इंतजार खत्म, कल से मैदान पर होंगे वैभव सूर्यवंशी; मगर एक नहीं, दोहरी चुनौती

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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23 अगस्त यानी रविवार से दलीप ट्रॉफी का आगाज हो रहा है। इस टूर्नामेंट में 6 जोन की टीमें हिस्सा ले रही हैं। 15 वर्षीय युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी भी टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे हैं। उनके सामने दोहरी चुनौती होगी।

Vaibhav Sooryavanshi
दलीप ट्रॉफी में वैभव सूर्यवंशी के सामने दोहरी चुनौती

23 अगस्त यानी रविवार से दलीप ट्रॉफी का आगाज हो रहा है। इस टूर्नामेंट में 6 जोन की टीमें हिस्सा ले रही हैं। 15 वर्षीय युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी भी टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे हैं। वे सिर्फ एक खिलाड़ी के तौर पर नहीं, बल्कि एक लीडर के रूप में भी मैदान पर होंगे। उन्हें ईस्ट जोन का उप-कप्तान बनाया गया है। उनकी टीम के कप्तान ईशान किशन हैं। इस टूर्नामेंट में वैभव सूर्यवंशी के सामने दोहरी चुनौती होगी। पहली तो यही कि वे रेड बॉल में कितना अपना दम दिखा पाते हैं, कितना खुद को साबित कर पाते हैं। और दूसरी चुनौती उनके लीडरशिप रोल की भी होगी।

वैभव सूर्यवंशी के सामने दोहरी चुनौती

वैभव सूर्यवंशी का युवा करियर इतनी तेजी से आगे बढ़ा है कि लगभग हर नया असाइनमेंट एक और मील का पत्थर साबित हुआ है। उन्होंने 15 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया। भारत के लिए सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले क्रिकेटर बने। आईपीएल के एक सीजन में रनों की बौछार के बाद इंग्लैंड में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका परिचय हुआ। यह सीरीज वैभव के लिए चुनौतीपूर्ण रही। फिर जिम्बाब्वे में उन्होंने प्लेयर ऑफ द सीरीज का खिताब जीता। हालांकि, रविवार को एक बिल्कुल अलग तरह की परीक्षा होगी। जब ईस्ट जोन बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ दलीप ट्रॉफी अभियान शुरू करेगा, तो सूर्यवंशी न केवल सीनियर रेड-बॉल क्रिकेट में अपनी जगह बनाने की कोशिश करने वाले बल्लेबाज के रूप में मैदान पर उतरेंगे, बल्कि 15 साल की उम्र में वह मोहम्मद शमी, मुकेश कुमार, अभिमन्यु ईश्वरन और कप्तान ईशान किशन जैसे खिलाड़ियों से सजी टीम के उप-कप्तान के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। ये दोनों काम चुनौतीपूर्ण होंगे।

तैयारी के साथ उतरेंगे वैभव

वैभव सूर्यवंशी को ईस्ट जोन का उप-कप्तान बनाया जाना इस बात का साफ संकेत है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और चनयकर्ता उन्हें लंबी रेस के लिए देख रहे हैं। इस वजह से दलीप ट्रॉफी वैभव के लिए एक परीक्षा बन जाती है कि व्हाइट बॉल क्रिकेट में उनकी असाधारण सफलता रेड बॉल कितनी तब्दील हो पाती है। इस चुनौती के लिए वैभव सूर्यवंशी तैयार हैं। उन्होंने रेड बॉल क्रिकेट की प्रैक्टिस भी शुरू कर दी थी। जिम्बाब्वे से लौटने के बाद इस युवा खिलाड़ी ने नागपुर स्थित राजस्थान रॉयल्स के परफॉर्मेंस सेंटर में 10 दिवसीय शिविर में हिस्सा लिया। वहां उन्होंने सिर्फ अपने विस्फोटक शॉट्स नहीं खेले, बल्कि इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि गेंद को रक्षात्मक अंदाज में कैसे खेलना है और स्टंप्स से बाहर जाती गेंदों को छोड़ना कैसे है।

रेड बॉल और व्हाइट बॉल के आंकड़ों में अंतर

सूर्यवंशी ने अपनी तैयारियों के दौरान एक वीडियो शेयर किया था। जिसका शीर्षक तैयारी था। इस प्रशिक्षण वीडियो में बाएं हाथ के बल्लेबाज को आक्रामक खेल के साथ-साथ अधिक नियंत्रित रक्षात्मक रणनीति अपनाते हुए दिखाया गया। यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि व्हाइट बॉल क्रिकेट में सूर्यवंशी को मिली सफलता और प्रथम-श्रेणी क्रिकेट में उनके रिकॉर्ड में काफी अंतर है। उन्होंने आठ प्रथम श्रेणी मैच खेले हैं और 17.25 के औसत से 207 रन बनाए हैं, जिसमें केवल एक अर्धशतक शामिल है। ये आंकड़े उस युवा खिलाड़ी के सामने लगभग बेमेल लगते हैं जिसने आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में गेंदबाजी आक्रमणों को ध्वस्त कर दिया है। उनके हालिया अंतरराष्ट्रीय अनुभव ही उनके सीखने की प्रक्रिया को दर्शाते हैं। सूर्यवंशी ने इंग्लैंड में 14, 13 और 15 रन बनाकर अपने भारतीय करियर की शुरुआत की। कुछ हफ्तों बाद, जिम्बाब्वे में उन्होंने दो अर्धशतक लगाकर शानदार प्रदर्शन किया और भारत द्वारा 3-0 से जीत हासिल करने पर उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया।

Vimlesh Kumar Bhurtiya

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Vimlesh Kumar Bhurtiya

विमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार

संक्षिप्त विवरण
विमलेश कुमार भुर्तिया पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: विमलेश कुमार भुर्तिया भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक उभरता हुआ नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वह इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया की गतिशीलता, कार्यशैली और प्रकृति को समझने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि पाठक किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की रीढ़ होता है ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रकाशन होना चाहिए। यह पत्रकारिता को जीवंत रखता है और जर्नलिज्म का मूल गुण भी यही है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
विमलेश ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण की है। वे 2021-22 बैच के भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। उन्होंने इस नामी संस्थान से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है। इसके बाद उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में ही मास्टर्स यानी (M.A) की डिग्री भी हासिल की है। इन्होंने अपना ग्रेजुएशन मध्य प्रदेश के नामचीन साइंस कॉलेजों में से एक होलकर साइंस कॉलेज से किया है। ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही विमलेश की दिलचस्पी साहित्य और पत्रकारिता की ओर जागृत होने लगी थी। यही कारण था कि ग्रेजुएशन के दिनों में ही उन्होंने दैनिक चैतन्यलोक नामक इंदौर की क्षेत्रीय पत्रिका में काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उन्होंने दैनिक भास्कर में बतौर कॉपी एडिटर ट्रेनिंग ली। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग से मास मीडिया में इंटर्नशिप की। विमलेश कुमार भुर्तिया को कंप्यूटर का भी अच्छा ज्ञान है। उन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा किया है।

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