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PHOTOS: जानिए क्या कर रहे हैं कभी IPL के स्टार रहे ये गुमनाम खिलाड़ी?

आईपीएल में कई ऐसे खिलाड़ियों को नाम और शोहरत दिलाई लेकिन ये खिलाड़ी अब इस लीग के इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं।

कभी IPL से सुर्खियों में आने वाले खिलाड़ियों की गुमनामी की दास्तां
कभी IPL से सुर्खियों में आने वाले खिलाड़ियों की गुमनामी की दास्तां

इंडियन प्रीमियर लीग उन्हीं खिलाड़ियों के लिए है जो समय के साथ अपने खेल में परिवर्तन करते रहे हैं। आईपीएल में कई ऐसे खिलाड़ियों को नाम और शोहरत दिलाई लेकिन ये खिलाड़ी अब इस लीग के इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं। हालांकि, ये खिलाड़ी अपनी ढलान के लिए किसी को दोषी नहीं ठहराते न ही किसी को जिम्मेदार मानते हैं। उन्होंने क्रिकेट खेलना भी नहीं छोड़ा है। हिन्दुस्तान टाइम्स ने ऐसे ही कुछ खिलाड़ियों से बात की है जिन्हें कभी आईपीएल ने शोहरत दिलाई और अब वे गुमनामी में जी रहे हैं। आइए जानते हैं इन खिलाड़ियों की कहानी इन्हीं की जुबानी...

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मैंच बड़ी चीजों के लिए बना था: पॉल वॉलथैटी
मैंच बड़ी चीजों के लिए बना था: पॉल वॉलथैटी

मुंबई का यह क्रिकेटर भविष्य का खिलाड़ी माना जाता था, जब इसने 2002 में अंडर-19 विश्व कप टीम में अपना स्थान पक्का किया था। वॉल्थैटी ने हिन्दुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा, 'मेरा करियर चोटों से प्रभावित रहा है। जब भी मैं कुछ बड़ा करने की ओर बढ़ा, मुझे इंजुरी हो गई और मेरी प्रोग्रेस रुक गई।' पॉल वॉल्थैटी ने साल 2011 के आईपीएल सीजन में किंग्स इलेवन पंजाब की ओर से खेलते हुए चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ 63 गेंदों में 120 रन की मैच जिताऊ शतकीय पारी खेली थी। इसके बाद ही वह सुर्खियों में आए थे। उनकी यह पारी आईपीएल की सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक में गिनी जाती है। 

वॉल्थैटी ने आईपीएल के इस सीजन में 137 की स्ट्राइक रेट से 463 रन बनाए थे। लेकिन इसके बाद पॉल वॉल्थैटी की कलाई में गैंगलियन हो गया। उन्हें अपना बल्ला, यहां तक की कैप उठाने में भी मशक्कत करनी पड़ती थी। वॉल्थैटी ने साल 2012 के आईपीएल सीजन में भी 6 मैच खेले और फिर 2014 आईपीएल सीजन में एक मैच खेलने के बाद उनका घुटना चोटिल हो गया। वह एयर इंडिया में काम करते हैं और अभी भी मुंबई में क्लब क्रिकेट खेलते हैं। उनकी उम्र अब 35 की हो चली है लेकिन हाल ही में वह क्लब क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ स्कोरर रहे हैं।

पॉल वॉल्थैटी कहते हैं, 'इसमें कोई संदेह नहीं कि मेरा करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। लेकिन मुझे किसी बात का पश्चाताप नहीं है। व्यक्तिगत रूप से मुझे बड़ा आश्चर्य होता है जब लोग मेरे करियर को दया भरी दृष्टि से देखते हैं। ईमानदारी से कहूं तो कई लोगों का सपना होता जो मैं जी चुका हूं। सफलता के कुछ पल ही सही। कितने लोग चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ मैच जिताऊ शतकीय पारी खेल पाए हैं? और कितने लोग एक आईपीएल सीजन में 463 रन बना सके हैं? ऐसे युवा खिलाड़ी हैं जो आईपीएल में खेलना चाहते हैं और प्रेरणा के लिए मेरी तरफ देखते हैं, मुझसे सलाह मांगते हैं। इससे मुझे आत्मसंतुष्टि मिलती है। यह सच है कि अगर इंजुरी नहीं होती तो मैंच और ज्यादा खेल सकता था। लेकिन साफ-साफ कहूं तो मैंने जितना हासिल किया है उसके लिए खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं।'

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मेरी गरीबी के बारे में कहानियां हंसाने वाली हैं: कामरान खान
मेरी गरीबी के बारे में कहानियां हंसाने वाली हैं: कामरान खान

जब आईपीएल का 12वां सीजन अपने मध्यांतर में पहुंचने वाला था तो बाएं हाथ का यह तेज गेंदबाज उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में स्थित नदवासराय नामक अपने गांव में 200 मीटर की एक कच्ची ट्रैक पर अपनी फिटनेस के लिए दौड़ लगा रहा था। कामरान खान को कभी राजस्थान रॉयल्स के तत्कालीन कप्तान शेन वॉर्न ने 'टॉरनेडो' नाम दिया था। साल 2009 के आईपीएल सीजन में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ एक मैच जिताऊ सुपर ओवर डालकर कामरान खान सुर्खियों में आए थे, जिसमें उन्होंने क्रिस गेल का विकेट भी चटकाया था। राजस्थान रॉयल्स के कप्तान शेन वॉर्न ने कामरान खान को देहात जिसे हिंटरलैंड कहते हैं वहां से पकड़कर अपनी टीम में शामिल किया था।

कामरान खान ने बहुत विकेट तो नहीं चटकाए थे (5 मैचों में 6 विकेट, सर्वश्रेष्ठ 3/18), लेकिन अपने गेंदबाजी एक्शन, स्विंग कराने और यॉर्कर डालने की काबिलियत के कारण शेन वॉर्न की नजरों में आ गए थे। जल्द ही उनके गेंदबाजी एक्शन को संदिग्ध करार दे दिया गया। राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें अपने एक्शन पर काम करने के लिए ऑस्ट्रेलिया भेज दिया। साल 2010 में कामरान खान ने राजस्थान रॉयल्स के लिए सिर्फ 3 मुकाबले खेले। साल 2011 और 2012 के आईपीएल सीजन में वह पुणे वारियर्स के लिए खेले और सिर्फ 1 मैच में मैदान पर उतरे। कामरान खान कहते हैं, 'मैं थोड़ा चिंतित था, लेकिन आईपीएल ने मुझे सीधे शीर्ष स्तर के क्रिकेट में पहुंचा दिया था। मैं सैयद मुश्ताक अली टी20 टुर्नामेंट के लिए उत्तर प्रदेश की टीम में चुना गया। दो मैच भी खेला। फिर अंडर-22 टीम में भेज दिया गया लेकिन खेलने का मौका नहीं मिला।'

सहारा में काम कर रहे कामरान कहते हैं, 'मैं क्रिकेट खेलने के लिए संघर्ष कर रहा था, लेकिन इस दौरान जिंदगी अच्छी जी रहा था। मुंबई के अंधेरी में मेरा एक घर है, मेरे परिवार के पास मछली पालन के लिए गांव में तीन-चार तालाब भी हैं। मैं बीएमडब्ल्यू चलाता हूं। जब लोग सोशल मीडिया में मेरी प्रोफाइल और स्टेटस देखते हैं, गाड़ी के साथ तस्वीरें देखते हैं तो उन खबरों पर हंसते हैं जो मीडिया में मेरी गरीबी को लेकर चलाई गईं।' उत्तर प्रदेश ने कामरान को रिजेक्ट कर दिया और गेंदबाजी एक्शन पर एनओसी नहीं मिलने के बाद वह हैदराबाद चले गए। वह अंडर-25 टीम में चयनित हो गए और 4 मैचों में 21 विकेट चटकाए। लेकिन नए नियम ने दूसरे प्रदेश से आए खिलाड़ियों को टीम में शामिल करने से रोक दिया। जिसके बाद कामरान खान के ​क्रिकेटिंग करियर पर ब्रेक लग गया। वह अभी भी हैदराबाद में स्थानीय क्लब क्रिकेट खेलते हैं। वह बुलंदशहर में एक क्रिकेट अकादमी भी चलाते हैं।

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आपको आगे बढ़ना पड़ता है: स्वप्निल अस्नोडकर
आपको आगे बढ़ना पड़ता है: स्वप्निल अस्नोडकर

प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 88 मैचों खेलने वाले और गोवा के सबसे अनुभवी क्रिकेटर स्वप्निल अस्नोडकर पिछले डेढ़ साल से गुमनामी की जिंदगी जी रहे हैं। गोवा के लिए 2001-02 में रणजी पदार्पण करने वाले स्वप्निल ने आईपीएल में 2008 से लेकर 2011 तक राजस्थान रॉयल्स का प्रतिनिधित्व किया। लेकिन वह दिसंबर 2017 के बाद से अपनी राज्य की टीम से भी बाहर हैं। अस्नोडकर कहते हैं, 'इस सत्र में मैच गोवा टीम का हिस्सा नहीं था। चयनकर्ताओं ने मुझे और शादाब जकाती के साथ दो और खिलाड़ियों को यह कहते हुए टीम से बाहर कर दिया कि वे युवाओं को बढ़ावा देना चाहते हैं। 

स्वप्निल अस्नोडकर आईपीएल के पहले सत्र में ही सुर्खियों में आए थे, ​जब उन्होंने राजस्थान रॉयल्स के लिए टूर्नामेंट में 400 रन बनाए। ओपनिंग की जिम्मेदारी निभाते हुए अस्नोडकर ने कई शानदार पारियां खेली। राजस्थान रॉयल्स ने 2008 आईपीएल का खिताब भी जीता था। साल 2009 का आईपीएल लोकसभा चुनावों की वजह से दक्षिण अफ्रीका में आयोजित किया गया। उम्मीद थी कि स्वप्निल इस साल अच्छा प्रदर्शन कर राष्ट्रीय टीम में अपना स्थान पक्का कर लेंगे। लेकिन वह सत्र शुरू होने से पहले ही चोटिल हो गए। इसके बाद 2010 में स्वप्निल अस्नोडकर ने 2 और 2011 में 1 मैच खेला। फिर आईपीएल से उनकी विदाई हो गई। वह आईपीएल में नीलामी के लिए सूचीबद्ध तो होते रहे लेकिन किसी टीम ने उनमें दिलचस्पी नहीं दिखाई।

अस्नोडकर को गोवा टीम से बाहर किए जाने का गम है। लेकिन उन्हें भरोसा है कि वह तीन साल और प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलेंगे। वह लोअर डिविजन क्रिकेट में खेल रहे हैं और अपनी फिटनेस पर ध्यान दे रहे हैं। स्वप्निल ने हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में कहा, 'आपको आगे बढ़ना पड़ता है। आप बुरे दौर के बारे में सोचते नहीं रह सकते। जब उन्होंने मुझे गोवा टीम से बाहर किया तो बहुत देर हो चुकी थी और मैं किसी और प्रदेश की टीम की तरफ से अप्लाई नहीं कर सका। इस बार मैं दूसरे स्टेट से खेलने के लिए अप्लाई करूंगा। खासकर नए शामिल किए गए राज्यों की ओर से। मैं गोवा टीम में भी वापसी की उम्मीद करता हूं।'

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दूसरों की सफलता मुझे प्रेरित करती है: मनप्रीत सिंह गोनी
दूसरों की सफलता मुझे प्रेरित करती है: मनप्रीत सिंह गोनी

वह पहले आईपीएल सीजन की खोज थे। एक शानदार तेज गेंदबाज। भारत के लिए साल 2008 में एशिया कप में दो वनडे मैच खेलने के बाद मनप्रीत गोनी को चेन्नई सुपर किंग्स की टीम ने खरीदा था। अपने पहले आईपीएल सत्र में गोनी ने 16 मैचों में 17 विकेट झटके। इसके तीन साल बाद नीलामी में मनप्रीत गोनी को डेक्कन चार्जर्स ने खरीदा और उनके पतन का दौर शुरू हो गया। इंजुरी, फॉर्म में निरंतरता की कमी और पारिवारिक दिक्कतों ने मनप्रीत गोनी के करियर को प्रभावित कर दिया। डेक्कन चार्जर्स, किंग्स इलेवन पंजाब और गुजरात लॉयंस के साथ उनकी पारी को वह खुद भी याद नहीं रखना चाहेंगे। 

मनप्रीत गोनी के पास 61 प्रथम श्रेणी मैचों का अनुभव है। लेकिन वह पंजाब की रणजी टीम में अपना स्थान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने इस साल 4 प्रथम श्रेणी मैचों में हिस्सा लिया और कुछ टी20 मैच भी खेले। लेकिन आईपीएल में उनकी वापसी नहीं हो सकी। गोनी कहते हैं, 'मुझे लगता है कि मेरे अंदर आईपीएल में खेलने और सफल होने की क्षमता अभी भी है। मैंने ट्रॉयल्स के दौरान अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। लेकिन मुझे नहीं पता क्यों चयनित नहीं किया गया। मनप्रीत गोनी हालांकि इस बात के लिए खुश हैं कि युवा खिलाड़ियों को मौके मिल रहे हैं। गोनी कहते हैं, 'मैंने आईपीएल में महान खिलाड़ियों के साथ खेला है। मुझे पता है कि इस स्तर पर सफल होने के लिए कितनी मेहनत लगती है। दूसरों की सफलता मुझे प्रेरित करती है। मुझे लगता है कि कुछ और साल मैं खेल सकता हूं। मैं प्रयास करता रहूंगा।'

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