ हुई 133 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की बदौलत निर्धारित 50 ओवरों में 317/8 का विशाल स्कोर खड़ा किया। बड़े फाइनल में बोर्ड पर बड़ा स्कोर हमेशा निर्णायक साबित होता है और विदर्भ के गेंदबाजों ने इस दबाव का बखूबी फायदा उठाया।
318 रनों के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करने उतरी सौराष्ट्र की शुरुआत बेहद खराब रही, जब विदर्भ के नई गेंद के गेंदबाजों यश ठाकुर और नचिकेत भूते ने सलामी बल्लेबाजों को जल्दी आउट कर मैच पर पकड़ बना ली। इसके बाद प्रेरक मांकड़ ने एक छोर संभाले रखा और चिराग जानी के साथ मिलकर पारी को गति देने की कोशिश की, जिससे सौराष्ट्र की उम्मीदें एक समय तक कायम रहीं। हालांकि, मैच का टर्निंग पॉइंट तब आया जब कप्तान हर्ष दुबे ने प्रेरक मांकड़ को 88 रनों के निजी स्कोर पर आउट कर इस खतरनाक होती साझेदारी को तोड़ा। चिराग जानी ने संघर्ष जारी रखा, लेकिन वे भी 45वें ओवर में आउट हो गए, जिसके बाद सौराष्ट्र की पारी लड़खड़ा गई।
विदर्भ की इस ऐतिहासिक जीत में उनके तेज गेंदबाजों की तिकड़ी का दबदबा रहा। यश ठाकुर, नचिकेत भूते और दर्शन नालकंडे ने मिलकर कुल 9 विकेट चटकाए, जिसने सौराष्ट्र के मध्यक्रम और निचले क्रम को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। अंतिम ओवरों में नचिकेत भूते ने धर्मेंद्रसिंह जडेजा (8) का विकेट लेकर सौराष्ट्र की अंतिम उम्मीदें भी खत्म कर दीं। मैच का समापन बेहद नाटकीय रहा जब यश ठाकुर ने चेतन सकारिया को एलबीडब्ल्यू (LBW) आउट किया। अंपायर ने पहले इसे नॉट आउट दिया था, लेकिन हर्ष दुबे के सटीक रिव्यू (DRS) के बाद निर्णय बदल दिया गया और सौराष्ट्र की टीम 279 रनों पर सिमट गई।
यह जीत विदर्भ क्रिकेट के लिए एक मील का पत्थर है, क्योंकि लाल गेंद के क्रिकेट में दबदबा बनाने के बाद यह उनकी पहली सीमित ओवरों की ट्रॉफी है। पिछले सीजन में कर्नाटक के खिलाफ फाइनल में मिली हार के बाद टीम ने हार नहीं मानी और इस बार खिताबी जीत दर्ज की। मैदान पर खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ का जश्न उनके वर्षों के परिश्रम और अटूट विश्वास को बयां कर रहा था। इस सामूहिक गेंदबाजी प्रयास और शीर्ष क्रम की मजबूत बल्लेबाजी ने साबित कर दिया कि विदर्भ अब सफेद गेंद के क्रिकेट में भी एक नई महाशक्ति के रूप में उभर चुका है।






