करियर गर्त में नहीं जाएगा लेकिन थोड़ा पीछे जरूर चले जाएंगे वैभव सूर्यवंशी, फाइनल में प्रदर्शन जरूरी
वैभव सूर्यवंशी के लिए ट्राई नेशन ए सीरीज के फाइनल में प्रदर्शन करना जरूरी हो गया है। अगर वे इस अंतिम मुकाबले में भी फेल हो जाते हैं तो बीसीसीआई उन पर विचार कर सकता है। हालांकि, इंग्लैंड और आयरलैंड सीरीज में वैभव के पास मौका होगा। ट्राई नेशन सीरीज में उन्होंने सिर्फ 109 रन बनाए हैं।

भारत ए, श्रीलंका ए और अफगानिस्तान- ए टीमों के बीच श्रीलंका के दांबुला में ट्राई नेशन सीरीज खेली जा रही है। इसका फाइनल मुकाबला तय हो चुका है, जो भारत ए और श्रीलंका ए के बीच खेला जाएगा। यह मैच 21 जून रविवार को दांबुला में होगा, जहां 15 वर्षीय युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी को अच्छा प्रदर्शन इसलिए करना होगा ताकि उनके स्टारडम और प्रतिभा पर बीसीसीआई को दोबारा सोचना ना पड़े। वैभव ने इस पूरे टूर्नामेंट में चार मैच खेले हैं और चारों ही मुकाबला में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। सूर्यवंशी के बल्ले से इस दौरान 4 मैचों की 4 पारियों में कुल 109 रन निकले हैं। इसमें उन्होंने जो ज्यादा रन बनाए हैं वह अफगानिस्तान ए टीम के खिलाफ बनाए हैं, जो श्रीलंका की तुलना में कमजोर टीम मानी जाती है। इस सीरीज में वैभव सूर्यवंशी का स्कोरलाइन- 14, 44, 21, 38 है। इसमें उन्होंने जो 44 और 38 रनों की पारियां खेली हैं, वह अफगानिस्तान ए टीम के खिलाफ खेली हैं। जबकि श्रीलंका जिसकी गेंदबाजी यूनिट मजूबत है उसके खिलाफ सिर्फ 14 और 21 रन ही बना सके हैं। ऐसे में अगर वैभव फाइनल में भी नहीं चले तो उन पर सवालिया निशान खड़ा होगा कि वे आईपीएल की सिर्फ फ्लैट पिचों और कमजोर गेंदबाजी यूनिट के सामने ही रन बनाना जानते हैं।
गंभीर और अगरकर को वैभव के लिए बनानी होगी योजना
वरिष्ठ खेल पत्रकार प्रतीक श्रीवास्तव का मानना है कि अगर फाइनल मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी फेल होते हैं या कम रन बनाते हैं तो बीसीसीआई उन पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर हो सकता है। श्रीवास्तव कहते हैं "रविवार को, संभवतः भारत ए और श्रीलंका ए के बीच फाइनल मुकाबला होगा और बिहार के इस बल्लेबाज के पास इस सीरीज में अपने प्रशंसकों को आश्वस्त करने का यह आखिरी मौका है कि उनकी पिछली असफलताएं खेल का ही हिस्सा थीं। यह साबित करने का कि उनकी तकनीक या स्वभाव में कोई खामी नहीं है और वे कम से कम दो दशकों तक भारत की सेवा करने के लिए तैयार हैं। लेकिन अगर वे एक बार फिर असफल होते हैं तो इसका मतलब कुछ बुरा नहीं है। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि उन्हें घरेलू क्रिकेट में वापस जाना होगा, शायद अपनी टीम बदलनी होगी और 'एलीट ग्रुप' टीम का हिस्सा बनना होगा, जहां जगह के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा हो और बेहतर विरोधी टीमों का सामना करना पड़े। उन्हें लाल और सफेद गेंदों पर खूब क्रिकेट खेलना होगा। और बस बेहतर होना होगा। बात इतनी ही सरल है। बीसीसीआई को मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर और मुख्य कोच गौतम गंभीर की मदद से उनके लिए पूरी योजना बनानी होगी।"
आईपीएल में तांडव लेकिन श्रीलंका की पिचों पर नहीं दिखा कमाल
बता दें कि वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में कमाल का प्रदर्शन करते हुए सबको हैरान कर दिया था। उन्होंने इस लीग में 16 मैचों में 776 रन बनाए और रिकॉर्ड 72 छक्के जड़े। वैभव ने औसतन हर पारी में साढ़े चार छक्के जड़े थे। उन्होंने 200 से अधिक की स्ट्राइक रेट से ये रन बनाए थे। उनके आईपीएल के प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए ही चयनकर्ताओं (अजीत अगरकर ने कहा वैभव ने अपने प्रदर्शन से चयन कि लिए मजबूर कर दिया) ने उन्हें ट्राई नेशन ए सीरीज के लिए भारत ए की टीम का हिस्सा बनाया साथ ही आयरलैंड और इंग्लैंड में होने वाली टी-20 शृंखला सीरीज में भारतीय सीनियर टीम के लिए भी चुना गया। वैभव के पास आगामी दोनों सीरीज में अच्छा प्रदर्शन करने का मौका है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना होगा कि बीसीसीआई श्रीलंका की पिचों को चुनौती की तरह ही देखेगा क्योंकि यह भारत और पाकिस्तान की पिचों की तरह सफेद गेंद के लिए एकदम पाटा नहीं होती हैं। इसके इतर एक बात और क्रिकेट एक्सपर्ट्स ने कही है कि दांबुला की पिच पाटा ही थी, यही कारण है कि अच्छे बल्लेबाज रन बना रहे हैं और टीमें 300 से अधिक का स्कोर कर रही हैं।



