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EXCLUSIVE: पंत ने बताया- कितना मुश्किल है धौनी को रिप्लेस करना

धौनी की गैरमौजूदगी में पंत वेस्टइंडीज दौरे पर वनडे और टी20 टीम में प्राइमरी विकेटकीपर के तौर पर खेलते नजर आएंगे। ऐसे में उनके ऊपर सभी की निगाहें टिकी होंगी।

ms dhoni and rishabh pant  getty images

21 साल की उम्र में ही ऋषभ पंत भारतीय क्रिकेट टीम का जाना-माना नाम बन चुके हैं। टेस्ट क्रिकेट में वो टीम इंडिया के प्राइमरी विकेटकीपर बल्लेबाज हैं और वनडे और टी20 फॉरमैट में भी उन्हें महेंद्र सिंह धौनी का उत्तराधिकारी कहा जाने लगा है। धौनी की गैरमौजूदगी में पंत वेस्टइंडीज दौरे पर वनडे और टी20 टीम में प्राइमरी विकेटकीपर के तौर पर खेलते नजर आएंगे। ऐसे में उनके ऊपर सभी की निगाहें टिकी होंगी। हिन्दुस्तान टाइम्स से खास बातचीत में ऋषभ पंत ने कई मुद्दों पर बात की है।

सवालः वनडे टीम में बल्लेबाज और विकेटकीपर के तौर पर महेंद्र सिंह धौनी को रिप्लेस करना कितना बड़ा चैलेंज हो सकता है किसी के लिए भी?

जवाबः मुझे पता है कि धौनी की जगह भरना बहुत मुश्किल है, लेकिन अगर मैं इसके बारे में सोचता रहूंगा तो ये दिक्कत वाली बात हो सकती है। मैं इस पर ध्यान नहीं दे रहा कि कौन क्या बोलता है। मैं बस अपने देश के लिए अच्छा करना चाहता हूं। मैं इस चैलेंज को बहुत सकारात्मक ढंग से ले रहा हूं। अब मुझे देखना होगा कि मैं क्या-क्या सीख सकता हूं और क्या सुधार सकता हूं।

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सवालः अपने करियर की शुरुआत में आप लगभग अपने सभी वनडे मैच धौनी के साथ में खेले हैं, आप किस तरह से उनसे प्रेरणा लेते हैं?

जवाबः जिस तरह से वो गेम को पढ़ते हैं, वो सबसे पहली चीज है जो आप सीखना चाहेंगे। इसके बाद वो प्रेशर के समय भी काफी शांत रहते हैं। बहुत सारी चीजें हैं जो उनसे सीखी जा सकती हैं। इसके अलावा वो ऑफ द फील्ड भी काफी मददगार हैं। मैं हमेशा अपने सीनियर्स से सीखने पर ध्यान देता हूं।

सवालः ज्यादातर मौकों पर इंटरनेशनल क्रिकेटरों को वनडे में अपनी जगह बनानी पड़ती है, टेस्ट टीम में घुसने के लिए, लेकिन आपने बिल्कुल उल्टा रास्ता लिया। क्या वनडे से पहले टेस्ट का अनुभव आपके काम आया?

जवाबः मैं अलग-अलग फॉरमैट में अंतर के बारे में ज्यादा नहीं सोचता हूं। हो सकता है मुझे इससे मदद मिली हो। टेस्ट क्रिकेट खेलने से मुझे अच्छा अनुभव मिला। लोग कहते हैं कि टेस्ट क्रिकेट सबसे मुश्किल फॉरमैट है। तो मुझे काफी कुछ सीखना है, कैसे पारी को आगे बढ़ाते हैं, लोअर ऑर्डर में कैसे बल्लेबाजी करनी है और पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ कैसे बल्लेबाजी करनी है।

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टेस्ट क्रिकेट में हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता है। खासकर तब जब आप पूरा दिन फील्डिंग करने के बाद बल्लेबाजी करने के लिए आते हैं। वो बिल्कुल अलग अनुभव होता है। वनडे और टी20 में चीजें काफी तेजी से होती हैं। मैं बस इस पर ध्यान देता हूं कि मुझे क्या करना है और क्या नया सीखना है। आप जितने इंटरनेशनल मैच खेलते हैं, उतना ही ज्यादा सीखते हैं, फिर वो चाहे कोई भी फॉरमैट हो।

सवालः आप बहुत कम उम्र में रुढ़की से दिल्ली आ गए थे क्रिकेट पर फोकस करने के लिए, ये किसका आइडिया था?

जवाबः ये मेरे पिता का फैसला था। उस समय उत्तराखंड के पास बीसीसीआई एफिलिएशन नहीं था। तो उन्हें पता था कि उत्तराखंड में कोई फायदा नहीं होगा और हमें कहीं और मूव करना पड़ेगा। इसीलिए उन्होंने मुझे दिल्ली भेजा। जब आप अपने स्टेट से बाहर जाते हैं तो आप ये रिस्क लेते हैं। लेकिन मुझे ऐसा करना पड़ा क्योंकि अगर मैं रुढ़की में क्रिकेट खेलता रहता तो उसका कोई फायदा नहीं होता।

मेरे परिवार ने मुझे हर कदम पर सपोर्ट किया है। मैं जिस भी परिस्थिति में था मेरा परिवार हमेशा मेरे साथ था, हमेशा मुझे सहारा दिया और मेरी मदद की। यह काफी चुनौती भरा था। सबका सफर मुश्किलों भरा था, मेरा भी इससे अलग नहीं था। मुझे पता था कि अभी नहीं तो कभी ना कभी मुझे सफलता जरूर मिलेगी।

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सवालः वनडे क्रिकेट में नंबर-4 पर बल्लेबाजी करते हुए आप कितने कंफर्टेबल हैं? आपने वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में नंबर चार पर विकेट गंवाने से पहले अच्छी शुरुआत की थी।

जवाबः मुझे नंबर-4 पर बल्लेबाजी करना पसंद है। मेरे लिए ये कुछ नया नहीं था कि मैं नंबर-4 पर बल्लेबाजी कर रहा हूं, आईपीएल में भी मैं ऐसा कर चुका हूं। मैं इस रोल के लिए प्रैक्टिस कर चुका हूं। नंबर-4 पर बल्लेबाजी करने के लिए आपको परिस्थिति के हिसाब से खेलना होता है। कोई खास स्टाइल नहीं है, मैं हमेशा परिस्थिति के हिसाब से खेलता हूं। मुझे नहीं पता कि लोगों ने इसके बारे में क्या कुछ कहा क्योंकि मैं ज्यादा अखबार नहीं पढ़ता हूं। मेरा बस इतना फोकस होता है कि मुझे परिस्थिति के हिसाब से कैसे खेलना है। टीम मुझसे क्या चाहती है और मैं टीम को कैसे जीत दिला सकता हूं, इस पर ही मेरा ध्यान रहता है।

सवालः आप कुछ खतरनाक शॉट खेलते हैं, जिससे गेंदबाज की लय बिगड़ जाती है, आपने ये कहां से सीखा?

जवाबः मेरे कोच ने हमेशा मुझे एक चीज सिखाई है, हर साल आपको अपने खेल में कुछ नया जोड़ना है। आप एक तरह के खेल पर टिके नहीं रह सकते हैं क्योंकि टेक्नॉलिजी काफी सुधर गई है और आपको हमेशा खुद को बेहतर बनाने की जरूरत है। हर रोज कुछ नया आपको अपने अंदर लाने की जरूरत है। मैं यही करने की कोशिश करता हूं। मैं बस नई चीजें सीखता रहता हूं। अगर इससे मुझे मदद मिलती है तो मैं इसे मैच में ट्राई करता हूं। कुछ दिन होते हैं जब नेट्स में मैं नए शॉट्स खेलता हूं और कुछ दिन होते हैं जब नहीं खेलता हूं। ये सब लंबे प्रोसेस का हिस्सा है।

सवालः आपको बहुत कम उम्र में फर्स्ट क्लास टीम का कप्तान बना दिया गया था। क्या इससे विकेटकीपर के तौर पर आपको खेल को बेहतर तरीके से पढ़ने में मदद मिली?

जवाबः जब मुझे दिल्ली की कप्तानी करने का मौका मिला तो मैं खुश था। विकेटकीपर के लिए फील्ड सेट करना आसान होता है। किसी और जगह होकर ये करना इतना आसान नहीं होता है। इसके अलावा विकेटकीपर के तौर पर आप खेल को और बल्लेबाज को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं। एक विकेटकीपर अपने गेंदबाजों की बेहतर तरीके से मदद कर सकता है। तो जब मैं कप्तान बना तो ये सब बातें मेरे साथ भी थीं।

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सवालः क्या आप जितना अपनी बल्लेबाजी को बेहतर करने की कोशिश करते हैं, उतनी ही अपनी विकेट-कीपिंग पर भी काम करते हैं? आपके छोटे से टेस्ट करियर में पूर्व क्रिकेटरों ने आपकी विकेट-कीपिंग टेकनीक पर सवाल खड़े किए थे।

जवाबः एक खिलाड़ी के तौर पर कोई भी परफेक्ट नहीं होता है। मैं सिर्फ सुधार की कोशिश कर सकता हूं। मुझे किसी से भी सलाह लेना अच्छा लगता है। अगर कोई मेरी मदद करना चाहता है तो मेरे पास डायरेक्ट आ सकता है। मुझे किसी से भी कुछ भी सीखने में कोई दिक्कत नहीं है।

सवालः अगर सीखने की बात करें तो विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे क्रिकेटरों के साथ खेलकर आपको कैसा लगता है?

जवाबः हमारी टीम की बेस्ट बात है कि आप किसी से भी बात कर सकते हैं और उनसे सलाह मांग सकते हैं। और अगर आपको लगता है कि आपके पास कोई सलाह है तो वो भी आप शेयर कर सकते हैं। विराट भइया हमेशा सुनते हैं, वो कभी ऐसा नहीं दिखाते कि वो कप्तान हैं और उन्हें यंग क्रिकेटरों की नहीं सुननी चाहिए। इस तरह से यंग खिलाड़ियों का काफी कॉन्फिडेंस बढ़ता है कि कप्तान आपकी सुनता है, आपसे सलाह लेता है। ये मेरे लिए काफी बड़ी बात है। बाकी सीनियर खिलाड़ी भी मेरी काफी मदद करते हैं।

सवालः क्या आप 21 साल की नॉर्मल लाइफ को मिस करते हैं?

जवाबः कभी नहीं, शायद आज से 10-15 साल बाद मैं ये सोचना शुरू करूं, लेकिन अभी तो बिल्कुल नहीं। जब आपने ऐसा कुछ हासिल किया हो, जिसके लिए बचपन से मेहनत की हो, तो आप ऐसा कैसे सोच सकते हैं?
 

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  • Web Title:Rishabh Pant exclusive interview on replacing ms dhoni and his own unique batting style