ऐसे कोई वैभव सूर्यवंशी नहीं बन जाता, पिता ने त्याग और संघर्ष की पेश की ऐसी मिसाल, बच्चे के सपने के लिए बेची पैतृक जमीन
वैभव सूर्यवंशी के पिता संजीव ने अपने बेटे के क्रिकेट करियर के लिए अपनी पैतृक जमीन तक बेच दी थी। हालांकि उनका ये त्याग सफल हुआ और अब उन्हें उनके बेटे के दम पर जो सम्मान देश विदेश में मिल रहा है, उससे वह खुश हैं।

वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में वह मुकाम हासिल कर लिया है, जिसकी उनकी उम्र के साथी सिर्फ कल्पना कर सकते हैं। 15 साल की उम्र में वह करोड़ों रुपये कमा रहे हैं और जल्द ही भारत की सीनियर टीम के लिए खेलते हुए नजर आएंगे, ये वो सपना है. जिसे हर खिलाड़ी/एथलीट अपने करियर में साकार होते हुए देखना चाहता है। हालांकि भारत जैसे देश में अपनी एक अलग पहचान बनाने का सफर काफी मुश्किलों से भरा रहता है। वैभव सूर्यवंशी ने अपनी मेहनत और लगन से अपने परिवार और खुद का सपना साकार किया है लेकिन वैभव को इस मुकाम तक पहुंचाने में उनके पिता ने काफी संघर्ष किया और अपना सब कुछ दांव पर लगाने से भी पीछे नहीं हटे। यहां तक कि जब उन्हें अपनी पुरखों की जमीन को बेचने की नौबत आई तो भी वह अडिग रहे और अपने बच्चे के सपने के आगे उसे भी त्याग दिया।
सपना सच हो गया
वैभव सूर्यवंशी के पिता संजीव ने टीओआई से बातचीत में वैभव सूर्यवंशी के करियर और उनको खिलाड़ी बनाने के दौरान हुए अनुभवों को शेयर किया है। उन्होंने कहा, ''अब सब चीज उससे ऊपर आ गया है। सपने सच हो गया है। अब जमीन, पैसा, रुपया का कोई महत्व नहीं है। जो सम्मान मिल रहा है, देश विदेश में नाम हो रहा है, उससे हम बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा कि सपना सच हो गया है। अब जमीन और पैसा का महत्व नहीं रह गया। भारत और विदेशों में उन्हें जो सम्मान और पहचान मिल रही है, उससे हमें बहुत खुशी होती है।''
15 साल की उम्र में ही वैभव सूर्यवंशी ने इंटरनेशनल स्तर तक पहचान बना ली है। वह भारत के उभरते हुए सितारें हैं और आगे चलकर अगर वह इसी अंदाज में खेलते रहे तो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में उनकी गिनती होनी तय है। हाल ही में समाप्त हुए आईपीएल में उन्होंने कई अवॉर्ड जीते। वह टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे। उनकी आक्रामक बैटिंग ने चयनकर्ताओं का भी ध्यान खींचा और उन्हें तीन टीमों में जगह दी गई। वैभव सूर्यवंशी आगामी कुछ महीनों में आयरलैंड, इंग्लैंड और एशियाई खेलों में भारतीय जर्सी में खेलते हुए नजर आएंगे।
वैभव के पिता ने 4 साल की उम्र में ही अपने बच्चे के अंदर की प्रतिभा पहचान ली थी। प्लास्टिक गेंद से खेलते समय वैभव के बल्ले के स्ट्रोक और टाइमिंग ने उनको प्रभावित किया। जिसके बाद वह अपने बेटे का क्रिकेट में करियर बनाने के लिए पटना में एक कोचिंग से जुड़े। हालांकि समस्तीपुर से पटना का सफर थका देने वाला था और खर्चीला भी था। लेकिन वैभव के पिता ने इसे थोड़ा आसान बनाने के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन बेचकर कार खरीदी। जिससे वह अपने बेटे को लेकर जाया करते थे। वैभव के करियर को बनाने में उन्होंने जो त्याग किया, उसके बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ''कोई पछतावा नहीं है। वैभव जो भी हासिल कर रहा है, वो सब चीजों से बहुत ऊपर है। बचपन से बहुत मेहनत किया है। इसीलिए मेहनत किया था कि देश के लिए खेले। आज उसे वो सौभाग्य मिला है।''
सूर्यवंशी ने इंडियन प्रीमियर लीग में दमदार प्रदर्शन के साथ पिछले दो बार की विश्व कप विजेता भारतीय टी20 टीम में जगह बनाई है। उनके शामिल होने से तीन बार की विजेता टीम और मजबूत हो गई है। अब वह 50 ओवर के प्रारूप में भी अपनी प्रतिभा दिखाने को तैयार हैं, जहां श्रीलंका ए और अफगानिस्तान ए के गेंदबाजों के सामने उन्हें रोकने की चुनौती होगी। श्रीलंका ए के खिलाफ वैभव कमाल नहीं दिखा सके थे लेकिन अफगानिस्तान ए मैच में उन्होंने 22 गेंद में ताबड़तोड़ 44 रन बनाए।
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Himanshu Singhहिमांशु सिंह (कंटेंट प्रोड्यूसर)
हिंमांशु सिंह पिछले 6 वर्षों से खेल पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं।
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हिमांशु सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। इन्हें हिंदी पत्रकारिता में करीब 6 साल का अनुभव है। इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई आईएमएस (नोएडा) से की है। 2017 में पंचायती टाइम्स वेबसाइट में बतौर ट्रेनी खेल पत्रकारिता का पहला अनुभव हासिल किया। 2018 में स्पोर्ट्स कंटेंट राइटर के तौर पर ईटीवी से जुड़े। यहां पर करीब तीन साल काम करने के बाद इनसाइडस्पोर्ट्स से जुड़े। यहां पर एक साल तक रहे। उन्होंने 2022 में लाइव हिन्दुस्तान के साथ अपनी पारी की शुरुआत की थी। खेल की बारीकियों को समझने और उन्हें पाठकों तक रोचक अंदाज में पहुंचाने में उन्हें महारत हासिल है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि : हिमांशु ने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईएमएस (नोएडा) से पूरी की है। खेल के प्रति उनके जुनून ने उन्हें करियर की शुरुआत में ही खेल पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया। उन्होंने 2017 में 'पंचायती टाइम्स' वेबसाइट में बतौर ट्रेनी अपने करियर का पहला कदम रखा, जहां उन्होंने खेल रिपोर्टिंग की बुनियादी बारीकियां सीखीं।
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