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हिंदी न्यूज़ क्रिकेटवीरेंद्र सहवाग का छलका दर्द - कहा ड्रॉप नहीं हुआ होता तो टेस्ट में बनाता 10 हजार से ज्यादा रन

वीरेंद्र सहवाग का छलका दर्द - कहा ड्रॉप नहीं हुआ होता तो टेस्ट में बनाता 10 हजार से ज्यादा रन

वीरेंद्र सहवाग ने भारत के लिए 104 टेस्ट, 251 वनडे और 19 टी20 मुकाबले खेले। इस दौरान उनके बल्ले से क्रमश: 8586, 8273 और 394 रन निकले। वीरू ने टेस्ट क्रिकेट में इस दौरान दो तिहरे शतक भी ठोके हैं।

वीरेंद्र सहवाग का छलका दर्द - कहा ड्रॉप नहीं हुआ होता तो टेस्ट में बनाता 10 हजार से ज्यादा रन
Lokesh Kheraलाइव हिंदुस्तान टीम,नई दिल्लीTue, 24 May 2022 04:25 PM

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जब भी भारत के दिग्गज क्रिकेटरों की बात होती है तो वीरेंद्र सहवाग का नाम जरूर आता है। सहवाग उस समय गेंदबाजों पर कहर बनकर टूटते थे जब बल्लेबाज तेजी से रन बनाने की जगह अपना विकेट बचाने के बारे में ज्यादा सोचते थे। इस विस्फोटक सलामी बल्लेबाज ने भारत के लिए 104 टेस्ट, 251 वनडे और 19 टी20 मुकाबले खेले। इस दौरान उनके बल्ले से क्रमश: 8586, 8273 और 394 रन निकले। सहवाग ने 2015 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया मगर अभी भी उन्हें टेस्ट क्रिकेट में 10 हजार रन ना बनाने का मलाल है।

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हाल ही में एक इंटरव्यू में वीरेंद्र सहवाग ने कहा कि अगर उन्हें टीम से ड्रॉप नहीं किया जाता तो वह टेस्ट क्रिकेट में 10000 से अधिक रन बनाते। टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए सहवाग सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में 5वें नंबर पर है। टीम इंडिया के लिए क्रिकेट के सबसे बड़े फॉर्मेट में सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और सुनील गावस्कर ही तीन ऐसे बल्लेबाज हैं जिन्होंने 10 हजार से अधिक रन बनाए हैं।

2001 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट डेब्यू में शतक ठोकने के बाद सहवाग भारतीय टीम का अहम हिस्सा बन गए थे, उन्होंने लगातार टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन किया। मगर एक खराब दौर ने उन्हें टेस्ट और वनडे टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया। 2007 में 52वां टेस्ट खेलने के बाद सहवाग को अगला टेस्ट खेलने में लगभग एक साल का समय लग गया।

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स्पोर्ट्स 18 के 'होम ऑफ हीरोज' शो में सहवाग ने उस दौर के बारे में बात करते हुए कहा, "अचानक मुझे अहसास हुआ कि मैं टेस्ट टीम का हिस्सा ही नहीं हूं, मैं बहुत निराश हो गया था। अगर मुझे उस एक साल के लिए ड्रॉप नहीं किया गया होता, तो मैं अपना टेस्ट करियर 10 हजार से ज्यादा रनों के साथ खत्म करता।" 

टीम इंडिया से ड्रॉप होने के बाद सहवाग ने रिटायरमेंट के बारे में भी सोचा मगर सचिन तेंदुलकर के कहने पर उन्होंने ऐसा नहीं किया। सहवाग की इसके बाद वापसी 2007-08 में खेली गई बॉर्डर गावस्कर टेस्ट सीरीज में हुई। गौतम गंभीर के चोटिल होने के बाद सहवाग को टीम में जगह मिली। इसके बाद सहवाग ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। टेस्ट क्रिकेट में वापसी के बाद सहवाग ने एक पारी में सर्वाधिक 319 रन बनाने के साथ 2010 में आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में पहले स्थान पर भी पहुंचे।

सहवाग ने इस शो पर कहा, "उस दौरे के बाद अनिल कुंबले ने मुझसे वादा किया था कि मैं जब तक टेस्ट कप्तान हूं, तुम टेस्ट टीम से बाहर नहीं होगे। खिलाड़ी को इस तरह कप्तान से कॉन्फिडेन्स मिलता है, करियर की शुरुआत में सौरव गांगुली ने मुझे वह भरोसा दिखाया था और बाद में कुंबले ने।"

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