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आज महिला क्रिकेट टीम पर पैसों की बारिश, कभी प्लेन टिकट के पैसे नहीं थे, एक्टर ने दी थी अपनी पूरी फीस

आज महिला क्रिकेट टीम पर पैसों की बारिश, कभी प्लेन टिकट के पैसे नहीं थे, एक्टर ने दी थी अपनी पूरी फीस

संक्षेप:

आज भारतीय महिला क्रिकेट टीम पर पैसों की बारिश हो रही है लेकिन एक दौर वो भी था जब महिला खिलाड़ियों के पास प्लेन टिकट तक के पैसे नहीं थे। कोई स्पॉन्सर नहीं था। अपनी जेब से खर्च उठाना पड़ता था। उस दौर में एक ऐक्टर ने अपनी पूरी फीस ही भारतीय महिला क्रिकेट टीम को दे दी थी। वो ऐक्टर हैं मंदिर बेदी।

Tue, 4 Nov 2025 03:18 PMChandra Prakash Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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हरमनप्रीत कौर ब्रिगेड ने आखिरकार भारत को विश्व विजेता का ताज पहना ही दिया। ऐतिहासिक कामयाबी के बाद वह उन पूर्व क्रिकेटरों को नहीं भूलीं, जिन्होंने कई पीढ़ी की लड़कियों को हाथ में बल्ला थामने को प्रेरित किया। हौसला दिया। जुनून दिया। नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में विक्ट्री परेड के दौरान मिताली राज, अंजुम चोपड़ा और झूलन गोस्वामी के हाथों में वर्ल्ड कप की चमचमाती ट्रॉफी का सौंपा जाना उसी संघर्ष को सलाम है। इन तीनों दिग्गजों का ही नहीं, उन सभी महिला पूर्व क्रिकेटरों का जिन्होंने तमाम मुश्किलों के बाद भी क्रिकेट के सपने को जिया।

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आज भारतीय महिला क्रिकेट टीम पर पैसों की बारिश हो रही है लेकिन एक दौर वो भी था जब महिला खिलाड़ियों के पास प्लेन टिकट तक के पैसे नहीं थे। कोई स्पॉन्सर नहीं था। अपनी जेब से खर्च उठाना पड़ता था। उस दौर में एक ऐक्टर ने अपनी पूरी फीस ही भारतीय महिला क्रिकेट टीम को दे दी थी। वो ऐक्टर हैं मंदिर बेदी जो वर्षों तक क्रिकेट प्रजेंटर भी रहीं। वूमन क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (WCAI) की पूर्व सेक्रटरी नूतन गावस्कर ने भारतीय महिला क्रिकेटरों के उस मुश्किल दौर, संघर्ष और मंदिरा बेदी के उस अतुल्य योगदान का किस्सा साझा किया है। नूतन महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर की छोटी बहन हैं।

भारतीय महिला क्रिकेट आज जिस गौरवशाली मुकाम पर पहुंचा है, उसके पीछे न जाने कितनी पूर्व क्रिकेटरों की मेहनत, लगन, जिद और जुनून की कहानी छिपी है। वो क्रिकेटर नहीं, विद्रोही थीं। एक ऐसे समाज में जहां लोग सोचते थे कि लड़कियों के हाथ में बेलन-चौकी ही शोभा देती है, बल्ला-गेंद नहीं...उन्होंने अनगिनत लड़कियों को अपने सपने के पीछे भागने का हौसला दिया। टूर्नामेंट में हिस्सा लेने का पूरा खर्च खुद उठाती थीं क्योंकि भारतीय महिला क्रिकेट के पास पैसे ही नहीं थे। कोई स्पॉन्सर तक नहीं था। वो खेली तो सिर्फ अपने जुनून की बदौलत।

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WCAI की पूर्व सचिव नूतन गोस्वामी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया, ‘WCAI का गठन 1973 में हुआ और वही 2006 तक नेशनल क्रिकेट का मैनेजमेंट देखती थी। आखिरकार 2006 में बीसीसीआई ने महिला क्रिकेट को भी अपने तहत ले लिया। उससे पहले महिला क्रिकेट में पैसे नहीं थे, लेकिन तब जिन भी महिलाओं ने इसे खेला वो सिर्फ खेल के प्रति अपनी मोहब्बत की वजह से खेला।’

नूतन गावस्कर ने उस दौर में मंदिरा बेदी के योगदान का खास जिक्र किया। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की आर्थिक तंगी को देखते हुए लड़कियों के जुनून का समर्थन करने के लिए वो खुद आगे आईं। उन्होंने तब एक जूलरी के विज्ञापन के बदले में मिली पूरी फीस को WCAI को देने का फैसला किया। नूतन ने खुलासा किया कि उस पैसे का इस्तेमाल भारतीय टीम के इंग्लैंड दौरे के लिए किया गया। एयर टिकट खरीदा गया और इस तरह आर्थिक चुनौतियों के बीच भी टीम अंतरराष्ट्रीय दौरा कर सके, ये सुनिश्चित हुआ।

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मंदिरा बेदी भारतीय महिला क्रिकेट के लिए जितना संभव हो सके, करने की कोशिश करती थी। 2003 से 2005 के बीच वह व्यक्तिगत तौर पर कंपनियों और ब्रैंड्स के पास जाती थी ताकि महिला टीम के लिए स्पॉन्सरशिप मिले।

WCAI की एक और पूर्व पदाधिकारी शुभांगी कुलकर्णी ने बताया कि कैसे मंदिरा बेदी की वजह से महिला क्रिकेट को स्पॉन्सर मिलने शुरू हुए। उन्होंने कहा, ‘तब स्पॉन्सर का मिलना बहुत मुश्किल हुआ करता था। लेकिन मंदिरा ने जब बीड़ा उठा लिया तब दूसरी कॉर्पोरेट कंपनियां भी अपनी रुचि दिखाने लगीं।’

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उन्होंने यह भी बताया कि मंदिरा बेदी ने महिला क्रिकेट में अपनी रुचि क्यों दिखाई। शुभांगी ने बताया, 'एक बार वह एक मैच देखने आई तो हमने उनसे कहा- आप पुरुषों के क्रिकेट के लिए बहुत कुछ किया है, आप हमारे लिए भी कुछ क्यों नहीं करती? इस चीज को उन्होंने दिल से लिया और जल्द ही स्पॉन्सर्स से संपर्क करना शुरू कर दीं।'

Chandra Prakash Pandey

लेखक के बारे में

Chandra Prakash Pandey
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय टीवी पत्रकारिता से शुरुआत। न्यूज24, हमार टीवी, श्री न्यूज, फोकस न्यूज और न्यूज वर्ल्ड इंडिया में अलग-अलग भूमिकाओं के बाद 2016 में नवभारत टाइम्स.कॉम के साथ डिजिटल पारी का आगाज। देश, दुनिया, राजनीति, खेल, अदालत, अपराध से जुड़ीं खबरों पर लेखन। एनबीटी में करीब 9 साल की शानदार पारी के बाद मार्च 2025 से लाइव हिंदुस्तान का हिस्सा और स्पोर्ट्स डेस्क इंचार्ज। मूल रूप से यूपी के देवरिया के निवासी। सीखने और समझने के सतत क्रम में भरोसा। और पढ़ें
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