चेपॉक में वैभव सूर्यवंशी खौफ और जलवा दोनों, विराट कोहली-सचिन तेंदुलकर के खास क्लब में एंट्री, तिलक वर्मा इतना क्यों डरे?

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दलीप ट्रॉफी का फाइनल मुकाबला चेपॉक में खेला जा रहा है, जहां 15 वर्षीय वंडर बॉय वैभव सूर्यवंशी का खौफ गेंदबाजों में देखने को मिला है। साथ ही उन्हें देखने के लिए हजारों की संख्या फैंस आए। डोमेस्टिक मैचों में उन्होंने फैंस अटेंशन के मामले में विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर की लिस्ट में एंट्री कर ली है।

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ईस्ट जोन के उपकप्तान वैभव सूर्यवंशी दलीप ट्रॉफी फाइनल में बल्लेबाजी करते हुए

'वैभव भाई, वैभव जी, वैभव।' जैसे ही सूर्यवंशी प्रशंसकों का अभिवादन करने के लिए बाउंड्री के पास पहुंचे तो शोर अपने चरम पर पहुंच गया। प्रशंसक रविवार सुबह से ही इस उभरते क्रिकेट सितारे की एक झलक पाने के लिए इंतजार कर रहे थे। तमिलनाडु क्रिकेट संघ ने चेन्नई में एमए चिदंबरम स्टेडियम चेपॉक में साउथ जोन और ईस्ट जोन के बीच खेले जा रहे दलीप ट्रॉफी फाइनल के लिए सी, डी और ई ब्लॉक के निचले स्टैंड दर्शकों के लिए मुफ्त में खोल दिए थे। लेकिन शायद उसे यह उम्मीद नहीं थी कि करीब 12,000 दर्शक इन स्टैंड को भरने के लिए उमड़ पड़ेंगे।

वैभव सूर्यवंशी ने सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली के क्लब में मारी एंट्री

घरेलू क्रिकेट में ऐसा नजारा इन दिनों दुर्लभ है और अक्सर इसकी यादें 1980 और 1990 के दशक तक ही सीमित रह गई हैं। आखिरी बार ऐसा जुनून 30 जनवरी 2025 को देखने को मिला था जब विराट कोहली 12 साल बाद रणजी ट्रॉफी मैच में दिल्ली की ओर से खेलने उतरे थे। इससे पहले 2013 में लाहली में मुंबई और हरियाणा के बीच सचिन तेंदुलकर के आखिरी प्रथम श्रेणी मैच में उनकी एक झलक पाने के लिए करीब 15,000 प्रशंसक पहुंचे थे। सूर्यवंशी बल्लेबाजी में अभी उस ऊंचाई तक नहीं पहुंचे हैं जिसे इन दोनों दिग्गजों ने अपने शानदार करियर में हासिल किया है लेकिन आईपीएल 2026 में विस्फोटक प्रदर्शन ने इस 15 वर्षीय खिलाड़ी को भारतीय क्रिकेट में उस तरह की लोकप्रियता दिलाई है जो चुनिंदा खिलाड़ियों को ही नसीब हुई है।

इंग्लैंड के जोस बटलर जैसे खिलाड़ी का मानना है कि सूर्यवंशी टी20 के सभी रिकॉर्ड तोड़ने के लिए बने हैं जबकि कृष्णमाचारी श्रीकांत को लगता है कि बिहार का यह युवा खिलाड़ी निकट भविष्य में टेस्ट क्रिकेट में नई जान फूंक सकता है। पूर्व क्षेत्र के कप्तान इशान किशन के लिए सूर्यवंशी '15 साल के लड़के के लिहाज से बेहद समझदार' हैं और उन्हें अपनी जिंदगी तथा करियर की बारीकियों की पहले से ही अच्छी समझ है। हालांकि उनके शांत और संयमित व्यक्तित्व के पीछे अब भी एक शरारती बचपन छिपा है। इसकी झलक तब देखने को मिली जब उन्होंने भारत के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज के एक ओवर में छक्का और दो चौके जड़ दिए। सिराज और उनके साथी तेज गेंदबाज एमडी निधीश ने पहले सत्र की शुरुआत में कुछ तेज और उछाल भरी गेंदों से उन्हें परखने की कोशिश की लेकिन बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने उनसे बचने के लिए गेंदों को छोड़ दिया या झुककर गेंदों को जाने दिया।

सिराज और सूर्यवंशी के बीच खूब चला मुकाबला

इसके बाद हैदराबाद के सिराज ने गेंदबाजी का कोण बदला और गेंदों को अधिक फुल लेंथ के साथ करने लगे जो खतरनाक तरीके से सूर्यवंशी के शॉट खेलने के क्षेत्र में आ रही थीं। बल्लेबाज ने इसका पूरा फायदा उठाया और कुल तीन चौके तथा एक छक्का लगाया। 14 गेंद में 11 रन पर खेल रहे सूर्यवंशी जल्द ही 24 गेंद में 34 रन तक पहुंच गए। यह 93 मिनट तक चला प्रदर्शन आखिरकार तब समाप्त हुआ जब सूर्यवंशी ने सीवी मिलिंद की गेंद को पुल किया और गेंद डीप में स्थानापन्न क्षेत्ररक्षक तनय त्यागराजन के हाथों में चली गई। हालांकि दर्शक इसके बाद भी स्टेडियम से नहीं निकले। वे दिन का खेल खत्म होने तक लगातार उनका नाम पुकारते रहे जिसके बाद सूर्यवंशी ने उत्साहित प्रशंसकों के साथ कुछ मिनट बिताए। तो फिर सूर्यवंशी इस प्रशंसा और राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस लोकप्रियता को किस तरह लेते हैं? पूर्व क्षेत्र के उनके साथी खिलाड़ी शिखर मोहन ने दिन का खेल खत्म होने के बाद कहा, ''वह जमीन से जुड़े हुए इंसान हैं। वह इन सब चीजों के बारे में ज्यादा नहीं सोचते और सिर्फ अपने क्रिकेट पर ध्यान देते हैं। ड्रेसिंग रूम में उनका होना अच्छा लगता है।'' लेकिन चेन्नई की ढलती धूप में घटित उस पल ने एक बात साफ कर दी कि सूर्यवंशी युग की शुरुआत हो चुकी है।

8वें ओवर में दिखा वैभव सूर्यवंशी का खौफ

स्टैंड्स पर वैभव सूर्यवंशी को लेकर जिस तरह का प्यार दर्शकों में देखने को मिला उसी इंटेंसिटी में वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी के दौरान गेंदबाजों और फील्डिंग टीम पर उनका खौफ भी देखने को मिला। इसका सीधा उदाहरण यह है कि ईस्ट जोन जब अपनी पहली पारी में बल्लेबाजी करने उतरा और वैभव तो वैभव सूर्यवंशी ने चौकों की झड़ी लगानी शुरू कर दी। डर के मारे साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा ने पारी के 8वें ओवर में 5 फील्डर बाउंड्री पर लगा दिए। सूर्यवंशी तब 24 गेंदों में 34 रन बनाकर खेल रहे थे और टीम का स्कोर 46 रन बिना किसी विकेट के नुकसान के था। टेस्ट क्रिकेट में जो सबसे लंबा फॉर्मेट माना जाता है और पांच दिन चलता है उसमें भी फाइनल मुकाबले में पारी के 8वें ओवर में 5 फील्डर का रनों के बचाने की पोजीशन में होना इत्तेफाकन कम देखा जाता है। लेकिन वैभव सूर्यवंशी की विस्फोटक बल्लेबाजी ने मुमकिन बना दिया।

Vimlesh Kumar Bhurtiya

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विमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार

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विमलेश कुमार भुर्तिया पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

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परिचय और अनुभव: विमलेश कुमार भुर्तिया भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक उभरता हुआ नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वह इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया की गतिशीलता, कार्यशैली और प्रकृति को समझने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि पाठक किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की रीढ़ होता है ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रकाशन होना चाहिए। यह पत्रकारिता को जीवंत रखता है और जर्नलिज्म का मूल गुण भी यही है।

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विमलेश ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण की है। वे 2021-22 बैच के भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। उन्होंने इस नामी संस्थान से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है। इसके बाद उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में ही मास्टर्स यानी (M.A) की डिग्री भी हासिल की है। इन्होंने अपना ग्रेजुएशन मध्य प्रदेश के नामचीन साइंस कॉलेजों में से एक होलकर साइंस कॉलेज से किया है। ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही विमलेश की दिलचस्पी साहित्य और पत्रकारिता की ओर जागृत होने लगी थी। यही कारण था कि ग्रेजुएशन के दिनों में ही उन्होंने दैनिक चैतन्यलोक नामक इंदौर की क्षेत्रीय पत्रिका में काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उन्होंने दैनिक भास्कर में बतौर कॉपी एडिटर ट्रेनिंग ली। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग से मास मीडिया में इंटर्नशिप की। विमलेश कुमार भुर्तिया को कंप्यूटर का भी अच्छा ज्ञान है। उन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा किया है।

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