वो मैच जिसने हार्दिक पांड्या को हार्दिक पांड्या बनाया; स्टार ऑलराउंडर ने बताया करियर का टर्निंग पॉइंट
हार्दिक पांड्या किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। भारत ही नहीं दुनियाभर में उनके प्रशंसक हैं। उन्होंने अब तक कई मौकों पर कभी बल्ले से तो कभी गेंद से तो कभी दोनों से ही टीम इंडिया की जीत की इबारत लिखी है। अब स्टार ऑलराउंडर ने खुद बताया है वो क्षण जिसने हार्दिक पांड्या को हार्दिक पांड्या बनाया।

स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। भारत ही नहीं दुनियाभर में उनके प्रशंसक हैं। उन्होंने अब तक कई मौकों पर कभी बल्ले से तो कभी गेंद से तो कभी दोनों से ही टीम इंडिया की जीत की इबारत लिखी है। अब खुद स्टार ऑलराउंडर ने बताया है वो क्षण जिसने हार्दिक पांड्या को हार्दिक पांड्या बनाया। जिसे वह अपने करियर का टर्निंग पॉइंट बताते हैं। जियो स्टार से बातचीत में पांड्या ने कहा कि 2016 टी20 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश के खिलाफ उनका फेंका निर्णायक ओवर ऐसा क्षण है, जिसने उनके करियर को आकार दिया।
सुपर 10 के ग्रुप 2 के उस मैच को जीतने के लिए बांग्लादेश को आखिरी ओवर में सिर्फ 11 रन की जरूरत थी और उसके पास 4 विकेट बाकी थे। खतरनाक महमदुल्लाह 17 रन और मुश्फिकुर रहीम 3 रन बनाकर खेल रहे थे। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने युवा हार्दिक पांड्या को आखिरी ओवर की जिम्मेदारी सौंपी।
पांड्या ने जियो स्टार से बातचीत में कहा है, 'मुझे लगता है कि इन सभी मौकों ने मुझे उस तरह का व्यक्ति बनाया जैसा कि मैं हूं। मेरे अंतरराष्ट्रीय करियर में शुरुआत में चुनौतियां थीं जहां मुझे अपना आत्मविश्वास बनाए रखना था। भरोसा को होना महत्वपूर्ण था। क्रिकेट में अगर 1 प्रतिशत की चांस हो तो मैच तब तक खत्म नहीं है जब तक कि मैच की आखिरी गेंद न फेंक दी जाए।'
'बांग्लादेशी बल्लेबाज पहले ही जश्न मनाने लगा'
हार्दिक पांड्या बांग्लादेश के खिलाफ उस मैच को याद करते हुए कहते हैं, ‘बांग्लादेश से वो मैच इसका एक क्लासिक उदाहरण है। विकेट से एक गेंद पहले ही बल्लेबाज ने जश्न मनाना शुरू कर दिया जैसे कि मैच खत्म हो गया है। वह ठीक मेरे सामने जश्न मना रहा था। यह सब कुछ ठीक मेरी आंखों के सामने हो रहा था।’
'उस क्षण ने हार्दिक पांड्या को आकार दिया'
पांड्या कहते हैं, 'जब चीजें ऐसे मोड़ लेती हैं तो बहुत ही शानदार यादें बनाती हैं। जब भी मैं इसे देखता हूं, मैं सोचता हूं कि मेरे शुरुआती दिनों की चुनौतियों में से एक और मेरे करियर के अहम मौकों में से एक उस क्षण ने कैसे हार्दिक पांड्या को आकार दिया। मेरे पास उस तरह के कई और क्षणों की यादें हैं लेकिन मेरी यात्रा उसी क्षण से शुरू हुई।'
'अपनी गेंदबाजी पर ज्यादा भरोसा लेकिन बल्लेबाजी दिल के करीब'
हार्दिक पांड्या भले ही बल्ले से न जाने कितने मौकों पर टीम इंडिया की नैया पार लगाई हो लेकिन वह खुद को बोलिंग ऑलराउंडर ही मानते हैं। उनका मानना है कि उन्होंने अभी अपनी बैटिंग की क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाए हैं। पांड्या का कहना है कि वह अपनी बल्लेबाजी क्षमता का 40 प्रतिशत से ज्यादा ही इस्तेमाल कर पाए हैं।
स्टार ऑलराउंडर ने कहा, 'मुझे अपनी गेंदबाजी पर हमेशा से ज्यादा भरोसा रहा है लेकिन बैटिंग मेरे दिल के बहुत ही करीब है।'
वो मैच और ओवर जिसे पांड्या ने बताया करियर का टर्निंग पॉइंट
बांग्लादेश को जीत के लिए उस आखिरी ओवर में 11 रन की दरकार थी और पांड्या की पहली गेंद पर महमदुल्लाह ने 1 रन ले लिए। उसके बाद दूसरी गेंद पर मुश्फिकुर रहीम ने एक्स्ट्रा कवर पर शानदार चौका जड़ दिया। तीसरी गेंद पर एक और चौका। अब बांग्लादेश को जीत के लिए 3 गेंदों में चाहिए थे सिर्फ 2 रन। 4 विकेट हाथ में। करोड़ों भारतीय फैंस को जैसे सांप सूंघ गया। तेज गेंदबाज आशीष नेहरा पांड्या के पास पहुंचते हैं। कुछ बात करते हैं। उसके बाद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और आशीष नेहरा में कुछ बातचीत होती है।
बांग्लादेश को आखिरी 3 गेंद में चाहिए थे सिर्फ 2 रन
हार्दिक पांड्या चौथी गेंद डालते हैं और रहीम मैच खत्म करने की नीयत से पुल शॉट खेलते हैं लेकिन गेंद सीधे शिखर धवन के हाथों में समा जाती है। इस बीच कैच पकड़े जाने के दौरान महमदुल्लाह नॉन स्ट्राइकिंग एंड से स्ट्राइकिंग एंड पर पहुंच चुके थे। तब कैच के दौरान अगर बल्लेबाज छोर बदल लेते थे तो स्ट्राइकिंग छोर वाले को स्ट्राइक मिला करती थी। अब 2 गेंद में 2 रन चाहिए।
पांड्या ने पांचवीं गेंद से फिर कमाल किया और इस बार महमदुल्लाह को रविंद्र जडेजा के हाथों कैच आउट कराके पवैलियन भेजा।
आखिरी गेंद से पहले धोनी ने दाहिने हाथ का दस्ताना निकाल दिया था
अब 1 गेंद में जीत के लिए 2 रन चाहिए थे। एक भी रन बनता तो मैच टाई हो जाता। भारत को जीत के लिए इस आखिरी गेंद पर एक भी रन नहीं देना था। मैच देख रहे फैंस की धड़कनें बढ़ी हुई थीं। कुछ नाखून चबा रहे थे तो कुछ प्रार्थना कर रहे थे। महेंद्र सिंह धोनी ने दाहिने हाथ का दस्ताना निकाल लिया था ताकि अगर बाई जैसी नौबत आए तो वह तेजी से थ्रो कर सकें।
...और पांड्या ने कर दिखाया
पांड्या आखिरी गेंद फेंकते हैं। शुवग्ता के बल्ले से गेंद लगी या नहीं, लेकिन वह और नॉन स्ट्राइक छोर पर मौजूद मुस्तफिजुर रन के लिए दौड़ पड़ते हैं। विकेट के पीछे मौजूद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी गेंद पकड़ते हैं। वह थ्रो नहीं करते बल्कि दौड़कर स्टंप तक पहुंचते हैं और गेंद से गिल्लियां उड़ा देते हैं। थर्ड अंपायर ने मुस्तफिजुर रहमान को रन आउट करार दिया और इस तरह भारत ने 1 रन की रोमांचक और यादगार जीत हासिल की। हार्दिक पांड्या ने लगातार 2 चौके खाने के बाद भी उस ओवर में सिर्फ 9 रन ही दिए।

लेखक के बारे में
Chandra Prakash Pandeyचन्द्र प्रकाश पाण्डेय, असिस्टेंट एडिटर
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।
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