ICC टूर्नामेंट्स की चमक पड़ रही फीकी! रॉबिन उथप्पा ने गिनाईं वजहें, समाधान भी सुझाया

Jan 08, 2026 02:41 pm ISTChandra Prakash Pandey डरबन, भाषा
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भारत के पूर्व बल्लेबाज रॉबिन उथप्पा का मानना है कि आईसीसी (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद) टूर्नामेंटों के प्रति लोगों का आकर्षण कम होता जा रहा है। इनकी चमक को बरकरार रखने के लिए ‘प्रशासनिक दृष्टिकोण’ से बदलाव करने की जरूरत है।

ICC टूर्नामेंट्स की चमक पड़ रही फीकी! रॉबिन उथप्पा ने गिनाईं वजहें, समाधान भी सुझाया

भारत के पूर्व बल्लेबाज रॉबिन उथप्पा का मानना है कि आईसीसी (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद) टूर्नामेंटों के प्रति लोगों का आकर्षण कम होता जा रहा है। इनकी चमक को बरकरार रखने के लिए ‘प्रशासनिक दृष्टिकोण’ से बदलाव करने की जरूरत है।

मौजूदा क्रिकेट कैलेंडर में 10 महीनों के भीतर तीन विश्व कप आयोजित किए जा रहे हैं। महिला वनडे विश्व कप सितंबर और नवंबर 2025 के बीच खेला गया था। अब पुरुषों का टी20 विश्व कप सात फरवरी से आठ मार्च 2026 के बीच खेला जाएगा। इसके बाद जून जुलाई में महिला टी20 विश्व कप होगा।

उथप्पा ने यहां एसए20 के दौरान चुनिंदा पत्रकारों से बातचीत में पीटीआई के एक सवाल के जवाब में कहा, ‘मुझे लगता है कि खेल को प्रशासनिक दृष्टिकोण से विकसित करने की जरूरत है। हर साल आईसीसी टूर्नामेंट हो रहे हैं। इससे प्रशंसकों और दर्शकों के लिए इनकी क्या अहमियत रह गई है। ईमानदारी और पूरे सम्मान के साथ कहूं तो इनमें कुछ नयापन नहीं है और उनकी चमक फीकी पड़ती जा रही है।’

उथप्पा अभी एसए20 में कमेंटेटर की भूमिका निभा रहे हैं। उनका मानना ​​​​था कि आईसीसी की दो प्रतियोगिताओं के बीच कुछ अंतराल होना चाहिए ताकि उनका महत्व बना रहे।

उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि आईसीसी चैंपियनशिप की नवीनता बनी रहनी चाहिए। यह न केवल खिलाड़ियों बल्कि प्रशंसकों और दर्शकों के लिए भी महत्वपूर्ण टूर्नामेंट होते हैं। इनका कुछ महत्व होना चाहिए। इसमें कुछ बदलाव होना चाहिए।’

उथप्पा ने कहा, ‘हम हर साल आईसीसी टूर्नामेंट आयोजित नहीं कर सकते और न ही करना चाहिए। यह एक कड़वी सच्चाई है जिसे मुझे लगता है कि इस खेल के प्रशासकों को समझना होगा। उन्हें खेल को इस तरह विकसित करने पर विचार करना होगा जिससे यह वास्तव में आगे बढ़ सके।’

उथप्पा ने इसके साथ ही कहा कि एसए20 दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट में एक बड़ा बदलाव लाएगा, क्योंकि युवा प्रतिभाएं अब लीग के जरिए अपनी पहचान बना रहीं हैं।

उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना ​​है कि क्रिकेट के माहौल और गुणवत्ता के मामले में यह आईपीएल के बाद दूसरी सर्वश्रेष्ठ लीग है। इससे आप दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट को फलते-फूलते देखेंगे। आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप और अन्य टूर्नामेंट में दक्षिण अफ्रीका के अच्छे प्रदर्शन से इसका पता चलता है।’

उथप्पा ने कहा, ‘मुझे लगता है कि एसए20 जैसी लीग दुनिया भर में क्रिकेट के दर्शकों का लगभग 60-70 प्रतिशत हिस्सा कवर करती है। यह लीग निरंतर आगे बढ़ती जाएगी।’

Chandra Prakash Pandey

लेखक के बारे में

Chandra Prakash Pandey

चन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।

चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।

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