Hindi Newsक्रिकेट न्यूज़The slow death of spin bowling in Australian conditions Ashes Series is about to end almost without spin
ऑस्ट्रेलिया में स्पिन बॉलिंग को दी जा रही है धीमी मौत, स्पिन की कला का घुट रहा गला

ऑस्ट्रेलिया में स्पिन बॉलिंग को दी जा रही है धीमी मौत, स्पिन की कला का घुट रहा गला

संक्षेप:

ऑस्ट्रेलिया में स्पिन बॉलिंग को एक तरह से धीमी मौत दी जा रही है। स्पिन की कला का गला यहां घुट रहा है, क्योंकि एशेज सीरीज के आखिरी मैच में तो किसी टीम ने अपनी प्लेइंग इलेवन में एक भी स्पेशलिस्ट स्पिनर नहीं रखा है। 

Jan 06, 2026 07:52 am ISTVikash Gaur लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सिडनी क्रिकेक ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच एशेज सीरीज 2025-26 का आखिरी मुकाबला खेला जा रहा है। इस मुकाबले में न तो ऑस्ट्रेलिया और न ही इंग्लैंड ने किसी स्पेशलिस्ट को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि 1888 के बाद पहली बार ऑस्ट्रेलिया की टीम किसी टेस्ट मैच में सिडनी के मैदान पर किसी स्पेशलिस्ट स्पिनर के बिना उतरी है। इस मैदान पर अक्सर देखने को मिलता था कि स्पिनरों को भी खूब मदद मिलती थी और चौथी पारी में स्पिनर अपना दमखम दिखाते थे, लेकिन मौजूदा कंडीशन्स को देखते हुए ऐसा कहा जा सकता है कि ऑस्ट्रेलिया में स्पिन बॉलिंग को स्लो डेथ यानी धीमी मौत दी जा रही है।

ऑस्ट्रेलिया की सरजमीं पर अपना पहला टेस्ट खेलने की बाट देख रहे टॉम मर्फी को निराशा ही मिली। उनको पूरी सीरीज में मौका नहीं मिल सका, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया ने प्रोपर पेस बॉलिंग को तरजीह दी। ऐसा माना जा रहा है कि ऑस्ट्रेलिया में एक समय तक स्पिनर भी कारगार साबित होते थे, लेकिन अब वे टीम के इर्द-गिर्द भी नजर नहीं आते। पिंक बॉल टेस्ट कोई एक्सपेरीमेंट नहीं था, बल्कि यही सब हमको ब्रिसबेन, मेलबर्न और सिडनी में देखने को मिला है। ऑस्ट्रेलिया के सबसे अनुभवी स्पिनर को सीरीज में सिर्फ दो मौके मिले। एक मैच में उन्होंने 5 विकेट भी निकाले।

एशेज सीरीज को देखें तो ऑस्ट्रेलिया से संदेश एकदम साफ मिला है। ऑस्ट्रेलियाई परिस्थितियों में अब स्पिन की जरूरत नहीं है और टीम सिलेक्शन में इसकी सच्चाई दिख भी रही है। ऑस्ट्रेलिया में स्पिन की स्लो डेथ के पीछे कोई फिलॉसफी नहीं, बल्कि तैयारी है। ऑस्ट्रेलियाई क्यूरेटरों ने ग्रीन टॉप और सीम-फ्रेंडली पिचों पर ज्यादा ध्यान दिया है। अक्सर पिच पर 8 से 10 mm घास छोड़ दी जाती है, जहां स्पिनरों के लिए कुछ नहीं होता। ऐसा करने के पीछे इरादा है कि फ्लैट ट्रैक न बनें और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में परिणाम मिलें। भले ही स्पिन की कला का गला घोंट दिया जाए।

जिस मैच में एक दिन में 90 ओवर और मैच में करीब 450 ओवर तक हो सकते हैं। उस पूरी सीरीज में दोनों टीमों के स्पिनरों ने कुल 130 ओवर के करीब ही फेंके हैं। ऑस्ट्रेलिया में खेली गई तीन या उससे ज्यादा मैचों की किसी भी टेस्ट सीरीज में स्पिन द्वारा फेंकी गई सबसे कम गेंदें हैं। 9 ही विकेट स्पिनरों को मिले हैं और इसमें से 8 विकेट अकेले एडिलेड टेस्ट मैच में स्पिनरों को मिले, जो कि सीरीज का तीसरा टेस्ट था। उस मुकाबले में नाथन लियोन खेले थे, जो एक पारी में दो और एक पारी में 3 विकेट लेने में सफल हुए थे।

ऑस्ट्रेलिया में 2020 के बाद के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्पिनरों का यहां प्रति विकेट औसत 38 के करीब का है, जबकि तेज गेंदबाजों का 26 के आसपास का है। तेज गेंदबाजों को 50 गेंदों से कम में विकेट मिल रहा है, जबकि स्पिनरों का स्ट्राइक रेट 70 के आसपास का है। सीधे शब्दों में कहें तो, स्पिन धीमी, ज्यादा महंगी और कम खतरनाक हो गई है। यह स्किल में कमी के कारण नहीं, बल्कि इसलिए हुआ है, क्योंकि कंडीशन्स ने इसे अप्रासंगिक बना दिया है।

Vikash Gaur

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Vikash Gaur

विकाश गौड़: डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर कम असिस्टेंट मैनेजर, स्पोर्ट्स


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विकाश गौड़ पिछले 8 वर्षों से हिंदी डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के स्पोर्ट्स सेक्शन में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर (असिस्टेंट मैनेजर) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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