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हिंदी न्यूज़ क्रिकेट15 साल बाद बंगाल से टूटा ऋद्धिमान साहा का नाता, बंगाल क्रिकेट संघ ने विकेटकीपर बल्लेबाज को एनओसी दी

15 साल बाद बंगाल से टूटा ऋद्धिमान साहा का नाता, बंगाल क्रिकेट संघ ने विकेटकीपर बल्लेबाज को एनओसी दी

आईपीएल 2022 की विजेता टीम गुजरात टाइटन्स के विकेटकीपर रद्धिमिान साहा ने शनिवार को बंगाल क्रिकेट संघ (सीएबी) से विदा लेते हुए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त किया।

15 साल बाद बंगाल से टूटा ऋद्धिमान साहा का नाता, बंगाल क्रिकेट संघ ने विकेटकीपर बल्लेबाज को एनओसी दी
Himanshu Singhलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSat, 02 Jul 2022 08:48 PM

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भारतीय टीम से बाहर किये गये ऋद्धिमान साहा को शनिवार को बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) ने एनओसी (अनापत्ति पत्र) दे दी जिससे उनका संघ से 15 साल का जुड़ाव खराब परिस्थितियों में खत्म हो गया। 40 टेस्ट के अनुभवी साहा को भारतीय टीम प्रबंधन ने स्पष्ट कह दिया था कि उन्हें उम्रदराज दूसरे विकेटकीपर की जरूरत नहीं है। तब से साहा बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली की आलोचना कर रहे थे और शुरू में उन्होंने मुख्य कोच राहुल द्रविड़ के बारे में कुछ ऐसा ही कहा था।

कैब ने कहा, ''ऋद्धिमान साहा कैब कार्यालय आये और अध्यक्ष अविषेक डालमिया को एक आवेदन से संघ से एनओसी मांगी।'' संघ ने कहा, ''कैब ने साहा के अनुरोध पर उन्हें दूसरे राज्य के लिये खेलने के लिये एनओसी प्रदान की। कैब ने उन्हें भविष्य के लिये शुभकामनायें भी दीं।''

कैब के संयुक्त सचिव देबब्रत 'देबू' दास ने आरोप लगाया था कि अनुभवी विकेटकीपर राज्य के लिये घरेलू मैच में नहीं खेलने के लिये बहाना बनाता था। इस पर नाराज साहा ने दास से बिना शर्त माफी मांगने को कहा था जो उन्होंने नहीं किया और जब कैब अधिकारी को भारतीय टीम के प्रशासनिक प्रबंधक के तौर पर इंग्लैंड भेजा गया तो साहा को जवाब मिल गया और उन्होंने यह फैसला किया।

एनओसी मिलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए साहा ने कहा कि उनसे अपने फैसले पर फिर से विचार करने को कहा गया। उन्होंने कहा, ''मुझसे पहले भी पूछा गया था। आज भी बार-बार अनुरोध किया गया। लेकिन मैंने फैसला पहले ही कर लिया था। इसलिये मैंने आज एनओसी ले ली।''

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साहा ने साथ ही कहा कि उन्हें कभी भी बंगाल से कोई शिकायत नहीं होगी और भविष्य में जरूरत पड़ने पर फिर से सेवा के लिये तैयार रहेंगे। उन्होंने कहा, ''मुझे बंगाल क्रिकेट संघ से कोई अहंकार संबंधित कोई मुद्दा नहीं था। बस किसी से (संयुक्त सचिव देबू) से असहमति थी, इसलिये मुझे यह फैसला करना पड़ा।''

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