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सुरेश रैना ने याद की IPL की अपनी सबसे तेज पारी, टूटने से बचा था वर्ल्ड रिकॉर्ड

लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीMohan Kumar
Wed, 19 Aug 2020 11:48 PM
सुरेश रैना ने याद की IPL की अपनी सबसे तेज पारी, टूटने से बचा था वर्ल्ड रिकॉर्ड

हाल ही में टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के साथ संन्यास लेने वाले ऑलराउंडर सुरेश रैना ने अपने आईपीएल सफर पर बात की है।  रैना ने कहा कि उन्होंने आईपीएल में सीनियर खिलाड़ियों से काफी कुछ सीखा, विशेषकर धोनी, मैथ्यू  हेडन, माइक हसी, फ्लेमिंग से। रैना ने बताया कि जब उन्होंने देखा कि राहुल द्रविड़ खेल रहे हैं, अनिल कुंबले रॉयल चैलेंजर बेंगलुरु का नेतृत्व कर रहे हैं और सचिन तेंदुलकर मिडऑफ पर गेंद रोकने के लिए डाइव लगा रहे हैं। तब मैंने सोचा कि अगर ये खिलाड़ी इस फॉर्मेट में खेल सकते हैं तो हमें आगे आकर प्रदर्शन करना चाहिए। हम युवा खिलाड़ी हैं और हमें अपना खेल खेलना चाहिए। इस दौरान रैना ने किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ एक खास मैच पर चर्चा की है।

2014 आईपीएल के क्वालीफायर में किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ रैना ने 25 गेंदों में 87 रन बनाए थे। इस पर उन्होंने कहा कि पंजाब की टीम ने वीरेंद्र सहवाग के शतक की बदौलत 226 रन बनाए थे जिसके बाद ड्रेसिंग रूम में थोड़ी निराशा थी। उल्लेखनीय है कि उस मैच में सीएसके ने पावरप्ले खत्म होने पर दो विकेट खोकर 100 रन बनाए थे जिसमें से रैना ने 87 रन का योगदान दिया था। रैना ने कहा कि जब मैंने वीरू भाई को देखा तो वह सभी गेंदबाजों को धो रहे थे। मैंने सोचा इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। जब हम मैदान से पवेलियन की तरफ गए तो टीम के सभी खिलाड़ी निराश थे लेकिन मैंने उनसे कहा कि अभी 20 ओवर का खेल बाकी है और खेल अभी खत्म नहीं हुआ।

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रैना ने बताया कि उन्होंने खुद से कहा कि मुझे पहले छह ओवर का अच्छे से इस्तेमाल करना होगा। जब मैंने निराश चेहरे देखे तो इसने मुझे बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। मैंने पहले छह ओवर के खेल का आनंद लिया और लक्ष्य को प्राप्त करने के बारे में नहीं सोचा। 33 साल के रैना ने पूर्व कोच गैरी कर्स्टन और डंकन फ्लेचर की सराहना की जिनके दौर में उन्होंने टीम इंडिया के लिए ज्यादातर मैच खेले। उन्होंने कहा कि मेरे ख्याल से फ्लेचर और कर्स्टन ने हमें खेल में जोखिम प्रबंधन सिखाया।

उन्होंने बताया कि कहां  जोखिम लेना है और कहां नहीं लेना है। रैना ने कहा कि यह दो चीज मेरे दिमाग में हमेशा रही। मुझे याद है कि फ्लिंटॉफ हमारी तरफ आए। मैं और धोनी नेट्स पर बल्लेबाजी कर रहे थे। फ्लिंटॉफ ने अच्छी गेंदबाजी की। धोनी ने मुझसे कहा कि अगर तुम्हें अच्छी गेंद मिले तो आप मुझे किसी कीमत पर हिट नहीं कर सकते और अगर कमजोर गेंद मिली तो तुम हिट कर सकते हो। टी-20 क्रिकेट आसान है। अगर आप इसे कठिन समझेंगे तो यह कठिन लगेगा।

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