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हॉकआई, हॉटस्पॉट जैसी तकनीक ने आसान किया अंपायरों का काम

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क्रिकेट मैदान पर किसी गलती या गलत फैसले का नुकसान खिलाड़ियों को न उठाना पड़े और अंपायरों के फैसलों पर अंगुलियां न उठे,इसके लिए कई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये अंपायरों के लिए तो फायदेमंद हैं ही, इनसे खिलाड़ियों की शंकाएं भी दूर होती हैं। इन्हीं तकनीक के जरिए खिलाड़ी अंपायरों के फैसले को भी यूडीआरएस के तहत चुनौती देते हैं। 

हॉक आई
जब कोई बल्लेबाज एलबीडब्ल्यू होता है या गेंद किस दिशा में जा रही है, यह देखने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें छह कैमरों का इस्तेमाल किया जाता है जो गेंदबाज के हाथ से बॉल छूटने से लेकर बल्लेबाज तक पहुंचने तक के सभी एक्शन को रिकॉर्ड करता है। मैच के पूर्व इस तकनीकी के लिए अलग-अलग दूरी और ऊंचाई पर कैमरे लगाकर कंप्यूटर के जरिए मैप तैयार किया जाता है। इसकी मदद से टीवी अंपायर फील्ड अंपायर की तुलना में सटीक निर्णय दे सकते हैं।

स्निकोमीटर
स्निकोमीटर बल्लेबाज और स्टंप के आसपास का एरिया कवर करता है। इस तकनीकी का प्रयोग एलबीडब्ल्यू कैच, या बारीक क्लीन बोल्ड को जांचने के लिए किया जाता है। इस तकनीक को इस तरह से प्रोग्राम किया गया है कि आवाज में थोड़े बदलाव को भी पहचान लिया जाए। इससे यह पता लग जाता है कि बल्ले ने बॉल को छुआ है या नहीं। स्निकोमीटर में एक माइक्रोफोन लगा होता है। इसे पिच की दोनों तरफ किसी एक स्टंप में लगाया जाता है और यह ऑसीलोस्कोप से कनेक्ट रहता है जो ध्वनि तरंगों को मापती है।

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जिंग विकेट
अब टेस्ट क्रिकेट को छोड़ अन्य किसी फॉर्मेट में जिंग विकेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। आईपीएल और कई वनडे सीरीज में भी इसका इस्तेमाल हुआ। इसमें स्टंप और गिल्लियां एलईडी युक्त होती हैं। गेंद टकराने पर ये अपने चमक उठती हैं। जिंग विकेट सिस्टम ऑस्ट्रेलियाई मकैनिकल डिजाइनर ब्रोंटे एककैरमन ने बनाया। स्टंप को माइक्रोप्रोसेसर और कम वोल्टेज वाली बैटरी के साथ लगाया जाता है। इन-बिल्ट सेंसर की मदद से यह सेकंड के हजारवें हिस्से को ही डिटेक्ट कर लेता है कि कोई चीज पास आ रही है।

स्पीड गन
गेंदबाज किस गति से गेंद फेंक रहा है, यह जानने के लिए स्पीड गन का इस्तेमाल किया जाता है। स्पीड गन माइक्रोवेव तकनीकी पर आधारित है। पर कुछ स्पीड गन डॉपलर रडार के जरिए संचालित होती हैं।

हॉट स्पॉट
हॉट स्पॉट बताता है कि गेंद बल्ले से टकराई है या नहीं। कई बार अंपायर के लिए यह निर्णय लेना आसान नहीं होता कि आउट की अपील सही है या नहीं। यह बॉल की हीट सिग्नेचर पर निर्भर करता है। अंपायर किसी निर्णय पर पहुंचने से पहले हॉट स्पॉट और स्निकोमीटर दोनों की मदद लेते हैं।

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स्पाइडर कैम
मैच शुरू होने के पहले ही स्टेडियम में मैदान के ऊपर एक छोर से दूसरे छोर तक मजबूत स्टील की डोरियां बांधी जाती हैं। इस पर स्पाइडर कैम लगाया जाता है। रिमोट के जरिए संचालित होने वाला यह कैमरा स्टेडियम में होने वाली गतिविधियों को दिखाता है। अंपायरों की मदद या प्रसारण के लिए इस कैमरे का इस्तेमाल किया जाता है।

सुपर स्लो मोशन
सुपर स्लो मोशन कैमरों का इस्तेमाल रन आउट, कैच, स्टंपिंग आदि देखने के लिए किया जाता है। ये कैमरे एक सेकंड में करीब पांच तस्वीरें रिकॉर्ड करते हैं। इन कैमरों से भी अंपायरों को फैसला करने में मदद मिलती है।

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  • Web Title:Techniques such as Hawkeye Hotspot made easier for umpires